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चुनाव में हार पर उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल का इस्तीफा

बोले, विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के दिन ही इस्तीफा देना चाहते थे

देहरादून। उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। गोदियाल का कहना है कि वो विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के दिन ही इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन हाईकमान के आदेश की प्रतीक्षा पर रुके थे।

मंगलवार देर शाम कांग्रेस प्रमुख ने चुनाव वाले राज्यों से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्षों से इस्तीफे देने को कहा था। कुछ दिन पहले पत्रकार वार्ता में गोदियाल ने कहा था, कांग्रेस संगठन की बेहतरी के लिए हाईकमान (पद छोड़ने के लिए) कहेगा, तो सहज स्वीकार करूंगा। उनसे पूछा गया था कि आपने हार की नैतिक जिम्मेदारी ली है, क्या आप पद छोड़ेंगे।

हालांकि गणेश गोदियाल ने एक ट्वीट के माध्यम से बताया, आज दिल्ली पंहुच कर जैसे ही यह अवगत हुआ कि अन्य वह सभी राज्यों के जवाबदेह पदाधिकारी, जहां चुनावों में आशातीत सफलता नहीं मिली, अपने पदों से इस्तीफा दे रहे हैं, मैंने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है। कांग्रेस के कार्यकर्ता के तौर पर संघर्ष करता रहूंगा।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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