3 buffaloes die in Doiwala:एक साथ लड़खड़ाते हुए गिरकर मर गईं गुर्जर की तीन भैंसें, कई भैंसें अस्वस्थ, प्रभावित को आर्थिक सहायता की जरूरत

Rajesh Pandey

3 buffaloes die in Doiwala: डोईवाला, 29 जून, 2026ः डोईवाला नगर पालिका के अंतर्गत सत्तीवाला के पास गुर्जर बस्ती में रहने वाले 70 साल के मोहम्मद मियां की भैंसे शनिवार शाम नदी किनारे चरने गई थीं और अचानक लड़ खड़ाकर गिरीं तीन भैंसों की वहीं मौत हो गई, जबकि पांच-छह भैसों की हालत बिगड़ गई। अपनी भैंसों के साथ हुई घटना की जानकारी देते हुए मोहम्मद मियां की आंखें नम हो गईं। कहते हैं, मैं क्यों न रोऊं…, मेरी तो रोजी छिन गई। मेरे पास 16 में से तीन भैंसे मर गईं, इनमें से एक ने कुछ दिन पहले ही दूध देना शुरू किया था, दो भैंसे नौ-नौ माह की गाभन थीं। भैसों की अचानक मृत्यु को लेकर पूरा डेरा और आसपास रहने वाले पशुपालक स्तब्ध है। खुद मोहम्मद मियां और उनका परिवार इस घटना की वजह नहीं समझ पा रहा है। यह घटना पूरी तरह से रहस्यमय बनी है।

3 buffaloes die in Doiwala: मोहम्मद मियां बताते हैं, पता नहीं क्या हुआ। भैंसों ने ऐसा क्या खा लिया, जिस वजह से यह घटना हुई। आज तक उनके जीवन में ऐसी कोई घटना नहीं हुई। हमारे सारे डंगर इसी इलाके में चरते हैं। सुसवा नदी पार करके भी चरने जाते हैं। पशु सुसवा का ही पानी पीते हैं। वो अंदेशा व्यक्त करते हैं कि “भैंसों ने कहीं सुसवा में बहकर आई कोई चीज तो नहीं खा ली। आसपास कोई जहरीली घास तो नहीं खा ली।”

भैंसों के मरने से प्रभावित वन गुर्जर मोहम्मद मियां। फोटो- राजेश पांडेय

वो हमें उस जगह पर ले जाते हैं, जहां भैंसों को दफनाया गया है। पास ही, पानी से भरे तालाब में, उन्होंने अपनी पांच-छह अस्वस्थ भैंसों को छोड़ा हुआ है। बताते हैं, पानी में रहने से भैंसों को ठंडक मिलती है। बाजार से उनका बेटा किसी डॉक्टर से दवा लिखवाकर लाया था, हमने भी अपनी तरफ से देशी इलाज किया है। फिलहाल ये भैंसें पहले से ठीक स्थिति में हैं। अभी तक उनके 11 हजार से ज्यादा खर्च हो गए। अब उनके पास पैसे नहीं बचे। एक गाय लगभग दो लीटर दूध दे रही है, इस दूध को मारी गई भैंस को कटड़े को पिला रहे हैं। हम भूखे रह जाएं, पर अपने पशु को भूखा नहीं रहने देंगे। पशु ही हमारे लिए सबकुछ हैं।

3 buffaloes die in Doiwala: एक सवाल पर, बताते हैं कि भैंस की कीमत 1.40 लाख से लेकर 1.70 लाख रुपये तक होती है। उनके बाड़े से तीन भैंसें कम हो गईं, यह उनके और परिवार के लिए बड़ा दुख है। कहते हैं, सरकार उनके पशु उपलब्ध करा दे या फिर कुछ मुआवजा तो दें, ताकि फिर से आजीविका को आगे बढ़ा सकें। अभी उनके पास छोटे बड़े मिलाकर 16 पशु थे, जिनमें से तीन खत्म हो गए। अब उनके पास गाय के अलावा कोई और पशु दूध नहीं दे रहा।

प्रभावित पशुपालक के साथ प्रगतिशील किसान एवं सिमलास ग्रांट के प्रधान प्रतिनिधि उमेद बोरा।

सिमलास ग्रांट के पूर्व प्रधान एवं वर्तमान में प्रधान प्रतिनिधि उमेद बोरा का कहना है, सत्तीवाला गुर्जर बस्ती के दो बड़े डेरों में लगभग 80 गुर्जर परिवार रहते हैं। यहां छोटे बड़े मिलाकर लगभग एक हजार पशु हैं। ये परिवार पशुपालन पर निर्भर हैं। पशुपालन विभाग या किसी अन्य एजेंसी ने अभी तक इन पशुओं का बीमा नहीं किया। इन भैंसों को बीमा होता तो प्रभावित परिवार को मदद मिल जाती। सरकार को मोहम्मद मियां को आर्थिक मदद देनी चाहिए।

प्रभावित पशुपालक मोहम्मद मियां बताते हैं, करीब दो साल पहले की बात है, उनके डेरे पर सूचना आई थी कि पशुओं का बीमा किया जाएगा। दिन भी तय हो गया था, उस दिन पशुओं के टैग लगाए जाने थे। हमने पशुओं को जंगल भी चरने नहीं भेजा, पर उस दिन कोई नहीं आया।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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