
Jammu Kaladi GI Tag News: ‘जम्मू का मोज़ेरेला’ अब छुएगा विदेशी आसमान: कलाडी को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी शुरू
Jammu Kaladi GI Tag News : नई दिल्ली, 22 जनवरी, 2026ः जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले की पारंपरिक पहचान, ‘कलाडी’ (Kaladi), जल्द ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों और वैश्विक फूड चेन्स का हिस्सा बन सकती है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस पारंपरिक डेयरी उत्पाद को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रमाणीकरण के साथ दुनिया भर में पहुँचाने का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
Jammu Kaladi GI Tag News : कलाडी जम्मू क्षेत्र का एक प्राचीन और पारंपरिक ‘हस्तनिर्मित’ पनीर है। इसे मुख्य रूप से कच्चे वसा युक्त दूध (Fat-rich milk) से तैयार किया जाता है। इसकी कुछ खास विशेषताएं इसे दुनिया के अन्य पनीरों से अलग बनाती हैं:
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तैयार करने की विधि: इसे दूध को मट्ठे (whey) के साथ जमाकर बनाया जाता है। सूखने के बाद यह ऊपर से सख्त और अंदर से नरम होता है।
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स्वाद और बनावट: पकाते समय यह बाहर से कुरकुरा और अंदर से पिघला हुआ हो जाता है, जिसके कारण इसे ‘जम्मू का मोज़ेरेला’ भी कहा जाता है।
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सांस्कृतिक महत्व: यह डोगरा व्यंजनों का अभिन्न अंग है और इसे हाल ही में GI टैग (Geographical Indication) प्रदान किया गया है।
Jammu Kaladi GI Tag News : वैज्ञानिक हस्तक्षेप से बढ़ेगी ताकत
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक में निर्देश दिया कि कलाडी की सबसे बड़ी बाधा—इसकी कम शेल्फ लाइफ को दूर किया जाए। वर्तमान में कलाडी बिना रेफ्रिजरेशन के केवल कुछ ही दिन टिक पाती है, जिससे इसका निर्यात मुश्किल होता है।
इस पहल के मुख्य बिंदु:
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वैज्ञानिक साझेदारी: मैसूर स्थित CSIR-CFTRI (देश की शीर्ष खाद्य लैब) और जम्मू स्थित CSIR-IIIM मिलकर कलाडी के प्रसंस्करण (Processing) और पैकेजिंग पर काम करेंगे।
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शुद्धता का संरक्षण: निर्देश दिए गए हैं कि वैज्ञानिक तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद कलाडी के पारंपरिक दूधिया स्वाद, लचीली बनावट और पोषण के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
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अगले 6 महीने में बदलाव: वैज्ञानिकों को अगले कुछ हफ्तों में प्रारंभिक रिपोर्ट और छह महीने के भीतर ठोस परिणाम देने को कहा गया है।
यह पहल ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) के तहत उधमपुर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी।
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युवाओं को रोजगार: बड़े पैमाने पर उत्पादन से स्थानीय डेयरी किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
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वैश्विक बाजार: बेहतर पैकेजिंग के बाद इसे बाजरा (Millet) उत्पादों की तरह अंतरराष्ट्रीय फूड चेन का हिस्सा बनाया जाएगा।
कलाडी का उधमपुर से निकलकर वैश्विक बाजारों तक का सफर अब शुरू हो चुका है। विज्ञान और परंपरा का यह मेल न केवल डोगरा व्यंजनों का मान बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय किसानों की आय में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।












