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भव्य एवं दिव्य होगा सैन्यधामः मुख्यमंत्री

देहरादून। मुख्यमंत्री ने कहा कि सैन्यधाम के निर्माण कार्यों की चरणबद्ध कार्य योजना बनाई जाए। सैन्यधाम भव्य एवं दिव्य बनाया जाएगा। आवास स्थित कैंप कार्यालय में सैन्यधाम के संबंध में उच्च स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अन्य राज्यों में बने शहीद स्मारकों का भ्रमण भी किया जाए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सैन्यधाम की भव्यता के लिए पूरी योजना बनाई जाए। शहीद सम्मान यात्रा के दौरान शहीद सैनिकों के आंगन की मिट्टी सैन्यधाम के निर्माण के लिए लाई जाएगी। सैन्यधाम का स्वरूप राष्ट्रभक्ति एवं सैनिकों के शौर्य और पराक्रम का प्रतीक होगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि शहीद सम्मान यात्रा के आयोजन के लिए सभी तैयारियां जल्द पूर्ण की जाएं। शहीद सम्मान यात्रा की शुरुआत अक्टूबर 2021 के प्रथम सप्ताह से प्रस्तावित है। यात्रा का पूरा रूट चार्ट जल्द तैयार किया जाएगा।

इस अवसर पर सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव एल.फैनई, सचिव अमित नेगी, वी.षणमुगम, मेजर जनरल सम्मी सभरवाल (अ.प्रा.), जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आर. राजेश कुमार एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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