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NEWSLIVE24x7 > Blog > Inspirational story > पहल करके तो देखिये…
Inspirational story

पहल करके तो देखिये…

Rajesh Pandey
Last updated: October 22, 2017 8:13 pm
Rajesh Pandey
9 years ago
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एक वृद्ध महिला की कहानी अक्सर सुनने को मिलती है, जो एक तालाब के किनारे बैठकर छोटे-छोटे कछुओं की पीठ (कवच) को साफ करती है। वह यह भी जानती है कि उनका यह प्रयास दुनिया के सभी कछुओं को सुकून और राहत नहीं दे सकता। वह फिर भी नियमित रूप से तालाब पर जाकर कछुओं की पीठ पर जमा गाद और मैल को साफ करती हैं। मेरे अनुसार यही तो पहल है, जो किसी बड़े बदलाव का इंतजार नहीं करती है और न ही वह कुछ लोगों या पूरी भीड़ को अपने साथ इस मुहिम से जोड़ने में विश्वास करती है। पहल होनी चाहिए, चाहे वह एक व्यक्ति से ही क्यों न हो। सच मानियेगा, अगर इस पहल में जरा सी भी ताकत होगी तो एक से दो, दो से तीन और तीन से चार, फिर लंबी कतार इस मुहिम में शामिल होने के लिए तैयार रहेगी।

समुद्र पर श्रीराम सेतु निर्माण में एक गिलहरी के प्रयास की कहानी भी सभी ने सुनी होगी। यह गिलहरी भी सेतु निर्माण में सहयोग कर रही थी। वह छोटे-छोटे कंकड़ों को समुद्र में डाल रही थी, ताकि सेतु का निर्माण तेजी से हो सके। वह चाहती थी कि सेतु निर्माण जल्द से जल्द हो जाए और फिर श्री राम की सेना रावण की लंका पर आक्रमण कर दे। भगवान राम ने उसके इस प्रयास को देखा तो उनको काफी हर्ष हुआ। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने स्नेह से गिलहरी की पीठ को सहलाया। कहा जाता है कि श्री राम की अंगुलियों के निशान आज भी गिलहरी की पीठ पर काली रेखाओं के रूप में देखे जा सकते हैं। ये सकारात्मक दृष्टिकोण से की गई छोटी से कोशिश का प्रतीक हैं।

वृद्ध महिला वाली कहानी को आगे बढ़ाते हैं। जब वृद्ध महिला से पूछा गया कि तालाब के इन कुछ कछुओं की सफाई करने से क्या फायदा। ये तो फिर मैले हो जाएंगे और फिर अपनी पीठ पर बने कवच को भारी कर लेंगे। महिला का जवाब था कि यह बात सही है कि कुछ दिन बाद फिर इनको सफाई की जरूरत होगी, लेकिन यह सोचकर ही हम प्रयास करना बंद नहीं कर सकते। अगर मेरे इस कार्य से कुछ कछुओं को कुछ दिन के लिए ही सही, राहत मिलती है और उनकी पीठ पर लगा भार कुछ कम होता है तो इसमें नुकसान कहां है।

मुझे इनको कुछ दिन के लिए राहत देने में जिस आनंद की अनुभूति होती है, वह शायद कोई और बड़ा काम करने से नहीं हो सकती। मैं यह भी जानती हूं कि दुनिया में बहुत सारे कछुए हैं, जो अपनी पीठ पर काई और मैला लेकर जिंदगी काट रहे हैं। इन कुछ कछुओं की पीठ साफ करने से कछुओं का उद्धार होने से रहा, लेकिन पहल तो कही से होनी चाहिए थी।

मैं यह पहल कर रही हूं। हो सकता है कि आने वाले समय में कोई इससे प्रेरणा लेकर किसी और तालाब के कछुओं को राहत देने में जुट जाए। उसके बाद कोई और, फिर कोई और… यह सिलसिला पूरी दुनिया में चल जाएगा, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। पहल तो कहीं से होनी थी, हो सकता है, यहीं से हो गई।

पूरी कहानी में कहने का मतलब है कि अगर नजरिया सकारात्मक है, तो पहल होनी ही चाहिए। भले ही एक व्यक्ति से हो या फिर पूरी टीम के साथ। सार्थक पहल ही व्यक्ति को सफलता की राह दिखाती है। यह मत सोचिए कि किसी एक व्यक्ति की छोटी सी पहल से बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। कोई भी शुरुआत केवल एक आइडिया या विचार से होती है। शुरुआत किसी एक बिंदु से होती है और उसका दायरा असीमित।

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TAGGED:#Anoldlady #turtlsstory #Innovation #inspirationalstoryinhindi #Shriram #Ramsetu
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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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