ई सिगरेटः दिल, दिमाग और फेफड़ों के लिए बड़ा खतरा

Rajesh Pandey

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने चेतावनी दी है कि स्वास्थ्य के लिए गम्भीर जोखिम पैदा करने वाली ई-सिगरेट ( ELECTRONIC CIGARETTE) की ओर युवाओं को आकर्षित करने के लिए आक्रामक मार्केटिंग” की जा रही है

संयुक्त राष्ट्र समाचार की एक रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ के हवाले से कहा गया है, दुनिया के एक बड़े हिस्से में, बच्चों को ई-सिगरेट के हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए कोई नियम मौजूद नहीं है। 88 देशों में ई-सिगरेट ख़रीदने की कोई न्यूनतम आयु निर्धारित नहीं है और 74 देशों ने, ई-सिगरेट के प्रयोग के लिए कोई नियम लागू नहीं किए हैं।

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी प्रमुख डॉक्टर टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसस ने देशों से, ई-सिगरेट के प्रयोग की रोकथाम के उपाय बढ़ाने का आह्वान किया है।

उन्होंने कहा कि “बच्चों को कम उम्र में ही ई-सिगरेट का उपयोग करने के लिए लालायित किया जा रहा है और फँसाया जा रहा है, और इससे बच्चों को निकोटीन की लत लगने का ख़तरा है।”

रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन के शोध में पाया गया है कि दुनिया भर में, 13 से 15 वर्ष की आयु के बच्चे, वयस्कों की तुलना में, ई-सिगरेट का उपयोग, अधिक दर पर कर रहे। ब्रिटेन में, ई-सिगरेट के युवा उपयोगकर्ताओं की संख्या, पिछले तीन वर्षों में तीन गुनी हो गई है।

संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि ई-सिगरेट के ज़रिए धूम्रपान किए जाने वाले उत्पाद, कार्सिनोजेनिक (carcinogenic)  पदार्थ उत्पन्न करते हैं। ये हृदय और फेफड़ों के विकारों का ख़तरा बढ़ाते हैं, और मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकते हैं।

संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि तम्बाकू उद्योग यह तर्क देने के लिए “ऐसे झूठे सबूतों को बढ़ावा देता है और उन पर धन ख़र्च करता है” कि ई-सिगरेट नुक़सान कम करती है। “साथ ही “बच्चों और धूम्रपान से दूर रहने वालों के लिए, इन उत्पादों को बड़े पैमाने पर प्रचारित किया जा रहा है, और अरबों की संख्या में सिगरेट बेची जा रही हैं।”

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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