सावन में चारों ओर हरियाली छा जाती है। इसमें लोग हरा कपड़ा ज्यादा पहनते हैं। दरअसल, इसका धार्मिक महत्व है। इस महीने में हरा रंग उपयोग करने और पहनने से भाग्य प्रभावित होता है। हरा रंग सौभाग्य का रंग होता है। दरअसल, यह पूरा महीना प्रकृति से खुद को जोड़ने का खास महीना होता है। इसलिए शिव पर जल अर्पित कर भी हम खुद को प्रकृति से जोड़ते हैं। इसी तरह इस महीने हरा रंग पहनकर भक्तजन खुद को प्रकृति से जोड़ते हैं, जिसका असर उनके भाग्य पर भी होता है।
हरा रंग पहनने वाले लोगों पर होती है विशेष कृपा
शास्त्रों में भी प्रकृति को ईश्वर का रूप माना गया है और इसलिए उसकी पूजा भी की जाती है। इस पूरे महीने हरा पहनने वाले लोगों पर प्रकृति की विशेष कृपा होती है। महिलाएं हरे रंग की चूड़ियां और सुहाग की चीजें पहनकर प्रकृति से खुद को जोड़ती हैं और इस तरह उनके सुहाग की सलामती का उन्हें आशीर्वाद मिलता है।
हरा रंग बुद्ध ग्रह का प्रतीक होता है। बुद्ध ग्रह करिअर और व्यापार से जुड़ा हुआ है। ऐसे में हरा रंग पहनने से बुद्ध प्रसन्न होते हैं और सुहागिनों के घर में संपन्नता और धन-धान्य बढ़ाते हैं।
सावन में हरा रंग पहनने से शिव खासतौर से खुश होते हैं। भगवान शंकर का प्रकृति से विशेष जुड़ाव है और ऐसे में भक्त जब खुद को प्रकृति के अनुरूप ढाल लेता है तो शिव विशेष तौर से खुश हो जाते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। सावन में हरे रंग चूड़ियां पहनने वाली महिलाओं पर विष्णु जी भी प्रसन्न होते हैं।
हरा-हरा रंग प्रकृति, उर्वरता, बहुलता, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि का प्रतीक है। हरा, उपचार का भी रंग है और ये हार्ट के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर की समस्याओं के लिए भी अच्छा माना जाता है जिन शादीशुदा दंपति के जीवन में अनबन चल रही हो वो अपने बेडरुम के दक्षिण पूर्व हिस्से को हरे रंग से पेंट करें तो इसका लाभ मिल सकता है
सावन में हरा रंग पहनने से प्रभावित होता है भाग्य

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140
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