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LNECN-2026 Global Conference Dehradun: देहरादून में लगेगा विशेषज्ञों का महाकुंभ, ‘लिविंग विद नेचर’ वैश्विक सम्मेलन का होगा आयोजन

प्राकृतिक संसाधनों के निरंतर क्षरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच, देहरादून एक महत्वपूर्ण वैश्विक विमर्श की मेजबानी करने के लिए तैयार है। 19 से 21 नवंबर, 2026 तक ICAR-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (IISWC) में तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन "लिविंग विद नेचर: एम्पावरिंग कम्युनिटीज विद इकोसिस्टम इनसाइट्स (LNECN-2026)" का आयोजन किया जाएगा ।

Rajesh Pandey
Last updated: April 15, 2026 4:06 pm
Rajesh Pandey
5 hours ago
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LNECN-2026 Global Conference Dehradun: देहरादून, 15 अप्रैल 2026: प्राकृतिक संसाधनों के निरंतर क्षरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच, देहरादून एक महत्वपूर्ण वैश्विक विमर्श की मेजबानी करने के लिए तैयार है। 19 से 21 नवंबर, 2026 तक ICAR-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (IISWC) में तीन दिवसीय वैश्विक सम्मेलन “लिविंग विद नेचर: एम्पावरिंग कम्युनिटीज विद इकोसिस्टम इनसाइट्स (LNECN-2026)” का आयोजन किया जाएगा ।

यह सम्मेलन इंडियन एसोसिएशन ऑफ सॉइल एंड वाटर कंजर्वेशनिस्ट्स (IASWC) द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसमें ICAR-IISWC का सहयोग और नाबार्ड (NABARD), जल शक्ति मंत्रालय तथा अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (IWMI) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों का समर्थन प्राप्त है ।

Also Read: LNSWSEC-2024: प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए खास सिफारिशें

सम्मेलन की आवश्यकता और पृष्ठभूमि

LNECN-2026 Global Conference Dehradun: विश्व की 95% खाद्य आपूर्ति मृदा (मिट्टी) पर टिकी है, लेकिन आज दुनिया के अधिकांश मृदा संसाधन खराब स्थिति में हैं । भारत के संदर्भ में चुनौती और भी गंभीर है, जहाँ वैश्विक औसत (0.29 हेक्टेयर) की तुलना में प्रति व्यक्ति कृषि भूमि की उपलब्धता मात्र 0.12 हेक्टेयर है । आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल भूमि का लगभग 36.7% हिस्सा क्षरण (Degradation) की चपेट में है, जिसमें जल अपरदन सबसे बड़ा कारक है । इसी गंभीर परिदृश्य को देखते हुए यह सम्मेलन पारिस्थितिकी तंत्र बहाली और सामुदायिक सशक्तिकरण पर केंद्रित होगा ।

प्रमुख विषय और चर्चा के बिंदु

LNECN-2026 Global Conference Dehradun:  इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को छह मुख्य विषयों (Themes) में विभाजित किया गया है:

सामुदायिक नेतृत्व में मृदा एवं जल प्रबंधन: सहभागी वाटरशेड प्रबंधन और पारंपरिक प्रथाओं का आधुनिक हस्तक्षेपों के साथ संगम ।

पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ: मृदा स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और आर्द्रभूमि (Wetland) बहाली ।

जलवायु अनुकूलन: बाढ़, सूखे और कटाव नियंत्रण के लिए प्रकृति-आधारित समाधान ।

विज्ञान, नीति और अभ्यास: मृदा निगरानी में GIS, IoT और AI जैसे डिजिटल उपकरणों का उपयोग ।

डिजिटल और स्वदेशी बुद्धिमत्ता: स्थानीय कार्रवाई के लिए सामुदायिक विज्ञान और डेटा प्रणालियों का सशक्तिकरण ।

लैंडस्केप पुनरुद्धार: नदियों का पुनरुद्धार और शहरी पारिस्थितिकी तंत्र का प्रबंधन ।

विशेष आकर्षण और भागीदारी

सम्मेलन में दुनिया भर के नीति निर्माता, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, किसान और NGO प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

प्रस्तुतियां: इसमें प्लेनरी लेक्चर, आमंत्रित पत्र, रैपिड फायर और पोस्टर सत्र आयोजित किए जाएंगे ।

युवाओं को प्रोत्साहन: 40 वर्ष से कम आयु के शोधकर्ताओं के लिए भविष्य के अनुसंधान पर एक विशेष सत्र का आयोजन होगा ।

पुरस्कार: वर्ष 2024 और 2025 के IASWC पुरस्कार उद्घाटन सत्र में दिए जाएंगे, साथ ही प्रत्येक थीम में सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति को भी सम्मानित किया जाएगा ।

पंजीकरण और महत्वपूर्ण तिथियां

इच्छुक प्रतिभागी 31 जुलाई, 2026 तक अपने सारांश (Abstract) जमा कर सकते हैं । पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है । भारतीय प्रतिनिधियों के लिए शुल्क श्रेणियों के आधार पर ₹5,000 से ₹15,000 के बीच है, जबकि विदेशी वैज्ञानिकों के लिए यह $700 है ।

सम्मेलन के बहाने प्रतिनिधियों को देहरादून के समृद्ध शैक्षणिक परिवेश और पर्यटन स्थलों जैसे वन अनुसंधान संस्थान (FRI), सहस्त्रधारा, और पास के ऋषिकेश व हरिद्वार घूमने का अवसर भी मिलेगा ।

यह आयोजन न केवल ज्ञान साझा करने का मंच बनेगा, बल्कि “एवरग्रीन रिवोल्यूशन” (सदाबहार क्रांति) की दिशा में ठोस नीतिगत निर्णयों और वैश्विक साझेदारी को भी मजबूती प्रदान करेगा ।

 

संपर्क विवरण: अधिक जानकारी के लिए आयोजन सचिव डॉ. अंबरीश कुमार या डॉ. रमन जीत सिंह से lnecn2026@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है ।

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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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