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विधानसभा चुनाव की वोटर लिस्ट से जुड़ी खास जानकारियां

देहरादून। उत्तराखंड में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में 15 जनवरी 2021 से 12 अक्टूबर 2021 के बीच 30 हजार 808 मतदाता बढ़े हैं। प्रति हजार पुरुष मतदाताओं के सापेक्ष महिला लिंगानुपात में भी वृद्धि हुई है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी सौजन्या ने मीडिया सेंटर, सचिवालय में पत्रकारों से वार्ता में बताया कि एक जनवरी 2022 की अर्हता तिथि के आधार पर प्रकाशित एकीकृत निर्वाचक नामावली पर एक नवम्बर 2021 से 30 नवम्बर 2021 तक दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकती हैं।

उन्होंने बताया कि 30 नवम्बर तक प्रस्तुत दावों और आपत्तियों का निस्तारण 20 दिसंबर 2021 तक किया जाएगा। इसके बाद निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन पांच जनवरी 2022 को किया जाएगा।

बीएलओ ने एक सितम्बर 2021 से 15 सितम्बर 2021 तक घर-घर जांच और सत्यापन का कार्य किया। घर-घर जांच और सत्यापन के दौरान डीएससी, एकाधिक प्रविष्टियों और लॉजिकल एरर आदि को हटाने के लिए नियमानुसार कार्यवाही की गई।

उन्होंने बताया कि इस बात पर भी ध्यान दिया गया है कि किसी भी मतदाता को अपने आवास से मतदेय स्थल तक पहुंचने के लिए दो किमी से अधिक पैदल दूरी तय न करनी पड़े। वहीं 1200 से अधिक मतदाता वाले मतदेय स्थलों को विभाजित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

मतदेय स्थलों के संशोधन, परिवर्तन एवं परिवर्धन प्रस्तावों पर आयोग से 05 अक्टूबर 2021 को अनुमोदन प्राप्त हुआ और तदनुसार समस्त जिला निर्वाचन अधिकारियों ने इसका नियमानुसार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम  1951 की धारा 25 के अंतर्गत अंतिम प्रकाशन किया।

अंतिम रूप से प्रकाशित मतदेय स्थलों की सूची मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों को उपलब्ध कराने के साथ-साथ सर्व साधारण की जानकारी के लिए कार्यालय, मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट  http://ceo.uk.gov.in पर भी उपलब्ध है।

इस वोटर लिस्ट के प्रकाशन से पहले मतदेय स्थलों की कुल संख्या 11024 थी, जो कि अंतिम रूप से एकीकरण के बाद 11647 हो गई है।

प्रत्येक मतदेय स्थल पर भारत निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देशों के अनुसार रैम्प, पेयजल, पर्याप्त फर्नीचर, विद्युत, हेल्प डेस्क, उचित संकेतांक, महिला व पुरुष के लिए अलग-अलग शौचालय, शेड जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।

अभी भी जुड़वा सकते हैं अपना नाम

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि भारत के ऐसे नागरिक, जो एक जनवरी 2022 को 18 वर्ष या इससे अधिक की आयु पूर्ण कर रहे हैं, विधानसभा निर्वाचक नामावली में नाम सम्मिलित कराने के लिए प्रारूप-6 पर अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

वर्तमान आलेख्य निर्वाचक नामावली में जिन निर्वाचकों के नाम, अन्य विभिन्न विवरण या फोटोग्राफ आदि त्रुटिपूर्ण अथवा अशुद्ध हैं, उसे सही कराने के लिए प्रारूप-8 पर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी का नाम त्रुटिवश विलोपित हो गया है तो भी नाम सम्मिलित कराने के लिए फार्म-6 भर सकते हैं।

30808 मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि हुई

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि एक जनवरी 2021 की अर्हता तिथि पर 15 जनवरी 2021 को उत्तराखंड में 78 लाख 15 हजार 192 मतदाता थे। 01 जनवरी 2022 की अर्हता तिथि पर दिनांक 01 नवम्बर 2021 के आलेख्य में कुल मतदाताओं की संख्या 78 लाख 46 हजार हो गई है। इस प्रकार दिनांक 15 जनवरी 2021 से 12 अक्टूबर 2021 के मध्य उत्तराखंड राज्य में 30 हजार 808 मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि हुई है। प्रति हजार पुरुषों के सापेक्ष महिला लिंगानुपात में भी वृद्धि हुई है।

पुनरीक्षण कार्य के लिए मण्डलायुक्त निर्वाचक नामावली के प्रेक्षक

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि पुनर्रीक्षण कार्य के सुव्यवस्थित संचालन और संपादन के लिए आयोग ने दोनों मंडलों के मंडलायुक्तों को निर्वाचक नामावली के प्रेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है, जो कम से कम तीन बार अपने मंडल के सभी जनपदों का भ्रमण कर पुनर्रीक्षण कार्य की समीक्षा एवं अनुश्रवण कर आयोग को समय-समय पर अपनी रिपोर्ट भेजेंगे।

80 वर्ष से अधिक आयु के मतदाता को पोस्टल बैलट से मतदान की सुविधा

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों, निर्वाचक नामावली में फ्लैग्ड किए गए दिव्यांगजनों के पोस्टल बैलट के माध्यम से मतदान की सुविधा प्रदान की जाएगी। उत्तराखंड राज्य में आलेख्य निर्वाचक नामावली के अनुसार 80 वर्ष से अधिक आयु के निर्वाचकों की संख्या 1,65,113 हैं,  जबकि दिव्यांग निर्वाचकों की संख्या 53,900 है।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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