eSARAS Plateform: स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण आजीविका का सशक्तिकरण

Rajesh Pandey

eSARAS platform, Rural livelihood:नई दिल्ली, 01 जुलाई 2026ः ई-सरस (eSARAS) प्लेटफॉर्म के माध्यम से, हजारों स्वयं सहायता समूहों को राष्ट्रीय बाजारों, डिजिटल बुनियादी ढांचे और संस्थागत सहायता तक सीधे पहुंच मिल रही है। बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर तथा प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों के साथ एकीकरण के माध्यम से, ई-सरस ग्रामीण हस्तशिल्प को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के तरीके में परिवर्तन ला रहा है।

देशभर के ब्लॉकों और जिलों में इस प्लेटफॉर्म की बढ़ती पहुंच ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने में इसके बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। ई-सरस जैसी पहलें महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा डिजिटल रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

eSARAS platform, Rural livelihood:ई-सरस (सरस आजीविका) ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत विकसित किया गया है। यह डीएवाई-एनआरएलएम का आधिकारिक ऑनलाइन बाजार है, जिसे विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों और उनके महासंघों द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए विकसित किया गया है। यहां उपलब्ध बेहतरीन और चुनिंदा हस्तशिल्प उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों से आते हैं—जैसे मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध चंदेरी साड़ियों के बुनकरों से लेकर राजस्थान के संगमरमर शिल्पकारों तक, तथा जम्मू-कश्मीर की पहाड़ियों में बसे पश्मीना उत्पाद तैयार करने वाले कारीगरों तक।

ई-सरस पर उपलब्ध प्रत्येक उत्पाद अपने साथ एक अनूठी कहानी समेटे हुए है, और आपकी हरेक खरीदारी सीधे उस शिल्पकार से जुड़ने का एक माध्यम है जिसने इसे तैयार किया है।

यह प्लेटफॉर्म निम्नलिखित प्रमुख श्रेणियों में स्थानीय उत्पाद उपलब्ध कराता है—

  • घर एवं गृह-सज्जा
  • महिलाओं के परिधान एवं सहायक सामग्री
  • पुरुषों के परिधान एवं सहायक सामग्री
  • व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद
  • खाद्य उत्पाद
  • बच्चों के खिलौने एवं सहायक सामग्री

eSARAS platform, Rural livelihood: ई-सरस के माध्यम से 8.62 करोड़ से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों के पास एक डिजिटल स्टोरफ्रंट है, जिनमें से 85% सीधे ग्रामीण विकास मंत्रालय के नेटवर्क से जुड़े हैं(फरवरी 2024 तक)। यह प्लेटफॉर्म उन्हें न सिर्फ एक बाज़ार उपलब्ध कराता है, बल्कि विपणन, ब्रांडिंग और परिवहन व आपूर्ति के लिए संस्थागत सहायता भी प्रदान करता है।

डीएवाई-एनआरएलएम देशभर के 7,627 ब्लॉकों तक अपनी पहुंच बना चुका है तथा जमीनी स्तर पर इन उद्यमों को सहायता प्रदान करने के लिए 1.51 करोड़ समुदाय के सदस्यों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है।

पोर्टल से ई-कॉमर्स इकोसिस्टम तक: प्रमुख उपलब्धियां

कुछ वर्ष पूर्व एक साधारण वेब पोर्टल के रूप में शुरू हुई यह पहल आज एक पूर्ण विकसित ई-कॉमर्स इकोसिस्टम का रूप ले चुकी है। अब इसमें मोबाइल ऐप, भौतिक प्रदर्शनी गैलरी, राष्ट्रीय मेले, लॉजिस्टिक्स पूर्ति केंद्र तथा भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्मों के साथ एकीकरण जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

प्लेटफ़ॉर्म का विकासविस्तृत विवरण
ई-सरस पोर्टल का शुभारंभसरस उत्पादों के बेहतर और अधिक प्रभावी विपणन के लिए ई-कॉमर्स पोर्टल https://www.esaras.in/ का शुभारंभ किया गया
ई-सरस मोबाइल ऐप की शुरुआतई-सरस सुविधा केंद्र के साथ ही मोबाइल ऐप की शुरूआत की गई। इसका उपयोग उत्पादों के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और भेजने के लिए किया जाता है।
ओएनडीसीमहिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद 11 से अधिक खरीदार ऐप्स पर उपलब्ध कराए गए हैं। ओएनडीसी प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े 20 करोड़ से अधिक संभावित खरीदारों तक इनकी पहुंच है तथा इस पर 800 से अधिक हस्तशिल्प उत्पाद सूचीबद्ध किए गए हैं।
उमंगई-सरस को उमंग प्लेटफ़ॉर्म पर भी सूचीबद्ध किया गया है। जून 2026 तक उमंग 2,572 सेवाएं प्रदान कर रहा है और इसके माध्यम से 796.69 करोड़ रूपए से अधिक लेन-देन संपन्न हो चुके हैं।
सरस शक्ति संग्रहसंस्थागत और कॉर्पोरेट बाज़ारों के लिए ‘राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026’ में खास तौर पर चुने गए उपहारों के कलेक्शन का शुभारंभ किया गया।
सरस आजीविका प्रदर्शनीनई दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर महिला स्वयं सहायता समूहों के चयनित उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए स्थायी रिटेल गैलरी की स्थापना की गई।

स्रोतः PIB

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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