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राजीव गांधी पंचायत राज संगठन देशभर से चुनेगा एक लाख स्वराज साथी

वर्धा (महाराष्ट्र)। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन का वर्धा (महाराष्ट्र) में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सर्वोदय शिविर संपन्न हो गया। शिविर में निर्णय लिया गया कि संगठन देशभर में एक लाख स्वराज साथियों का चयन करेगा। राष्ट्रीय शिविर से पहले देशभर में दो दिन के 55 शिविर लगाए गए।
सेवाग्राम आश्रम,वर्धा में सात से नौ दिसम्बर तक तीन दिन के राष्ट्रीय सर्वोदय शिविर में हर राज्य के संगठन पदाधिकारी शामिल हुए। राष्ट्रीय शिविर में शामिल हुए  संगठन के उत्तराखंड प्रदेश संयोजक मोहित उनियाल के अनुसार, संगठन हर प्रदेश के पंचायत व नगर निकाय से स्वराज साथी चयनित करने के बाद जिला स्तरीय सर्वोदय संकल्प शिविर का आयोजन कर रहा है।
उत्तराखंड में भी सर्वोदय संकल्प शिविरों का जिला, ब्लॉक,नगर निकाय व पंचायत स्तर पर आयोजन किया जाएगा। इससे पहले भी हरिद्वार एवं हल्द्वानी में संकल्प शिविर लगाए गए हैं।
दो दिन के आवासीय शिविरों में कांग्रेस की विचारधारा, आइडिया ऑफ इंडिया,देश की आज़ादी में कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका, भारत के लिए संघर्ष, राजनीतिक व सामाजिक के साथ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाती है। स्वराज साथी आगामी कार्यक्रम तय करते हैं ।
उन्होंने बताया, देश मे 55 शिविरों के बाद वर्धा में राष्ट्रीय शिविर का आयोजन किया गया और निर्णय लिया गया कि संगठन पूरे देश से एक लाख स्वराज साथियों का चयन करेगा। उत्तराखंड में भी तेजी से स्वराज साथियों का चयन किया जा रहा है और आने वाले समय में हर जिले व पंचायत स्तर पर शिविरों का आयोजन करके कांग्रेस की विचारधारा को जन-जन तक मजबूती से पहुंचाया जाएगा। पीड़ित व शोषित लोगों के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी ।
राष्ट्रीय शिविर में संगठन की राष्ट्रीय संयोजक मीनाक्षी नटराज,राष्ट्रीय सह-संयोजक व कांग्रेस राष्ट्रीय सचिव हर्षवर्धन सपकाल, कुमाऊं संभाग संयोजक नीरज तिवारी,नैनीताल जिला संयोजक मनोज बिष्ट समेत हर प्रदेश से आए पदाधिकारी शामिल हुए।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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