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सरकार का लक्ष्य, देश के हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेजः मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को एम्स ऋषिकेश में एक कार्यक्रम में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पीएम केयर्स के तहत स्थापित 35 प्रेशर स्विंग एडॉर्प्शन (पीएसए) ऑक्सीजन संयंत्र राष्ट्र को समर्पित किए।

इसके साथ ही, देश के सभी जिलों को अब पीएसए ऑक्सीजन संयंत्र, जो संचालन में हैं, उनकी सुविधा मिल जाएगी।

इस दौरान सभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है और मां शैलपुत्री, हिमालय पुत्री हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “आज के दिन मेरा यहां होना, यहां आकर इस मिट्टी को प्रणाम करना, हिमालय की इस धरती को प्रणाम करना, इससे बड़ा जीवन में कौन सा धन्य भाव हो सकता है?”

उन्होंने ओलंपिक और पैरालंपिक में शानदार प्रदर्शन के लिए राज्य को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड की भूमि से मेरा सम्बन्ध केवल हृदय का ही नहीं कर्म का भी है, सार का ही नहीं, तत्व का भी है।

प्रधानमंत्री ने आज के दिन को खुद के लिए महत्वपूर्ण होने के मद्देनजर याद करते हुए कहा कि 20 वर्ष पहले आज ही के दिन, उन्हें जनता की सेवा करने का एक नया दायित्व मिला था।

उन्होंने कहा कि लोगों के बीच रहकर, लोगों की सेवा करने की मेरी यात्रा तो कई दशक पहले से चल रही थी, लेकिन आज से 20 वर्ष पूर्व, गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें नई जिम्मेदारी मिली थी।

उन्होंने यह भी जिक्र किया कि उनकी यात्रा की शुरुआत उत्तराखंड राज्य की स्थापना के साथ हुई, जब उत्तराखंड बनने के कुछ महीनों बाद उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री का पद संभाला था। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी यह कल्पना नहीं की थी कि जनता के आशीर्वाद से प्रधानमंत्री बन जायेंगे। प्रधानमंत्री ने देशवासियों और उत्तराखंड के लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, कि शासन-प्रमुख के रूप में उनकी अनवरत यात्रा 21वें वर्ष में प्रवेश कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि जिस भूमि से जीवनदायिनी योग और आयुर्वेद का उदय हुआ, वहीं आज ऑक्सीजन संयंत्रों का लोकार्पण किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड महामारी से लड़ने में भारत ने इतने कम समय में जो सुविधाए तैयार कीं, वह हमारे देश के सामर्थ्य को दिखाता है। सिर्फ एक टेस्टिंग लैब से करीब तीन हजार टेस्टिंग लैब का नेटवर्क तैयार हो गया।

मास्क और किट्स के आयातक से निर्यातक बनने का सफर भारत ने पूरा किया। देश के दूर-दराज इलाकों में भी नये वेंटिलेटर्स की सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। भारत में मेड इन इंडिया वैक्सीन का तेजी से और बड़ी मात्रा में निर्माण हुआ। भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे तेज टीकाकरण अभियान चलाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने जो कर दिखाया, वह हमारी संकल्पशक्ति, हमारे सेवाभाव, हमारी एकजुटता का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सामान्य दिनों में भारत एक दिन में 900 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन करता था। मांग बढ़ने के साथ भारत ने मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन दस गुना से ज्यादा तक बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि यह दुनिया के किसी भी देश के लिए अकल्पनीय लक्ष्य था, लेकिन भारत ने इसे हासिल कर लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हर भारतवासी के लिये गर्व की बात है कि कोरोना वैक्सीन की 93 करोड़ डोज लगाई जा चुकी हैं। बहुत जल्द, भारत 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत ने कोविन प्लेटफार्म का निर्माण करके पूरी दुनिया को राह दिखाई कि इतने बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन कैसे किया जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सरकार इस बात का इंतजार नहीं करती कि नागरिक उसके पास अपनी समस्याएं लेकर आएंगे, तब कोई कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकारी माइंडसेट और सिस्टम से इस भ्रांति को हम बाहर निकाल रहे हैं। अब सरकार नागरिकों के पास जाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि छह-सात साल पहले तक सिर्फ कुछ राज्यों तक ही एम्स की सुविधा थी, आज हर राज्य तक एम्स पहुंचाने के लिए काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि छह एम्स से आगे बढ़कर 22 एम्स का सशक्त नेटवर्क बनाने की तरफ हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सरकार का यह लक्ष्य है कि देश के हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज जरूर हो।

उन्होंने स्मरण किया कि उत्तराखंड के निर्माण का सपना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पूरा किया था। अटल बिहारी वाजपेयी मानते थे कि कनेक्टिविटी का सीधा सम्बन्ध विकास से है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हीं की प्रेरणा से आज देश में कनेक्टिविटी की अवसंरचना में अभूतपूर्व तेजी और बड़े पैमाने पर काम हो रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2019 में जल जीवन मिशन शुरू होने से पहले, उत्तराखंड के सिर्फ एक लाख 30 हजार घरों में ही नल से पानी पहुंचता था। आज उत्तराखंड के सात लाख 10 हजार से ज्यादा घरों में नल से पानी पहुंचने लगा है, यानी सिर्फ दो वर्ष के भीतर राज्य के करीब-करीब छह लाख घरों को पानी का कनेक्शन मिला है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार हर फौजी, हर पूर्व फौजी के हितों को लेकर भी पूरी गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह हमारी सरकार है, जिसने ‘वन रैंक-वन पेंशन’ को लागू करके अपने फौजी भाइयों की 40 साल पुरानी मांग पूरी की।

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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