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उत्तराखंड में राशन की दुकानों पर हर माह निशुल्क बांटे जाएंगे राशन के 14 लाख बैग

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने उत्तराखंड में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (Prime Minister Garib Kalyan Anna Yojana) अन्नोत्सव की शुरुआत करते हुए लाभार्थियों को खाद्यान्न की किट वितरित कीं।

जनता दर्शन हाल, सीएम आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने छह लाभार्थियों को किट प्रदान कीं।

अन्नोत्सव कार्यक्रम में पूरे माह राज्य की सभी 9,230 राशन की दुकानों के माध्यम से निशुल्क खाद्यान्न वितरित किया जाएगा। राशन के 14 लाख बैग बांटे जाएंगे।

इस मौके पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने हमेशा गरीबों की चिंता की है। कोरोना काल में जब सारी आर्थिक गतिविधियां रुकी थीं, प्रधानमंत्री ने 80 करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में निशुल्क राशन सम्मान के साथ उपलब्ध कराया।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में वर्ष 2020 में अन्त्योदय एवं प्राथमिक परिवारों के लाभार्थियों को माह अप्रैल से नवम्बर तक यानी आठ माह तक प्रति यूनिट पांच किलो खाद्यान्न (गेहूं/चावल) तथा एक किलो दाल प्रति कार्ड निशुल्क वितरण किया गया।

वर्ष 2021 में अन्त्योदय एवं प्राथमिक परिवारों के लाभार्थियों को माह मई से नवम्बर कुल सात माह तक प्रति यूनिट पांच किलो खाद्यान्न (गेहूँ/चावल) निःशुल्क बांटा जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत योजना के अन्तर्गत प्रवासियों/अवरुद्ध प्रवासियों के लिए भारत सरकार ने 5 किलो चावल प्रति व्यक्ति एवं एक किलो चना प्रति परिवार निःशुल्क वितरित किया।

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के अन्तर्गत राज्य में माह अगस्त, 2020 से राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी लागू किया गया है। जिसके माध्यम से राज्य में अन्य राज्यों से आने वाले प्रवासी परिवारों को खाद्यान्न सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

राज्य खाद्य योजना के अन्तर्गत राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से वर्ष 2020 तथा 2021 में माह अप्रैल से जून तक कुल 3-3 माह लगभग 10 लाख परिवारों को 12.50 किलो अतिरिक्त खाद्यान्न प्रति कार्ड सब्सिडाइज दरों पर वितरित किया।

इसके अतिरिक्त राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना तथा राज्य खाद्य योजना के लगभग 24 लाख परिवारों को दो किलो चीनी प्रति कार्ड 25 रुपये प्रति किलो की दर से बांटी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत योजना, आत्मनिर्भर भारत, किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं से करोड़ों भारतीयों को लाभान्वित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हमने प्रदेश की जनता को कोरोना राहत पैकेज दिए। 207 प्रकार की निशुल्क जांचों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत ने कहा कि अन्नोत्सव कार्यक्रम का उद्देश्य राज्य के समस्त लाभार्थियों को भोजन के साथ-साथ सम्मान प्रदान करना है। प्रथम चरण में राज्य मुख्यालय, जिला मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, ब्लाक मुख्यालय, नगर निगम एवं नगर पालिका क्षेत्रों में राशन की दुकानों के माध्यम से निःशुल्क खाद्यान्न वितरण समारोह पूर्वक किया जाएगा।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी ने जनहित में कई आयाम स्थापित किए। गरीब से गरीब व्यक्ति का कल्याण हमारी प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से विभिन्न जिलों के चयनित लाभार्थियों में बागेश्वर की माला देवी, गीता देवी, ऊधम सिंह नगर की सोनिया कालरा, रमेश थापा, हरिद्वार की लीला देवी और उत्तरकाशी की सुनीता देवी एवं नौमी देवी से बात की। मुख्यमंत्री ने सभी से उन्हें मिल रहे राशन के बारे में जानकारी ली।

कार्यक्रम में विधायक राम सिंह कैड़ा, सचिव बीएस मनराल, जिलाधिकारी देहरादून आर राजेश कुमार, अपर सचिव प्रताप शाह व वर्चुअल माध्यम से विधायक सुरेश राठौर, चंदनराम दास, सभी जिलाधिकारी, जनप्रतिनिधि, राशन विक्रेता, लाभार्थी उपस्थित रहे।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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