पक्षियों की कहानीः मूर्खों को सलाह न दें तो बेहतर

Rajesh Pandey
Short stories

एक जंगल में आम के पेड़ पर कई पक्षी रहते थे। सभी पक्षी अपने छोटे छोटे घोंसलों में खुश थे। बरसात के मौसम की शुरुआत से पहले, जंगल के सभी जानवरों ने अपने घरों की मरम्मत कर ली। पक्षियों ने भी अपने घोंसलो को और अधिक सुरक्षित बना दिया। कई पक्षियों ने टहनियों और पत्तियों से घोंसले मजबूत किए। पक्षियों ने अपने बच्चों के लिए भोजन भी स्टोर कर लिया।

अब जब बरसात शुरू होने को थी, पक्षियों को किसी प्रकार की चिंता नहीं थी। उनके पास अपने बच्चों के लिए पर्याप्त भोजन था। बारिश शुरू हो गई। सभी पक्षी अपने वाटरप्रूफ घोंसलों में पर्याप्त भोजन के साथ सुरक्षित थे। बारिश लगातार कई दिन तक जारी रही। एक दिन,बारिश में बुरी तरह भीगा एक बंदर जंगल में पहुंच गया। वह एक शाखा पर बैठकर कांप रहा था। बंदर ने खुद को पानी से बचाने की पूरी कोशिश की। उसने अपने को पत्तियों से ढंकना चाहा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वह स्वयं से कह रहा था कि बहुत ठंड है। यह बारिश तो मुझे मार देगी।

पक्षी यह सब देख रहे थे। उनसे बंदर का कष्ट देखा नहीं गया, लेकिन वो उसके लिए कुछ नहीं पा रहे थे। उन्होंने बंदर से कहा, भाई हमारे छोटे घोंसले आपकी मदद करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। एक पक्षी ने कहा, आपको भी बरसात से पहले अपने रहने के लिए पक्के इंतजाम करना चाहिए था। यदि आपके पास सुरक्षित घर होता तो आपके यह परेशानी नहीं झेलनी पड़ती।

पक्षियों की सलाह पर बंदर को गुस्सा आ गया। उसने कहा, अपनी बकवास बंद रखो। गुस्साए बंदर ने पक्षियों के घोंसलों पर हमला कर दिया। उसने कुछ घोंसले तोड़ दिए। पक्षियों के बच्चे असहाय होकर जमीन पर पड़े थे। इस पर असहाय पक्षियों ने सोचा- “मूर्ख कभी भी अच्छी सलाह नहीं मानते हैं। उन्हें सलाह देना बेहतर नहीं है। “

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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