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उत्तराखंड को हिन्दुस्तान का नंबर वन राज्य बनाना है: धामी

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारे सामने उत्तराखंड को आगे बढ़ाने की चुनौती है। चुनौती हमारे सामने प्रधानमंत्री के विजन 2025 की है। 2025 तक युवा प्रदेश होगा, युवा राज्य होगा, और युवा आकांक्षाएं होंगी। और उन सभी को पूरा करना है हमारा दायित्व है।

हरिभूमि-आईएनएच से साक्षात्कार में उनसे पूछा गया था कि उत्तराखंड में जिस चुनौती के साथ आपको जिम्मेदारी पार्टी ने सौंपी है, क्या महसूस कर पा रहे हैं। इस सवाल पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के अन्य नेताओं का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मेरे जैसे एक आम कार्यकर्ता पर भरोसा जताया और पूरे प्रदेश की सेवा करने का अवसर प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, यहां निश्चित रूप से चुनौती बहुत है। उत्तराखंड को हिन्दुस्तान का नंबर वन राज्य बनाना है। इसके लिए हर संभव प्रयास करना है। यह हमारे सामने चुनौती है और इस चुनौती को मैंने स्वीकार किया है, मैंने सभी का आशीर्वाद लिया है। हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि उत्तराखंड आने वाले दिनों में देश और दुनिया का सबसे अच्छा राज्य बन जाएगा।

साक्षात्कार के दौरान यह सवाल पूछे जाने पर कि, उत्तराखंड को 21 साल हो गए, आखिर चूक कहां रह गई। जब भी चुनाव हो रहा है जनता की नाराजगी तत्कालीन सरकार के मतों पर साफ दिखाई देती है। सरकार रिपीट नहीं होती। जिन आकांक्षाओं के साथ यह राज्य बना, आखिर कहां चूक रहे हैं। आप लोगों को विवश होकर जनता के फैसले को बार-बार बदलना पड़ रहा है। चेहरा बदलना पड़ रहा है।

इस सवाल पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि और आपको बदलाव होते हुए दिखेगा। चार जुलाई 2021 से मुख्यमंत्री के तौर पर काम कर रहा हूं। तब से मैंने कोशिश की है कि हर वक्त और हर पल केवल और केवल उत्तराखंड के विकास के लिए काम करता रहा हूं। जनता की सेवा करता हूं और इसमें हमारे प्रधानमंत्री का अहम योगदान है।

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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