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Mobile Stroke Units Assam ICMR: असम के ग्रामीण इलाकों में अब घर तक पहुंचेगा ‘चलता-फिरता अस्पताल’

Rajesh Pandey
Last updated: January 22, 2026 1:51 pm
Rajesh Pandey
3 months ago
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Mobile Stroke Units Assam ICMR: असम/नई दिल्ली, 22 जनवरी, 2026: भारत में ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात) के मरीजों के लिए इलाज की राह अब आसान होने जा रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने असम सरकार को दो मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (MSU) सौंपी हैं। यह दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले स्ट्रोक रोगियों के लिए अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को ‘अस्पताल से मरीज के दरवाजे’ तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

Contents
क्यों जरूरी है यह ‘मोबाइल अस्पताल’?विशेषताएं: पहिए पर चलता अस्पतालशानदार परिणाम: 24 घंटे का काम 2 घंटे में

Mobile Stroke Units Assam ICMR: एमएसयू एक चलता-फिरता अस्पताल है, जो सीटी स्कैनर, विशेषज्ञों से टेलीकंसल्टेशन, प्वाइंट-ऑफ-केयर प्रयोगशाला और रक्त के थक्के तोड़ने वाली दवाओं से सुसज्जित है। यह रोगी के घर पर या उसके आस-पास ही स्ट्रोक का शीघ्र निदान और उपचार करने में सक्षम बनाता है। यह विशेष रूप से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां अस्पतालों तक पहुंचने में कई घंटे लग सकते हैं। विशेषज्ञ टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से, एमएसयू स्ट्रोक के प्रकार की शीघ्र पहचान और उपचार की त्वरित शुरुआत को संभव बनाता है-जिससे जीवन बचता है और विकलांगता को रोका जा सकता है।

क्यों जरूरी है यह ‘मोबाइल अस्पताल’?

Mobile Stroke Units Assam ICMR: भारत में मौत और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक ‘स्ट्रोक’ है। डॉक्टरों के अनुसार, इलाज में देरी होने पर हर मिनट मस्तिष्क की लगभग 1.9 अरब कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। ‘गोल्डन ऑवर’ (स्ट्रोक के शुरुआती एक घंटा) के भीतर इलाज मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से अस्पताल पहुँचने में घंटों लग जाते हैं। इसी चुनौती को खत्म करने के लिए यह सेवा शुरू की गई है।

पूर्वोत्तर में स्ट्रोक का प्रकोप बहुत अधिक है। दुर्गम भूभाग, लंबी दूरी और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण हमेशा समय पर स्ट्रोक का उपचार चुनौतीपूर्ण रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए आईसीएमआर ने डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट के नेतृत्व में एक स्ट्रोक यूनिट और तेजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल एवं बैपटिस्ट क्रिश्चियन अस्पताल में चिकित्सकों के नेतृत्व में स्ट्रोक यूनिट स्थापित की है। मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को अस्पताल पहुंचने से पहले ही स्ट्रोक की देखभाल की इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।

विशेषताएं: पहिए पर चलता अस्पताल

ये मोबाइल स्ट्रोक यूनिट किसी अत्याधुनिक अस्पताल से कम नहीं हैं। इनमें शामिल हैं:

  • CT स्कैनर: मस्तिष्क की स्थिति की तुरंत जांच के लिए।

  • पॉइंट-ऑफ-केयर लैब: मौके पर ही रक्त और अन्य परीक्षण।

  • टेलीकंसल्टेशन: विशेषज्ञों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सलाह।

  • इलाज की सुविधा: स्ट्रोक के थक्के को खत्म करने वाली दवाएं (Clot-busting drugs) तुरंत उपलब्ध।

शानदार परिणाम: 24 घंटे का काम 2 घंटे में

Mobile Stroke Units Assam ICMR:  इस मॉडल ने उपचार का समय लगभग 24 घंटे से घटाकर लगभग 2 घंटे कर दिया, मृत्यु दर में एक तिहाई की कमी आई और विकलांगता आठ गुना कम हो गई। 2021 से अगस्त 2024 के बीच, एमएसयू को 2,300 से अधिक आपातकालीन कॉल प्राप्त हुए। प्रशिक्षित नर्सों ने स्ट्रोक के 294 संदिग्ध मामलों की जांच की, जिनमें से 90 प्रतिशत रोगियों का उपचार उनके घर पर ही किया गया। एमएसयू को 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा के साथ एकीकृत करने से इसकी पहुंच 100 किलोमीटर के दायरे तक बढ़ गई।

ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने बताया कि जर्मनी के बाद भारत दूसरा ऐसा देश है जिसने ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में सफलतापूर्वक मोबाइल स्ट्रोक यूनिट का संचालन किया है। भारत ने पूर्वोत्तर भारत के ग्रामीण, दूरस्थ और दुर्गम भूभागों में ऐसी यूनिटों का मूल्यांकन किया है। हम ग्रामीण क्षेत्रों में तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक के रोगियों के उपचार के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के साथ एमएसयू के सफल एकीकरण की रिपोर्ट करने वाला विश्व स्तर पर दूसरा देश भी हैं।”

असम में 2021 से चल रहे परीक्षणों के परिणाम चौंकाने वाले रहे हैं:

  • समय की बचत: इलाज का समय जो पहले औसतन 24 घंटे था, वह घटकर मात्र 2 घंटे रह गया।

  • जान बची: मौत के मामलों में एक-तिहाई (1/3) की कमी आई।

  • विकलांगता में सुधार: समय पर इलाज से विकलांगता के खतरे में 8 गुना की कमी देखी गई।

  • सीधी मदद: 2021 से अब तक 2,300 से अधिक कॉल अटेंड की गईं और 90% मरीजों का इलाज सीधे उनके घर या उसके पास किया गया।

पहाड़ी और दुर्गम रास्तों के कारण उत्तर-पूर्व भारत में स्ट्रोक के मरीजों को अस्पताल पहुँचाना बहुत कठिन था। अब इन यूनिट्स को ‘108’ एम्बुलेंस सेवा से जोड़ दिया गया है, जिससे 100 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को तुरंत मदद मिल सकेगी। असम के स्वास्थ्य सचिव पी. अशोक बाबू ने कहा कि यह पहल भविष्य में पूरे राज्य और देश के अन्य हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए एक मजबूत आधार साबित होगी।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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