AI Driven Hardware Inflation: newslive24x7.com Desk, 08 दिसंबर, 2025: बाजार में एक सीधा सा एक लाइन का नियम है: कुछ भी फ्री में नहीं मिलता। हम जो अपने सामान्य कंप्यूटर पर भी AI के कुछ फ्री वर्जन का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसकी बड़ी कीमत कंप्यूटर हार्डवेयर उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ रही है। मार्केट में रोजाना के हिसाब से इनके दाम उछाल पर हैं यानी ये महंगे हो रहे हैं।
AI Driven Hardware Inflation: बड़ी टेक कंपनियां हमारी बहुत सारी सुविधाओं, सेवाओं को ध्यान में रखते हुए जेनेरेटिव AI डेवलप करने की प्रतिस्पर्धा में हैं। प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ यूजर्स की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। यूजर्स बढ़ रहे हैं तो टेक कंपनियों को बड़ी संख्या में हाई-एंड चिप्स (GPU एक्सेलेरेटर) और रैम की आवश्यकता पड़ रही है, पर चिप्स और रैम बनाने वाली कंपनियां सीमित हैं और उनका उत्पादन भी डिमांड के अनुसार नहीं है। ऐसे में डिमांड और सप्लाई का रेशियो गड़बड़ा रहा है और उत्पाद महंगे हो रहे हैं। महंगाई रोज के हिसाब से बढ़ रही है।
AI का असीमित इस्तेमाल और हार्डवेयर की सीमित क्षमताएं
AI-जनित महंगाई का मूल कारण AI मॉडलों को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए आवश्यक अभूतपूर्व कंप्यूटिंग शक्ति है।
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1. GPU एकाधिकार और बेतहाशा मांग
AI Driven Hardware Inflation: आधुनिक AI मॉडल, जैसे कि बड़े भाषा मॉडल (LLMs), को प्रशिक्षित करने के लिए अरबों गणनाओं की आवश्यकता होती है। इसके लिए उन्हें विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए हाई-एंड GPUs (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स) की आवश्यकता होती है, जिनमें बड़ी कंपनियों का लगभग एकाधिकार है।
Google, Microsoft, Meta और OpenAI जैसी टेक दिग्गज इन AI चिप्स (जैसे H100) पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। वे एक बार में हजारों की संख्या में ये चिप्स खरीद रही हैं। इन अत्याधुनिक चिप्स का निर्माण एक अत्यंत जटिल, पूंजी-गहन और समय लेने वाली प्रक्रिया है। सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स (Fabs) तुरंत इतनी विशाल मांग को पूरा करने के लिए अपनी क्षमता नहीं बढ़ा सकते।
जब AI कंपनियाँ अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने के लिए बाजार से अधिकांश उपलब्ध AI एक्सेलेरेटर खरीद लेती हैं, तो मांग आपूर्ति से बहुत अधिक हो जाती है, जिससे इन चिप्स की कीमतें ऊँचाई पर पहुँच जाती हैं।
RAM पर दोहरा दबाव: HBM बनाम DRAM
AI की मांग केवल चिप्स तक सीमित नहीं है, यह मेमोरी (RAM) बाजार पर भी दोहरा दबाव डाल रही है:
AI चिप्स को कुशलता से चलाने के लिए उन्हें हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) की आवश्यकता होती है। मेमोरी निर्माताओं ने अपनी उत्पादन क्षमता का एक बड़ा हिस्सा इस उच्च-लाभ वाले, विशिष्ट HBM के निर्माण की ओर मोड़ दिया है।
HBM को प्राथमिकता देने से, सामान्य कंप्यूटर (PC) और लैपटॉप में उपयोग होने वाली DRAM (जैसे DDR5) की आपूर्ति में कृत्रिम कमी पैदा हो जाती है। इस कमी के कारण, सामान्य उपभोक्ता के लिए DRAM की कीमतों में हाल के वर्षों में 100% तक की वृद्धि देखी गई है।
सामान्य उपभोक्ता पर बोझ: अप्रत्यक्ष कीमत का भुगतान
महंगाई रोज के हिसाब से बढ़ रही है। इसका सीधा नुकसान उन सामान्य उपभोक्ताओं को हो रहा है, जिनको AI से कोई सीधा सरोकार नहीं है।
इससे वो सामान्य उपभोक्ता दिक्कत में हैं, जिनको अपने लिए एडिटिंग, डिजाइनिंग, गेमिंग और अन्य डिजिटल जरूरतों के अनुसार कंप्यूटर बनाने हैं या अपग्रेड करने हैं।
एक गेमर या वीडियो एडिटर जिसे उच्च प्रदर्शन वाले GPU और 32GB RAM की आवश्यकता है, उसे अब ये कंपोनेंट्स AI प्रतिस्पर्धा से पहले की तुलना में काफी ऊँची कीमतों पर खरीदने पड़ रहे हैं। वह AI की मुफ्त सेवा का उपयोग करे या न करे, लेकिन उसकी बढ़ी हुई लागत का भुगतान कर रहा है।
बढ़ी हुई कंपोनेंट लागत ने PC निर्माताओं को भी लैपटॉप और डेस्कटॉप की अंतिम बिक्री कीमतों में 15% से 20% तक की वृद्धि करने के लिए मजबूर किया है, जिससे आम आदमी के लिए नया कंप्यूटर खरीदना महंगा हो गया है।
तकनीकी रूप से AI भले ही “फ्री” हो, लेकिन हार्डवेयर बाजार पर इसका भारी बोझ एक कड़वा आर्थिक सत्य है। जब तक सेमीकंडक्टर और मेमोरी कंपनियाँ अपनी उत्पादन क्षमता को AI की असीमित मांग के स्तर तक नहीं बढ़ाती हैं, तब तक डिमांड और सप्लाई का यह गड़बड़ाया हुआ रेशियो बरकरार रहेगा। इसका अर्थ है कि आने वाले कुछ वर्षों तक हार्डवेयर की महंगाई जारी रहने की पूरी संभावना है, और हार्डवेयर उपभोक्ता ही AI क्रांति की अप्रत्यक्ष कीमत चुकाते रहेंगे।












