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एम्स से जल्द ही मिलने वाली यह खास सुविधा

एम्स कार्यकारी निदेशक ने बताया, एम्स में स्वास्थ्य जांच के लिए जल्द लगेगी हेल्थ एटीएम

ऋषिकेश। एम्स, ऋषिकेश के सोशल आउटरीच सेल ने स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार के आयुष्मान भवः सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत कम्युनिटी आउटरीच सेंटर चंद्रेश्वर नगर ऋषिकेश में विभिन्न स्वास्थ्य एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों का शुभारंभ एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह ने किया।

कार्यकारी निदेशक प्रो.मीनू सिंह ने बताया, आयुष्मान भवः सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम का उद्देश्य कम्युनिटी को एनसीडी (गैर संचारी रोगों) के लिए स्वास्थ्य एवं जागरूकता सेवा दिलाना है। साथ ही, उन लोगों तक पहुंचना है जो सरकार की स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते हैं।

उन्होंने बताया, एम्स के कम्युनिटी आउटरीच सेंटर को जल्द ही टेलीमेडिसिन सेवा से जोड़ा जाएगा, जिससे मरीजों को एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों से स्वास्थ्य परामर्श व प्रभावी उपचार उपलब्ध हो सके।

आयुष्मान भवः सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत आउटरीच सेंटर में लगे स्वास्थ्य शिविर में 100 से अधिक मरीजों की गैर संचारी रोगों के लिए स्क्रीनिंग की गई, साथ ही उनका सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार किया गया। उन्हें निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।

नर्सिंग ऑफिसर्स ने नुक्कड़ सभा के माध्यम से लोगों को डेंगी के सेवन प्लस वन कार्यक्रम, निशुल्क चिकित्सा के लिए आयुष्मान कार्ड योजना से जुड़ने आदि की जानकारियां दी गईं।

कार्यक्रम के दौरान, आयुष्मान भारत योजना से वंचित 100 से अधिक लोगों को आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी गई।

नोडल अधिकारी, सोशल आउटरीच सेल डॉ. संतोष कुमार ने बताया, इस केंद्र के माध्यम से प्राथमिक स्तर पर मरीजों की बीमारी को आगे बढ़ने से रोकने के लिए संक्रामक और गैर संचारी रोगों के प्रति जागरूकता की मुहिम चलाई जाएगी। इसी उद्देश्य से इस क्षेत्र में कम्युनिटी आउटरीच सेंटर की स्थापना की गई है।

उन्होंने बताया,  क्षेत्र में इस सेंटर के संचालन के लिए मां कात्यायनी माता मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक गुरविंदर सलूजा की ओर से एम्स ऋषिकेश के आउटरीच सेल को यह स्थान उपलब्ध कराया गया है।

उन्होंने बताया, आयुष्मान भवः सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत आउटरीच सेंटर में आम जनता के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 70 से अधिक मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण, उपचार किया गया और उन्हें निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। नर्सिंग ऑफिसर्स ने नुक्कड़ सभा के माध्यम से जनसामान्य को जागरूक किया गया।

इस दौरान उन्हें डेंगी के सेवन प्लस वन कार्यक्रम, निशुल्क चिकित्सा के लिए आयुष्मान कार्ड योजना से जुड़ने आदि संबंधी जानकारियां दी गईं। इस अवसर पर पखवाड़े के अंतर्गत संस्थान के यूरोलॉजी विभाग के डॉ. हर्षित ने अंगदान के बारे में लोगों को जागरुक किया और शपथ भी दिलाई।

डॉ. संतोष ने बताया, आयुष्मान वार्ड/ ग्राम के अंतर्गत जल्द ही राज्य स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ मिलकर किसी भी वार्ड / ग्राम में एनसीडी के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी और शत प्रतिशत स्क्रीनिंग के बाद उसे आयुष्मान वार्ड /ग्राम घोषित किया जाएगा।

सेंटर की चिकित्साधिकारी डॉ. सिद्धि कोठियाल ने बताया कि डेंगी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए चंद्रेश्वरनगर, ऋषिकेश क्षेत्र में डेंगू सेवन प्लस वन कार्यक्रम के तहत लोगों को घर- घर जाकर इसकी जानकारी दी गई। साथ ही, कुछ स्थानों पर मिला डेंगी मच्छर के लार्वा को नष्ट कर दिया गया।

कार्यक्रम में एम्स की डीएमएस डॉ. पूजा भदौरिया, चीफ नर्सिंग ऑफिसर रीटा शर्मा, डीएनएस वंदना, नर्सिंग ऑफिसर्स, एएनएम,आशा कार्यकर्ता, लैब टेक्नीशियन, वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन के पदाधिकारियों के साथ ही, एम्स सोशल आउटरीच सेल के प्रतिनिधि संदीप सिंह, हिमांशु गवाड़ी, त्रिलोक सिंह, स्वाति आदि मौजूद थे।

Rajesh Pandey

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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