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Reading: कोविड की जांचः नमक के पानी से गरारे से, तीन घंटे में रिपोर्ट
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NEWSLIVE24x7 > Blog > Analysis > कोविड की जांचः नमक के पानी से गरारे से, तीन घंटे में रिपोर्ट
AnalysisFeaturedhealthReportstudy

कोविड की जांचः नमक के पानी से गरारे से, तीन घंटे में रिपोर्ट

Rajesh Pandey
Last updated: May 29, 2021 1:23 pm
Rajesh Pandey
5 years ago
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Photo: PIB
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वैश्विक महामारी कोविड-19 का प्रकोप शुरू होने के बाद से ही भारत में जांच के बुनियादी ढांचे और क्षमता को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के तहत नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) ने इस कड़ी में एक और कीर्तिमान बनाया है, जिसके तहत कोविड​​​​-19 के नमूनों के परीक्षण के लिए ‘नमक के पानी से गरारे से आरटी-पीसीआर विधि (Saline Gargle RT-PCR Testing) ढूंढ ली गई हैI
नमक के पानी से गरारे की इस विधि से कई लाभ एक साथ मिलते हैंI यह विधि सरल, तेज, लागत प्रभावी, रोगी के अनुकूल और आरामदायक है और इससे परिणाम भी जल्दी मिलते हैंI
न्यूनतम बुनियादी ढांचा आवश्यकताएं देखते हुए यह विधि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) से बातचीत में राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसन्धान संस्थान (एनईईआरआई) में पर्यावरण विषाणु विज्ञान प्रकोष्ठ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कृष्णा खैरनार ने कहा कि  “स्वैब संग्रह विधि के लिए समय की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, इस तकनीक में सम्भावित संक्रमितों को जांच के दौरान कुछ असुविधा का सामना भी करना पड़ सकता है, जिससे वे कभी-कभी असहज भी हो सकते।
साथ ही, इस प्रकार से एकत्र किए गए नमूनों को एकत्रीकरण केंद्र और जांच केंद्र तक ले जाने में भी कुछ समय लगता है। वहीं दूसरी ओर, नमक के पानी से गरारे (सेलाइन गार्गल) की आरटी-पीसीआर विधि तत्काल, आरामदायक और रोगी के अनुकूल है। नमूना तुरंत ले लिया जाता है और तीन घंटे में ही परिणाम मिल  जाएगा।”
Description: https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/27NGE.png
रोगी स्वयं ही ले सकता है अपना सेंपल
डॉ. खैरनार के अनुसार यह विधि इतनी सरल है कि रोगी स्वयं नमूना एकत्र कर सकता है। उन्होंने कहा कि, “नाक से और मुंह से  नासोफेरींजल और ऑरोफरीन्जियल स्वैब एकत्र करने जैसी संग्रह विधियों के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है और इनमें समय भी लगता है।
इसके विपरीत, नमक के पानी से गरारे (सेलाइन गार्गल) की आरटी-पीसीआर विधि में नमक के पानी (सेलाइन वाटर) से भरी एक साधारण संग्रह ट्यूब का उपयोग किया जाता है। रोगी इस घोल से गरारे करता है और उसे ट्यूब के अंदर डाल देता है।

#United2fightCorona@CSIR_NEERI has developed 'Saline Gargle #RTPCR Method' for testing #COVID19 samples; you can get the result within 3 hours

Watch Dr. Krishna Khairnar, Senior Scientist, Environmental Virology Cell, NEERI explaining how to use👇@IndiaDST@CSIR_IND pic.twitter.com/mxpYTlt7lC

— PIB in Maharashtra 🇮🇳 (@PIBMumbai) May 28, 2021

Contents
वैश्विक महामारी कोविड-19 का प्रकोप शुरू होने के बाद से ही भारत में जांच के बुनियादी ढांचे और क्षमता को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के तहत नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) ने इस कड़ी में एक और कीर्तिमान बनाया है, जिसके तहत कोविड​​​​-19 के नमूनों के परीक्षण के लिए ‘नमक के पानी से गरारे से आरटी-पीसीआर विधि (Saline Gargle RT-PCR Testing) ढूंढ ली गई हैIनमक के पानी से गरारे की इस विधि से कई लाभ एक साथ मिलते हैंI यह विधि सरल, तेज, लागत प्रभावी, रोगी के अनुकूल और आरामदायक है और इससे परिणाम भी जल्दी मिलते हैंIन्यूनतम बुनियादी ढांचा आवश्यकताएं देखते हुए यह विधि ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। पत्र सूचना कार्यालय (PIB) से बातचीत में राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसन्धान संस्थान (एनईईआरआई) में पर्यावरण विषाणु विज्ञान प्रकोष्ठ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कृष्णा खैरनार ने कहा कि  “स्वैब संग्रह विधि के लिए समय की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, इस तकनीक में सम्भावित संक्रमितों को जांच के दौरान कुछ असुविधा का सामना भी करना पड़ सकता है, जिससे वे कभी-कभी असहज भी हो सकते।साथ ही, इस प्रकार से एकत्र किए गए नमूनों को एकत्रीकरण केंद्र और जांच केंद्र तक ले जाने में भी कुछ समय लगता है। वहीं दूसरी ओर, नमक के पानी से गरारे (सेलाइन गार्गल) की आरटी-पीसीआर विधि तत्काल, आरामदायक और रोगी के अनुकूल है। नमूना तुरंत ले लिया जाता है और तीन घंटे में ही परिणाम मिल  जाएगा।”रोगी स्वयं ही ले सकता है अपना सेंपलडॉ. खैरनार के अनुसार यह विधि इतनी सरल है कि रोगी स्वयं नमूना एकत्र कर सकता है। उन्होंने कहा कि, “नाक से और मुंह से  नासोफेरींजल और ऑरोफरीन्जियल स्वैब एकत्र करने जैसी संग्रह विधियों के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है और इनमें समय भी लगता है।इसके विपरीत, नमक के पानी से गरारे (सेलाइन गार्गल) की आरटी-पीसीआर विधि में नमक के पानी (सेलाइन वाटर) से भरी एक साधारण संग्रह ट्यूब का उपयोग किया जाता है। रोगी इस घोल से गरारे करता है और उसे ट्यूब के अंदर डाल देता है।संग्रह ट्यूब में यह नमूना प्रयोगशाला में ले जाया जाता है, जहां इसे कमरे के तापमान पर एनईईआरआई द्वारा तैयार एक विशेष बफर घोल (सॉल्युशन) में  रखा जाता है। इस घोल को गर्म करने पर एक आरएनए टेम्प्लेट तैयार किया जाता है, जिसे आगे रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) के लिए संसाधित किया जाता है।नमूना एकत्र करने और उसे संसाधित करने की यह विशेष विधि हमें आरएनए निष्कर्षण की दूसरी अन्य महंगी ढांचागत आवश्यकता के स्थान पर इसका प्रयोग करने के लिए सक्षम बनाती है।लोग इससे स्वयं का परीक्षण भी कर सकते हैं, क्योंकि इस विधि अपना नमूना (सैम्पल) खुद ही लिया जा सकता है।” यह विधि पर्यावरण के अनुकूल भी है, क्योंकि इसमें अपशिष्ट उत्पादन कम से कम होता है।ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में परीक्षण के लिए वरदानवैज्ञानिकों को उम्मीद है कि परीक्षण की यह अनूठी तकनीक ऐसे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से लाभप्रद सिद्ध होगी, जहां अभी तक बुनियादी ढांचे की आवश्यकताएं एक बाधा के रूप में सामने आ सकती हैं।इस गैर-तकनीक को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की मंजूरी मिल गई है। साथ ही एनईईआरआई से कहा गया है कि वह देश भर में इसके प्रयोग में मदद करने के लिए अन्य परीक्षण प्रयोगशालाओं को प्रशिक्षित आवश्यक प्रशिक्षण की व्यवस्था करेIनागपुर नगर निगम ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है, जिसके बाद एनईईआरआई में स्वीकृत परीक्षण प्रोटोकॉल के अनुसार परीक्षण शुरू हो गया है।पूरे भारत में  लागू करने की आवश्यकताएनईईआरआई में पर्यावरणीय विषाणुविज्ञान प्रकोष्ठ (एनवायरनमेंटल वायरोलॉजी सेल) के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और लैब-तकनीशियनों ने विदर्भ क्षेत्र में बढ़ते कोविड-19 संक्रमणों के बीच इस रोगी-अनुकूल तकनीक को विकसित करने के लिए बड़े प्रयास किए हैं।डॉ. खैरनार और उनकी टीम को उम्मीद है कि इस पद्धति को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप तेजी से और अधिक नागरिक-अनुकूल परीक्षण होंगे, और महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई को और मजबूती मिलेगी I साभार- पीआईबी
संग्रह ट्यूब में यह नमूना प्रयोगशाला में ले जाया जाता है, जहां इसे कमरे के तापमान पर एनईईआरआई द्वारा तैयार एक विशेष बफर घोल (सॉल्युशन) में  रखा जाता है। इस घोल को गर्म करने पर एक आरएनए टेम्प्लेट तैयार किया जाता है, जिसे आगे रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) के लिए संसाधित किया जाता है।
नमूना एकत्र करने और उसे संसाधित करने की यह विशेष विधि हमें आरएनए निष्कर्षण की दूसरी अन्य महंगी ढांचागत आवश्यकता के स्थान पर इसका प्रयोग करने के लिए सक्षम बनाती है।
लोग इससे स्वयं का परीक्षण भी कर सकते हैं, क्योंकि इस विधि अपना नमूना (सैम्पल) खुद ही लिया जा सकता है।” यह विधि पर्यावरण के अनुकूल भी है, क्योंकि इसमें अपशिष्ट उत्पादन कम से कम होता है।
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में परीक्षण के लिए वरदान
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि परीक्षण की यह अनूठी तकनीक ऐसे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से लाभप्रद सिद्ध होगी, जहां अभी तक बुनियादी ढांचे की आवश्यकताएं एक बाधा के रूप में सामने आ सकती हैं।
इस गैर-तकनीक को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की मंजूरी मिल गई है। साथ ही एनईईआरआई से कहा गया है कि वह देश भर में इसके प्रयोग में मदद करने के लिए अन्य परीक्षण प्रयोगशालाओं को प्रशिक्षित आवश्यक प्रशिक्षण की व्यवस्था करेI
नागपुर नगर निगम ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है, जिसके बाद एनईईआरआई में स्वीकृत परीक्षण प्रोटोकॉल के अनुसार परीक्षण शुरू हो गया है।
पूरे भारत में  लागू करने की आवश्यकता
एनईईआरआई में पर्यावरणीय विषाणुविज्ञान प्रकोष्ठ (एनवायरनमेंटल वायरोलॉजी सेल) के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और लैब-तकनीशियनों ने विदर्भ क्षेत्र में बढ़ते कोविड-19 संक्रमणों के बीच इस रोगी-अनुकूल तकनीक को विकसित करने के लिए बड़े प्रयास किए हैं।
डॉ. खैरनार और उनकी टीम को उम्मीद है कि इस पद्धति को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप तेजी से और अधिक नागरिक-अनुकूल परीक्षण होंगे, और महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई को और मजबूती मिलेगी I साभार- पीआईबी

Keywords: Saline Gargle RT-PCR Testing Method, NEERI Nagpur, Saline Gargle, COVID-19 pandemic, National Environmental Engineering Research Institute (NEERI), Council of Scientific and Industrial Research (CSIR),Environmental Virology Cell, An RNA template, Reverse Transcription Polymerase Chain Reaction (RT-PCR), Full form of RT-PCR, What is Saline Gargle RT-PCR Testing Method, Indian Council of Medical Research (ICMR), नमक के पानी के गरारे से कोविड की जांच कैसे होती है, नमक के पानी के गरारे, कोविड की सस्ती जांच, कोरोना की सस्ती जांच, कोरोना जांच की विधियां, कोविड से बचने के उपाय, आरटीपीसीआर जांच कैसे होती है, कोविड टीकाकरण

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TAGGED:An RNA templateCouncil of Scientific and Industrial Research (CSIR)COVID-19 PandemicEnvironmental Virology CellFull form of RT-PCRIndian Council of Medical Research (ICMR)National Environmental Engineering Research Institute (NEERI)NEERI NagpurReverse Transcription Polymerase Chain Reaction (RT-PCR)Saline GargleSaline Gargle RT-PCR Testing MethodWhat is Saline Gargle RT-PCR Testing Methodआरटीपीसीआर जांच कैसे होती हैकोरोना की सस्ती जांचकोरोना जांच की विधियांकोविड की सस्ती जांचकोविड टीकाकरणकोविड से बचने के उपायनमक के पानी के गरारेनमक के पानी के गरारे से कोविड की जांच कैसे होती है
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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