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कांग्रेस हाईकमान कहेगा तो पद छोड़ने के लिए तैयारः गोदियाल

चुनाव परिणाम के बाद पहली बार प्रेस कान्फ्रेंस में गोदियाल ने कहा, होली बाद होगी समीक्षा

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम के बाद पहली बार देहरादून में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा, होली के बाद हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी। एक सवाल पर उनका कहना है कि कांग्रेस संगठन की बेहतरी के लिए हाईकमान (पद छोड़ने के लिए) कहेगा, तो सहज स्वीकार करूंगा। उनसे पूछा गया था कि आपने हार की नैतिक जिम्मेदारी ली है, क्या आप पद छोड़ेंगे।

क्या आपको अपने से अच्छा कोई और अध्यक्ष लगता है, इस सवाल पर उन्होंने कहा, दुनिया में अच्छाई की कोई सीमा नहीं है। कांग्रेस का हर कार्यकर्ता अध्यक्ष बनने की क्षमता रखता है।

उत्तराखंड की श्रीनगर सीट से चुनाव हारे गोदियाल ने कहा, मेरी जगह कोई दूसरी व्यक्ति होता तो रिकाउंटिंग कराता। लेकिन मैं इस बात से क्षुब्ध था कि मैंने जहां अपने जीवन का सबकुछ लगा दिया। वहां मेरी आशा के विपरीत रिजल्ट आया, तो मैंने रिकाउंटिंग को उचित नहीं समझा। मैं बहुत बड़ा दिल रखता हूं। हमारे इरादे बुलंद हैं, इरादे स्पष्ट हैं।

वो दावा करते हैं, उनके विधानसभा क्षेत्र में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) के साढ़े छह सौ वोट निश्चित रूप से मेरे वोट हैं, क्योंकि लोगों ने मुझे वोट देने के लिए सबसे नीचे के बटन को सबसे पहला समझ लिया है। पहाड़ों में नोटा को वोट देने के लिए कोई इतनी लंबी दूरी तय नहीं करता।

पत्रकारों से वार्ता में गोदियाल कहते हैं कि कांग्रेस संगठन की मजबूती के पीछे मेरा मकसद इस राज्य को मजबूत करना है। राज्य में बेरोजगारी, महंगाई, पलायन जैसे मुद्दे हैं। राज्य में भ्रमण के दौरान मुझे बेरोजगारी सबसे बड़े मुद्दे के तौर पर दिखा। हम असहज स्थिति में हैं कि इन सबके बाद भी परिणाम सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में आए, इन कारणों का हम अभी तक पूरी तरह पता नहीं लगा पाए।

उन्होंने कहा, हम वसुधैव कुटुंबकम् की बात करते हैं। हम इस विचारधारा को नहीं छोड़ सकते। चुनाव जीतना ही एक मात्र लक्ष्य नहीं है, इस प्रदेश की बेहतरी और खुशहाली हमारा लक्ष्य है। गोदियाल ने कहा कि हम जनता के मुद्दों के लिए लड़ते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते, राज्य में पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेता हूं। टिकटों के बंटवारे में खामियों के सवाल पर उन्होंने कहा, इसके लिए कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है, इसके लिए हम सभी जिम्मेदार हैं, इनमें मैं भी शामिल हूं। यदि कुछ अच्छा हुआ है तो सभी ने किया और कुछ कमियां रही हैं तो भी सभी ने कीं।

उनका कहना है, बड़ी पार्टियों में विरोध की बातें होती हैं, जिनको समय पर ठीक किया जाता है। हमसे ज्यादा विद्रोह हमारी विपक्षी पार्टी में था। जो विद्रोह ठीक हो सका, वो कर पाए, जो नहीं हो सका, वो आपके सामने है। लालकुआं में बहुत लोगों को मनाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं माने, इस बात को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते।

मैं स्वीकार करता हूं कि हम सबकी इच्छा थी कि हरीश रावत लालकुआं से चुनाव लड़ें। हमारी इच्छा अच्छे रिजल्ट के लिए थी, लेकिन अच्छा परिणाम नहीं आया। यदि आप समझते हैं कि मैंने उन्हें (हरीश रावत) को लालकुआं भेजने की कोशिश की तो मैं इसके लिए दोषी हूं, मैं इस बात को अस्वीकार नहीं कर सकता।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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