- उपराष्ट्रपति ने एम्स के विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा सभी तक पहुंचनी चाहिए
- उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश में टेलीमेडिसिन और नवाचार की प्रशंसा की
- उपराष्ट्रपति ने भारत की समान कोविड प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला और वैक्सीन मैत्री पहल की सराहना की
- उपराष्ट्रपति ने अवसंरचना और सेवाओं को मजबूत करने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की प्रशंसा की
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि दीक्षांत समारोह न केवल वर्षों के अनुशासित प्रयास और त्याग की परिणति है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से समर्पण और उद्देश्य की भावना के साथ अपने पेशेवर कर्तव्यों को निभाने का आग्रह किया।
AIIMS Rishikesh Convocation 2026: कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने लचीलापन, नवाचार और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारत के व्यापक टीकाकरण अभियान पर कहा कि 140 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीके लगाए गए, जिससे स्वास्थ्य सेवा तक समान पहुंच सुनिश्चित हुई। भारतीय वैज्ञानिकों ने लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए टीके विकसित किए हैं।
AIIMS Rishikesh Convocation 2026: उपराष्ट्रपति ने भारत की वैक्सीन मैत्री पहल के माध्यम से वैश्विक जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया, जिसके अंतर्गत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि यह पहल “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को दर्शाती है और एक दयालु और जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है। स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना के विस्तार पर सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि पिछले एक दशक में देश भर में, विशेष रूप से वंचित क्षेत्रों में, नए एम्स संस्थानों की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि सुशासन लोगों की जरूरतों को समझने और उनकी सेवा करने में निहित है।
एम्स ऋषिकेश की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान नैदानिक देखभाल, शैक्षणिक क्षमता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता को मिलाकर उत्कृष्टता का एक आदर्श प्रस्तुत करता है। उन्होंने विशेष रूप से इसकी टेलीमेडिसिन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा को अस्पताल परिसरों से आगे बढ़कर दूरस्थ और वंचित आबादी तक पहुंचना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने हेलीकॉप्टर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और चार धाम यात्रा के दौरान तथा दूरस्थ क्षेत्रों में दवा वितरण के लिए ड्रोन के उपयोग जैसी अभिनव स्वास्थ्य सेवाओं की भी प्रशंसा की और इन्हें स्वास्थ्य सेवा वितरण में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का प्रभावी समाधान बताया।
उपराष्ट्रपति ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सहित क्षेत्र में अवसंरचना के तीव्र विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने समावेशी विकास को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा एक जनहित का विषय है और चिकित्सा पेशेवरों की राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने उनसे निवारक देखभाल, ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से योगदान देने और सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और सेवा के मूल्यों से प्रेरित रहने का आग्रह किया। –PIB
इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने कहा, रोगी का विश्वास बनाए रखना प्रत्येक चिकित्सक का कर्तव्य है। दीक्षांत समारोह चिकित्सा स्नातकों के लिए नई दिशा, दायित्वबोध व नए उद्देश्यों की शुरुआत है। ऋषिकेश एम्स मरीजों को उच्चस्तरीय गुणवत्ता के साथ चिकित्सा सेवा दे रहा है। उन्होंने एम्स को राज्य में चिकित्सा क्षेत्र खासकर आपात मरीजों के लिए जीवनदान देने वाला संस्थान बताया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिकित्सकीय पेशे को मानवता की सेवा बताते हुए कहा, चिकित्सक अपने ज्ञान व कौशल से आम जन को स्वास्थ्य की संजीवनी प्रदान करते हैं। उन्होंने नये चिकित्सकों से जीवन में जब कभी समय मिले तो सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों की चिकित्सा सेवा के लिए आने का आह्वान किया। उन्होंने आपात स्थितियों में एम्स की हेली एंबुलेंस सेवा, ड्रोन सेवा को राज्य के जनस्वास्थ्य के लिए बेहतर प्रयास बताया है। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, एम्स ऋषिकेश के अध्यक्ष प्रोफेसर राज बहादुर, प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह व डीन एकेडमिक प्रोफेसर डॉ. सौरभ वार्ष्णेय, संकाय सदस्यों, छात्रों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।



