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सचिवालय में पहली बैठक में मुख्य सचिव ने गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा की समीक्षा की

गर्भावस्था या प्रसव के दौरान मृत्यु के ऑडिट की व्यवस्था का सख्ती से पालन के निर्देश दिए

देहरादून। नवनियुक्त मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सचिवालय में अपनी पहली बैठक में राज्य में गर्भवती महिलाओं की चुनौतियों एवं समस्याओं की समीक्षा की। उन्होंने राज्य में गर्भवती महिलाओं की कठिनाइयों को शीर्ष प्राथमिकता पर लिया।
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को उनके जनपदों में गर्भावस्था या प्रसव के दौरान होने वाली मृत्यु के ऑडिट या मेटरनल डेथ ऑडिट व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने जनपदों में विशेष रूप से दुर्गम एवं दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में सभी गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच (एंटी नेटल चेकअप ) को अनिवार्यतः सुनिश्चित करवाने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने अत्यंत जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चिन्हित करके उनके स्वास्थ्य का नियमित फॉलोअप करने की कार्ययोजना पर पूरी गंभीरता से कार्य करने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिए।
उन्होंने गर्भवती महिलाओं को सरकारी योजनाओं के तहत दिए जाने वाले आहार की रेंडम सैंपलिंग करके इसको क्रॉस चेक करवाकर पौष्टिकता की नियमित जांच के भी निर्देश दिए हैं। गर्भवती महिलाओं के भोजन में स्थानीय अनाजों को प्रोत्साहित करने की हिदायत दी है।
बैठक में सचिव डॉ. आर राजेश कुमार, एचसी सेमवाल, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जनपदों के जिलाधिकारी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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