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महंगाई के विरुद्ध सीनियर सिटीजन होने के नाते पदयात्राएं कर रहा हूंः हरीश रावत

देहरादून। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड के मंडी क्षेत्रों में महंगाई के विरुद्ध सांकेतिक पद यात्रा शुरू की हैं। उनका कहना है कि ये पद यात्राएं एक सीनियर सिटीजन के नाते कर रहा हूंँ। इन दिनों रावत कुमाऊं दौरे पर हैं।

सोशल मीडिया के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि ये पदयात्राएं अपने सार्वजनिक कर्तव्य की बाध्यता के तहत कर रहा हूंँ। कांग्रेस निरंतर लड़ रही है, महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का अभियान जारी है, लेकिन इस अभियान में चाहता हूंँ कि मेरे साथ वो सामाजिक ताकतें भी खड़ी हों, बुजुर्गवार खड़े हों जो आज महंगाई से त्रस्त हैं।

रावत ने कहा कि यदि आज आप आवाज नहीं उठाएंगे, यदि आज आप दो कदम मेरे साथ नहीं चलेंगे तो उत्तराखंड के अंदर महंगाई थोपने वाली सरकार के खिलाफ लड़ाई कठिन हो सकती है।

आप सबका आह्वान है, पार्टी से इतर हटकर के आप मेरे साथ महंगाई के विरुद्ध की जा रही पद यात्राओं में, जिसका नाम मैंने भाजपाई ढोल की पोल खोल अभियान रखा है, उसमें जरूर जुड़ें।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई नहरों की मरम्मत नहीं होने से नाराज  हल्द्वानी-गौलापार के ग्रामीणों तथा हल्द्वानी चोरगलिया सड़क पर सरकार के खिलाफ धरना दे रहे लोगों को समर्थन दिया।

एसडीएम से लोगों की समस्याओं के संबंध में बातचीत की एवं उन्हें सुझाव दिए। साथ ही रावत ने कहा कि सिंचाई विभाग आज 3 से 4 बजे तक ग्रामीणों की समस्याओं का निदान नहीं करता है तो चार बजे धरना शुरू कर दूंगा।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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