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एम्स ऋषिकेश ने बताया, इस तरह कंट्रोल हो सकता है शुगर

एम्स में मधुमेह रोग पर राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड, कलकत्ता की नर्सेस व डायटीशियन का प्रशिक्षण

ऋषिकेश। न्यूज लाइव

एम्स ऋषिकेश में डायबिटिज एजुकेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम के तीसरे दिन विशेषज्ञों ने प्रतिभागी स्वास्थ्य कर्मियों और नर्सेस को मधुमेह की रोकथाम और नियंत्रित करने संबंधी विस्तृत जानकारियां दीं।

संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह के मार्गदर्शन में डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनल मेडिसिन और कॉलेज ऑफ नर्सिंग के अंतर्गत आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. कल्याणी श्रीधरन ने बच्चों को मधुमेह रोग से संबंधित जानकारियां दीं। उन्होंने बच्चों में होने वाले डायबिटिज टाइप और उसकी उपचार विधियों पर प्रकाश डाला।

डॉ. राजकुमार ने मधुमेह ग्रसित रोगियों में व्यायाम का महत्व और भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि व्यायाम से किस तरह से शुगर को कंट्रोल करने के साथ ही दवा के इस्तेमाल को कम कर सकते हैं।

डा. गौरव चिकारा ने बताया, मधुमेह में ली जाने वाली ओरल टेबलेट को किस तरह से कम और ज्यादा करना चाहिए और किन किन बातों का जरूरी ख्याल रखना चाहिए।

डॉ. ऋषिका ने इंजेक्शन इंसुलिन की जानकारी दी और स्थिति के हिसाब से अलग अलग इंसुलिन इंजेक्शन के बारे में बताया।

नर्सिंग फैकल्टी डॉ. मलार कोडी ने सर्जरी के दौरान मधुमेह से ग्रसित मरीजों के उपचार के विषय में महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराईं।

डॉ. राजाराजेश्वरी ने मधुमेह से ग्रसित मरीज की बीमारी से उसके पारिवारिक, वैवाहिक, सामाजिक व आर्थिक जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से अवगत कराया।

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Rajesh Pandey

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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