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सामान्य ज्ञानः भारत के राष्ट्रीय वन्यजीव पार्क

गिर राष्ट्रीय उद्यान एशियाई शेरों का एकमात्र स्थान है, जो गुजरात राज्य के जूनागढ़ जिले के लगभग 65 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित है। 18 सितंबर,1965 को स्थापित अभ्यारण्य गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में 1412 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। 

सरिस्का टाइगर रिजर्व राष्ट्रीय उद्यान है, जो राजस्थान के अलवर जिले में  है और शेरों के लिए आरक्षित है।

केओलादेव नेशनल पार्क या केओलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के भरतपुर जिले में है। 

दाराह राष्ट्रीय उद्यान की वर्ष 2004 में राजस्थान में स्थापना हुई थी, जिसमें तीन वन्यजीव अभ्यारण्य दाराह वन्यजीव अभ्यारण्य, चंबल वन्यजीव अभ्यारण्य और जवाहर सागर वन्यजीव अभ्यारण्य शामिल है। यह काठियावाड़-गिर सूखी पर्णपाती वन क्षेत्र में स्थित है। 

माउंट आबू वन्यजीव अभ्यारण्य राजस्थान की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला की अरावली रेंज में स्थित है। वर्ष 1960 में इसे अभ्यारण्य घोषित किया गया था। 

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान उत्तरी भारत में सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय पार्क है। यह पार्क दक्षिणी राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित है, जो जयपुर से लगभग 130 किमी दूर है। 

हजारीबाग वन्यजीव अभ्यारण्य भारत के झारखंड में स्थित है। यह रांची से करीब 55 मील दूर है। यह 1955 में स्थापित किया गया था।

मुदुमलाई राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य तमिलनाडु के कोयम्बटूर शहर से लगभग 150 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में नीलगिरि जिले में नीलगिरी पहाड़ियों पर स्थित बाघ अभ्यारण्य है। 

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तरी भारत के उत्तराखंड राज्य में वन्यजीव अभ्यारण्य है। वनस्पतियों और जीवों से समृद्ध यह राष्ट्रीय उद्यान बंगाल टाइगर के लिए जाना जाता है। बाघ, तेंदुओं और जंगली हाथियों सहित अन्य पशु ढिकाला क्षेत्र में घूमते हैं। 

पेरियार राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभ्यारण्य (पीएनपी) केरल के इडुक्की, कोट्टायम और पथानामथिट्टा जिलों में तेक्कडी के पास संरक्षित क्षेत्र है। यह हाथी आरक्षित और बाघ अभयारण्य के लिए प्रसिद्ध है। 

राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य, जिसे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभ्यारण्य भी कहा जाता है।  उत्तर भारत में 5,400 वर्ग किमी में फैला यह अभ्यारण्य तीन राज्यों में चंबल नदी क्षेत्र में स्थित है।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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