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‘पशुपालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज’ लांच, विजेता को मिलेगा दस लाख का पुरस्कार, आवेदन करें

  • ‘पशुपालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज’ का उद्देश्य पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के सामने आने वाली छह समस्याओं के समाधान के लिए अभिनव और व्यावसायिक रूप से व्यवहारिक समाधान खोजना है
  • समस्याओं के 6 वर्ग से प्रत्येक में एक विजेता को 10 लाख रुपये और एक उपविजेता को 7 लाख रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा
  • प्रतियोगिता स्टार्टअप इंडिया पोर्टल – www.startupindia.gov.in पर आवेदन के लिए खुली है
नई दिल्ली। पशुपालन और डेयरी विभाग ने स्टार्टअप इंडिया के साथ साझेदारी में, डॉ. वर्गीस कुरियन की जन्म शताब्दी पर गुजरात के आणंद में राष्ट्रीय दुग्ध दिवसकार्यक्रम के दौरान पशुपालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज‘  का दूसरा संस्करण लॉन्च किया।

स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज का पहला संस्करण 12 सितंबर, 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लॉन्च किया था। पशुपालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज 2.0 को केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री, पुरुषोत्तम रूपाला ने पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के सामने आने वाली छह समस्याओं के समाधान के लिए नवीन और  व्यावसायिक रूप से व्यवहारिक हल को तलाशने के लिए लॉन्च किया।
यह कार्यक्रम केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री, श्री पुरुषोत्तम रूपाला, केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी और सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री, डॉ. एल मुरुगन और मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालयान की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित किया गया था।
स्टार्टअप इंडिया पोर्टल-www.startupindia.gov.in पर यह चुनौती सभी स्टार्टअप के लिए निम्नलिखित समस्या कथन के लिए खुली है-
  1. सीमन डोज के भंडारण और आपूर्ति के लिए लागत प्रभावीदीर्घकालिक और उपयोगकर्ता के अनुकूल विकल्प
समस्या के बारे में विस्तार में
  • सीमन उत्पादन केंद्रों से किसान के घर तक, जहां सीमन का उपयोग किसान की गाय/भैंस के गर्भाधान के लिए किया जाता है। सीमन डोज की आपूर्ति के लिए कोल्ड चेन का रखरखाव, भारत में एआई वितरण प्रणाली की रीढ़ है।
  • तरल नाइट्रोजन और तरल नाइट्रोजन कन्टेनर सीमन डोज को रखने और परिवहन के लिए उपयोग किया जाता है। भंडारण और परिवहन के दौरान एलएन2 का नुकसान अधिक होता है, जिससे कोल्ड चेन के रखरखाव की लागत में वृद्धि होती है।
  • एलएन 2 स्टील और ऑक्सीजन उद्योग का उप-उत्पाद है। इसलिए, जहां कहीं भी ये उद्योग उपलब्ध हैं, एलएन 2 की लागत अपेक्षाकृत कम है, लेकिन अन्य भागों में यह अधिक है।
  • गलत तरीके से किए गए एलएन 2 के रखरखाव से स्वास्थ्य को जोखिम हो सकता है।
  • एलएन 2 भंडारण कंटेनर विशाल आकार के और भारी होते हैं, इसलिए इन कंटेनरों की आवाजाही में अत्यधिक श्रमशक्ति की आवश्यकता होती है।
उपाय से उम्मीदें
  • सीमन डोज के भंडारण और परिवहन (क्रायोप्रिजर्वेशन) के कुछ वैकल्पिक लागत प्रभावी, लंबी अवधि और उपयोगकर्ता के अनुकूल साधनों को तलाशा जा सकता है और उन्हें लोकप्रिय बनाया जा सकता है।
  • भंडारण कंटेनर को इस तरह से डिजाइन किया जा सकता है कि यह छोटा और ले जाने में आसान हो।
  1. पशुओं की पहचान (आरएफआईडी) और उनका पता लगाने की लागत प्रभावी तकनीक का विकास
समस्या के बारे में
  • जानवरों की पहचान एक विशिष्ट पहचान संख्या के साथ पॉलीयूरेथिन टैग का उपयोग करके की जाती है। अनुमान है कि 5 से 10 प्रतिशत टैग खो जाते हैं, क्योंकि ये टैग बाहरी तरफ लगाये जाते हैं। पहचान संख्या पढ़ना भी मुश्किल है। इसलिए गाय-भैंस को स्थायी पहचान देना समय की मांग है।
  • वर्तमान में जानवरों के बीच इस्तेमाल हो रही रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) का उपयोग करने वाली तकनीक बहुत महंगी है। इसकी लागत 50 रुपये से 100 रुपये तक है, और रीडर की लागत भी बहुत अधिक है, 15,000 रुपये से 20,000 रुपये तक। आरएफआईडी एक स्थायी पहचान संख्या है क्योंकि इसे त्वचा के नीचे लगाया जाता है और इसे आसानी से हटाया नहीं जा सकता है। चूंकि तकनीक महंगी है, इसका उपयोग भारत में पशुधन पर नहीं किया जाता है।
उपाय से उम्मीदें
उद्यमी फार्म में रखे जाने वाले पशुओं, विशेष रूप से मवेशियों और भैंसों की पहचान के लिए लागत प्रभावी आरएफआईडी पहचान प्रणाली विकसित कर सकता है। रीडर की लागत को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
  1. हीट डिटेक्शन किट का विकास
समस्या के बारे में
  • कृत्रिम तरीके से पशुओं के प्रजनन को सीमित करने में सबसे महत्वपूर्ण कारण गायों या बछिया में मदकाल का गलत अनुमान लगाना है। पारंपरिक रूप से मदकाल का पता देखकर लगाया जाता रहा है। हालाँकि, यह विधि थकाने वाली है और इसमें लगने वाली श्रम लागत ऊंची है। डेयरी गायों में मद से जुड़े संकेतों में, गायों के द्वारा विशेष व्यवहार दिखाना मदकाल का सबसे विश्वसनीय संकेत है।
  • भैंसों में मदकाल के संकेत नहीं होते। इसलिए, यह पता लगाना मुश्किल है कि वे कब मद में हैं, और भैंसों के मामले में बछड़ों के जन्म के बीच लंबा अंतराल होने का यह एक प्रमुख कारण है।
उपाय से उम्मीदें
  • मदकाल का पता लगाने के लिए पश्चिमी देशों की डेयरियों में हीट माउंट डिटेक्टर (एचएमडी) अधिक लोकप्रिय हो गए हैं। शारीरिक गतिविधि का अध्ययन करने के लिए पैडोमीटर/गर्दन पर लगे कॉलर का उपयोग किया गया है और इससे मद का समय निर्धारित किया गया है, लेकिन समस्या वही है, ये तकनीकें महंगी हैं।
  • भैंसों और/या मवेशियों के बीच मद का पता लगाने के लिए उद्यमी लागत प्रभावी तकनीक विकसित कर सकता है।
  1. डेयरी पशुओं के लिए प्रेग्नेन्सी डाइग्नोसिस किट का विकास
समस्या के बारे में
  • एआई कार्यक्रमों में, गर्भावस्था के 70 से 90 दिनों में रेक्टल पेल्पेशन के माध्यम से गर्भावस्था का सफलतापूर्वक पता लगाया जाता है। रेक्टल पैल्पेशन एक पशुचिकित्सक द्वारा, या एक पशुचिकित्सक की उपस्थिति में तकनीशियनों द्वारा किया जाता है।
  • किसानों के लिए प्रारंभिक अवस्था में (गर्भावस्था के लगभग 30 दिनों में) गर्भावस्था का पता लगाना संभव नहीं है।
उपाय से उम्मीदें
  • रक्त प्रोटीन के आधार पर प्रेग्नेन्सी डाइग्नोसिस किट विकसित की जाए।
  • उद्यमी आईडीईएक्सएक्स द्वारा विपणित अलर्टिस रुमिनेंट प्रेग्नेन्सी टेस्ट किट की तर्ज पर प्रेग्नेन्सी टेस्ट किट विकसित कर सकता है और इसके उत्पादन के लिए सुविधा स्थापित कर सकता है। इससे पशुओं के प्रबंधन की लागत में काफी कमी आएगी।
  1. ग्राम संग्रहण केन्द्र से डेयरी संयंत्र तक मौजूद दुग्ध आपूर्ति श्रृखंला में सुधार
समस्या के बारे में
  • ऐसे गांव का पता लगाने और उसकी पहचान करने का कोई तंत्र नहीं है, जहां से संग्रह केंद्र द्वारा दूध एकत्र किया जा रहा है। इसलिए, पूरे देश में सभी गांवों को कूटबद्ध किया जाना है।
  • संग्रह केंद्र से बीएमसी (बल्क मिल्क कूलिंग) केंद्र तक दूध ले जाने के लिये उपयोग होने वाले मार्ग (टैंकर/ट्रक द्वारा) के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। इसलिए, सहकारी और निजी क्षेत्र के डेयरी प्रोसेसर के सभी दूध ले जाने वाले मार्गों को कूटबद्ध किया जाना है।
  • दूध के किस टैंकर या दूध परिवहन करने वाले वाहन ने संग्रह केंद्र से बीएमसी केंद्र तक दूध पहुंचाया , इसकी कोई जानकारी नहीं होती है। इसलिए, सभी दूध टैंकरों/दूध परिवहन वाहनों को कूटबद्ध और जीपीएस-सक्षम होना चाहिए।
  • इसकी कोई जानकारी नहीं होती है कि दूध को किस बीएमसी केंद्र ने ठंडा किया। इसलिए सभी बीएमसी केंद्रों को कूटबद्ध किया जाना है।
  • इस बात की कोई जानकारी नहीं होती है कि डेयरी प्लांट पहुंचने से पहले किस दूध के टैंकर ने उस ठंडे दूध को पहुंचाया।
  • किस डेयरी प्लांट ने उस दूध को प्राप्त किया, इसकी कोई जानकारी नहीं होती है। इसलिए सभी डेयरी संयंत्रों को कूटबद्ध किया  जाना है। इसके अलावा, प्रत्येक डेयरी प्लांट में, सभी मिल्क साइलो, मिल्क पास्चराइज़र, मिल्क पैकिंग मशीन, सभी प्रोसेसिंग बैच / प्रोसेसिंग शिफ्ट आदि को कूटबद्ध किया जाना है। उस संयत्र की सभी डेयरी उत्पाद बनाने की प्रक्रिया लाइनों को कूटबद्ध किया जाना है, यदि कोई हो।
  • उपरोक्त जियो-कोड के आधार पर, एसएपी-आधारित समाधान प्रदाता द्वारा एक व्यापक और विशिष्ट कोड उत्पन्न करने की आवश्यकता होती है, जिसे पाश्चुरीकृत दूध / डेयरी उत्पादों जैसे दही, पनीर आदि के पाउच में अंकित किया जाना है।
उपाय से उम्मीदें
  • संचालन के दौरान नुकसान में कमी
  • दूध को लाने ले जाने में लगने वाला समय घटने से रखरखाव के दौरान नुकसान/कच्चे दूध के खराब होने से नुकसान को कम करना: दूध पाउडर के नुकसान में कमी
  • कच्चे दूध की गुणवत्ता में सुधार और तरल दूध को मूल्य वर्धित उत्पादों में बदलने के अवसर में वृद्धि के कारण बिक्री में वृद्धि, जिससे उच्च रिटर्न और डेयरी निर्यात में वृद्धि
  1. कम लागत वाली कूलिंग और दुग्ध परिरक्षण प्रणाली और डेटा लॉगर का विकास
समस्या के बारे में
  • पहाड़ी क्षेत्रों में दूध को 40 लीटर और 20 लीटर क्षमता के दूध के डिब्बे में सड़क किनारे डीसीएस तक ले जाया जाता है। दूध निकाले जाने के समय से दूध संग्रह केंद्र तक पहुंचने में 2 घंटे तक का समय लग सकता है। इसी तरह, रेगिस्तान, नदी डेल्टा क्षेत्रों में द्वीपों और अन्य दूरदराज के क्षेत्रों में, किसानों को संग्रह केंद्र तक पहुंचने के लिए कोल्ड चेन से जुड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जिससे दूध की गुणवत्ता में गिरावट आती है और आर्थिक नुकसान होता है। एफएसएसएआई के नियमों के अनुसार, जानवरों से दूध प्राप्त करने के बाद उसे साफ करना चाहिये। छोटे आकार के डिब्बे/कंटेनरों (5 लीटर, 10 लीटर, 20 लीटर) में कम लागत वाली दूध परिरक्षण प्रणाली को लेकर इनोवेशन की आवश्यकता है।
  • डेटा लॉगर: प्राथमिक उत्पादन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण मापदंडों की निगरानी के हिस्से के रूप में, कुछ सहकारी समितियों द्वारा सॉफ्टवेयर आधारित स्वचालित आंकड़ा संग्रह प्रणाली शुरू की गयी थी। यह प्राथमिक उत्पादन में पूर्ण जानकारी की क्षमता स्थापित करता है जो एफएसएसएआई के अनुसार अनिवार्य है। यह मूल रूप से बीएमसी (बल्क मिल्क कूलर) की बेहतर निगरानी और दक्षता के लिए ज्यादा रिपोर्टिंग, चोरी में कमी, और छेड़छाड़ पर रोकथाम की सुविधाओं के साथ बीएमसी का एक इंटरनेट-आधारित, वास्तविक-समय आधारित प्रबंधन है। क्लाउड-आधारित प्रणाली बीएमसी के विभिन्न मापदंडों जैसे तापमान, मात्रा, सयंत्र स्थल पर सफाई (सीआईपी) कार्य, दक्षता, खराबी और संभावित दुरुपयोग पर दूर से निगरानी और समय पर निदान में मदद करती है। एसएमएस अलर्ट जैसे सूचना अलर्ट (सारांश अलर्ट, कंप्रेसर चालू/बंद, पहले से तय सक्रिय रखरखाव, पावर स्रोत स्थिति, आदि) और महत्वपूर्ण अलर्ट (अंडर/ओवर कूलिंग, रखरखाव अलर्ट, आदि) विभिन्न हितधारकों को मोबाइल फोन पर प्रदान किए जाएंगे। बीएमसी के संचालन और संबंधित दूध भंडारण डेटा की दैनिक/साप्ताहिक/मासिक रिपोर्ट भी मोबाइल फोन और इंटरनेट पर उपलब्ध होगी। यह प्रणाली क्लस्टर सोसायटियों में सभी किसान-वार खरीद डेटा को सीधे दूध विश्लेषक के साथ-साथ बीएमसी से भी प्राप्त करती है, जिसे सॉफ्टवेयर सिस्टम से जोड़ा जा सकता है।
उपाय से उम्मीदें
  • कम लागत वाली ग्रामीण स्तर की कूलिंग प्रणाली जैसे, छोटी क्षमता के दूध के डिब्बे बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों, एफएसएसएआई नियमों के अनुपालन, किसानों को उच्च आय आदि में मदद करेंगे।
  • दूध के टैंकर, थोक वेंडिंग मशीनों, दूध के डिब्बे में वर्गीकृत लागत पर स्मार्ट डेटा लॉगिंग डिवाइस, उत्पाद की गुणवत्ता और सुधारात्मक कार्यों की अधिक निगरानी में मदद करेगा।
‘पशुपालन स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज 2.0’ के विजेता स्टार्टअप को निम्नलिखित प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे:
  1. नकद पुरस्कार
6 समस्या क्षेत्रों में से प्रत्येक के लिये, एक विजेता को 10 लाख रुपये और एक उपविजेता को 7 लाख रुपये नकद पुरस्कार के रूप में दिए जाएंगे।
  1. इन्क्यूबेशन
12 विजेताओं को इन्क्यूबेशन का मौका मिलेगा। इनक्यूबेटर 3 महीने तक इन स्टार्टअप्स के वर्चुअल इनक्यूबेशन, मेंटर मैचमेकिंग, पीओसी डेवलपमेंट और टेस्टिंग सुविधाओं के लिए लैब सुविधा (केस-टू-केस के आधार पर), बिजनेस और इन्वेस्टर वर्कशॉप आयोजित करने और कार्यक्रम के पूरा होने के बाद नौ महीने तक स्टार्टअप की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार होगा।
  1. वर्चुअल मास्टरक्लास
प्रतियोगिता के लिए आवेदन करने वाले सभी स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को मेंटरशिप प्रदान करने के लिए 6 वर्चुअल मास्टरक्लास (प्रत्येक समस्या के लिये एक) का आयोजन किया जाएगा।
  1. मेंटरशिप
प्रत्येक विजेता को 6 महीने के लिए पशुपालन और डेयरी विभाग से एक अनुभवी परामर्शदाता सौंपा जाएगा।
  1. सबके सामने आने का अवसर
कार्यक्रम के विजेताओं के उत्पादों/समाधानों को अधिकतम दृश्यता सुनिश्चित करने के लिये कृषि भवन में मंत्री कार्यालय और नई दिल्ली में सचिव कार्यालय में प्रदर्शित किया जाएगा।
  1. प्रदर्शन का दिन
समस्या क्षेत्रों में आवेदक पूल से चुने गये शीर्ष 30स्टार्टअप के लिये वर्चुअल प्रदर्शन दिवस का आयोजन किया जाएगा। इन स्टार्टअप्स को निम्नलिखित अवसर प्राप्त होंगे:
  • दर्शकों जिसमें मंत्रालयों, सरकारी विभागों के अधिकारियों, कोऑपेरिटिव, कॉर्पोरेट निकायों, निवेशक आदि शामिल होंगे, के समक्ष उत्पाद को रखने का अवसर
  • प्रतिभागियों को मिले व्यक्तिगत वर्चुअल बूथ पर अपने उत्पाद/सेवाओं के प्रदर्शन का अवसर
  • प्रारंभिक उत्पाद, खरीद के ऑर्डर और वित्त तक पहुंच

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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