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Uttarakhand: स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स के लिए 16 फरवरी को पहले चरण के इंटरव्यू

उत्तराखंड में स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की कमी को दूर करने के लिए मास्टर प्लान

देहरादून। उत्तराखंड में स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स (Specialist Doctors in Uttarakhand) की कमी को दूर करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस प्लान के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की दिक्कतें दूर होंगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (National Health Mission) स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स के चयन के लिए 16 फरवरी को पहले चरण के इंटरव्यू लेगा।

राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टर्स को अब राज्य सरकार की तरफ से वो तमाम सुविधाएं मिल सकेंगी, जो उन्हें निजी क्षेत्र में मिलती है। स्वास्थ्य विभाग के विज्ञप्ति में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार के हवाले से बताया गया है,पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की जा रही है। कई जगहों से हमें यह जानकारी मिली कि विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब राज्य सरकार विशेषज्ञों को तैनात करने की दिशा में काम कर रही है।

स्वास्थ्य सचिव के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग के पास ना तो दवाइयों की कमी है, ना सुविधाओं की कमी है और न ही अस्पतालों में मशीनों की कमी है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से कई बार समस्या होती है। इसे अब दुरुस्त कर लिया जाएगा।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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