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मुख्यमंत्री धामी ने की छूट और राहत की घोषणाएं

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा सत्र में उत्तराखंड के निवासियों को छूट और राहत की घोषणाएं की हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा विभाग के अंतर्गत विद्युत बिलों के फिक्स्ड चार्ज को तीन माह के लिए छूट दी जाएगी। इससे लगभग 2,24,604 लोग लाभान्वित होंगे, जिस पर अनुमानित व्यय राशि रुपये 2463.81 लाख होगी। विद्युत बिलों के विलम्ब भुगतान अधिभार पर तीन माह के लिए छूट दी जाएगी। इस पर लगभग 3642 लाख रुपये का व्यय भार आएगा।

परिवहन विभाग के अंतर्गत सेवायान कर में छह माह के लिए छूट दी जाएगी। इसमें लाभार्थियों की अनुमानित संख्या 96380 है, जबकि अनुमानित व्यय भार 7580 लाख रुपये होगा। पंजीकरण प्रमाण पत्र, फिटनेस, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि के नवीनीकरण पर विलंब शुल्क पर छह माह के लिए छूट प्रदान की जाएगी। इस पर अनुमानित व्यय भार 3250 रुपये लाख आएगा।

शहरी विकास विभाग के अंतर्गत पर्यावरण मित्रों को 2000 रुपये की प्रोत्साहन धनराशि पांच माह तक दी जाएगी। इससे लगभग 8300 पर्यावरण मित्र लाभान्वित होंगे। इस पर लगभग 830 लाख रुपये का व्यय भार आएगा।

पीएम स्वनिधि में पंजीकृत सभी लाभार्थियों को 05 माह तक 2-2 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसमें लाभार्थियों की अनुमानित संख्या 25000 है तथा अनुमानित व्यय भार 2500 लाख रुपये होगा।

पेयजल विभाग के अंतर्गत राज्य के समस्त जल / सीवर उपभोक्ताओं के 31 दिसंबर, 2021 तक अवशेष देयों का एकमुश्त भुगतान करने की दशा में विलम्ब शुल्क की राशि शत प्रतिशत माफ की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में आशा कार्यकर्ताओं ने बहुत महत्वपूर्ण योगदान किया है। कोविड की विषम परिस्थितियों में उन्होंने जिस प्रकार से काम किया है, वह प्रशंसनीय है। आशा कार्यकर्ताओं को पांच माह तक 2-2 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। साथ ही एक-एक टेबलेट भी दिया जाएगा।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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