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अच्छी खबरः दुबई में खाए जाएंगे उत्तराखंड के फल-सब्जियां

नई दिल्ली। हरिद्वार के किसानों के खेतों में उत्पादित करी पत्ता, भिंडी, नाशपाती और करेला सहित सब्जियों की पहली खेप आज संयुक्त अरब अमीरात के दुबई को निर्यात की गई। सब्जियों का निर्यात उत्तराखंड में उगाए गए बाजरा की एक खेप के मई, 2021 में डेनमार्क को निर्यात करने के बाद हुआ है।

उत्तराखंड से कृषि उत्पादों के निर्यात को यह बड़ा प्रोत्‍साहन है। उत्तराखंड कृषि उत्पाद विपणन बोर्ड (यूकेएपीएमबी) तथा निर्यातक जस्ट ऑर्गेनिक के सहयोग से एपीडा ने निर्यात के लिए उत्तराखंड के किसानों से रागी और झिंगोरा लेकर प्रसंस्‍कृत किया, जो यूरोपीय संघ के जैविक प्रमाणन मानकों को पूरा करता है।

वर्ष 2019-20 में 10114 करोड़ रुपये के समान निर्यात की तुलना में 2020-21 में भारत ने 11019 करोड़ रुपये के फलों एवं सब्जियों का निर्यात किया, जो 9 प्रतिशत की वृद्धि को प्रदर्शित करता है।

एपीडा खाद्य उत्पादों के निर्यात के लिए बाजार संवर्धन गतिविधियां, सूचित निर्णय लेने के लिए मार्केट इंटेलीजेंस, अंतर्राष्ट्रीय अनुभव, कौशल विकास, क्षमता निर्माण और उच्च गुणवत्ता वाली पैकेजिंग का कार्य करता है।

उत्तराखंड सरकार जैविक खेती में सहायता करती रही है। यूकेएपीएमबी जैविक प्रमाणन के लिए किसानों की सहायता करता रहा है। ये किसान मुख्य रूप से रागी, झिंगोरा, चौलाई आदि जैसे मोटे अनाजों का उत्पादन करते हैं।

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) उत्तराखंड को भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात मानचित्र पर लाने के लिए प्रचार संबंधी गतिविधियाँ करता रहा है।

एपीडा उत्तराखंड में एक पैक हाउस स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना बना रहा है, जो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ताजे फल और सब्जियों के निर्यात के लिए अनिवार्य आवश्यकता या बुनियादी ढांचे की जरूरत को पूरा करेगा।

एपीडा कृषि उपज की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करनेके जरिये खरीददारों को किसानों से जोड़कर क्षमता निर्माण, गुणवत्ता उन्नयन और बुनियादी ढांचे के विकास, दोनों प्रकार से उत्तराखंड क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेगा।- पीआईबी

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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