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लालढांग क्षेत्र में झूला पुल और बहादरपुर जट में डिग्री कॉलेज की घोषणा

हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लालढांग क्षेत्र में झूला पुल तथा बहादरपुर जट में डिग्री कॉलेज की घोषणा की। उन्होंने कहा कि लालढांग के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा और हरिद्वार जिले में प्रदेश स्तरीय किसान भवन बनाएंगे।

मुख्यमंत्री धामी आजादी का अमृत महोत्सव के तहत उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ग्राम्य विकास विभाग की ओर से शाहपुर शीतलाखेड़ा, हरिद्वार में महिला स्वयं सहायता समूहों की एक दिवसीय कार्यशाला में शामिल हुए।

उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों एवं स्वयं सहायता समूहों की विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया और समूहों के प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान समूहों द्वारा बनाए बहुत सारे उत्पाद बाजारों में बिक नहीं पाए। सरकार स्वरोजगार योजनाएं चला रहे समूहों की सहायता के लिये आगे आई है।

मुख्यमंत्री ने समूहों को दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज की प्रतिपूर्ति के लिए1451 स्वयं सहायता समूहों को रुपये 111.2749 लाख का बजट डिजिटल माध्यम से जारी किया।

कोरोना महामारी से प्रभावित संकुल स्तरीय संगठनों (सीएलएफ) के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए मुख्यमंत्री ने कुल 14 सीएलएफ को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक भी वितरित किए।

मुख्यमंत्री ने कोरोना काल में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वयं सहायता समूहों तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने वाले बैंकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कोरोना महामारी में रोजगार से प्रभावित 3128 समूहों को छह माह तक प्रतिमाह रुपये दो हजार तथा किस्त के हिसाब से तीन माह के लिए रुपये छह हजार की धनराशि के चेक वितरित किए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर घर को नल से जल योजना के तहत वर्ष 2023 तक हर घर को स्वच्छ जल मिलेगा। मुख्यमंत्री ने शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में ग्राम्य विकास मंत्री स्वामी यतीश्वरानन्द भी उपस्थित रहे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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