By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Reading: दुनिया के सबसे खतरनाक माइग्रेटरी कीट हैं रेगिस्तानी टिड्डे
Share
Notification Show More
Font ResizerAa
NEWSLIVE24x7NEWSLIVE24x7
Font ResizerAa
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
  • About
  • Agriculture
  • Uttarakhand
  • Blog Live
  • Career
  • News
  • Contact us
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
- Advertisement -
Ad imageAd image
NEWSLIVE24x7 > Blog > Agriculture > दुनिया के सबसे खतरनाक माइग्रेटरी कीट हैं रेगिस्तानी टिड्डे
Agriculturecurrent AffairsDisasterFeaturedfood

दुनिया के सबसे खतरनाक माइग्रेटरी कीट हैं रेगिस्तानी टिड्डे

Rajesh Pandey
Last updated: February 25, 2022 9:23 pm
Rajesh Pandey
4 years ago
Share
SHARE

रेगिस्तानी टिड्डे दुनिया में सबसे विनाशकारी प्रवासी कीट हैं। घने और अत्यधिक गतिशील दल बनाने वाला रेगिस्तानी टिड्डा हर दिन अपने वजन के बराबर खाता हैं। खाद्य फसल और वनस्पतियां इसके भोजन की प्राथमिकता में हैं।

एक वर्ग किमी तक फैले टिड्डी दल में 80 मिलियन वयस्क हो सकते हैं, जो प्रतिदिन 35 हजार लोगों का भोजन डकारने की क्षमता रखते हैं। इनके बड़े दल खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका के लिए एक गंभीर खतरा हैं। यूएन एजेंसी एफएओ (खाद्य एवं कृषि संगठन) को रेगिस्तानी टिड्डियों की आबादी की निगरानी करने और इस विनाशकारी कीट से निपटने में देशों की मदद करने का व्यापक अनुभव है।

2020 की शुरुआत में, पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण पश्चिम एशिया और लाल सागर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर डेजर्ट टिड्डी का प्रकोप हुआ, जहां जलवायु परिस्थितियों के कारण कीट के व्यापक प्रजनन की संभावनाएं हैं।

रेगिस्तानी टिड्डे का लगभग तीन महीने की जीवन है। दो सप्ताह के बाद अंडे से कीट निकलता है। छह सप्ताह में वयस्क हो जाता है। यह कम से कम एक महीने में अंडे देने के लिए तैयार होता है। इनकी संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, यह पीढ़ी दर पीढ़ी 20 गुणा की दर से बढ़ रहे हैं।

https://www.fao.org/fileadmin/user_upload/faoweb/Themes__pages/Locust/locust480_web.mp4

यह लंबी दूरी की यात्रा करने में सक्षम हैं। रेगिस्तानी टिड्डों के झुंड खतरनाक दर से फैल सकते हैं, जो हर दिन नौ से दस घंटे तक उड़ते हैं। एक हफ्ते में ये 1,000 किमी तक की यात्रा कर सकते हैं, यानी रोम और पेरिस, मुंबई और दिल्ली या सैन फ्रांसिस्को और सिएटल के बीच लगभग उतनी ही दूरी।

एफएओ वैश्विक रेगिस्तानी टिड्डियों की स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है। यह इनके आक्रमण और प्रजनन की घटनाओं के समय, फैलाव और स्थान के बारे में प्रारंभिक चेतावनी जारी करता है। ये शुरुआती चेतावनी महत्वपूर्ण हैं।

रेगिस्तानी टिड्डियों से प्रभावित सभी देश एफएओ को डेटा उपलब्ध कराते हैं। यूएन एजेंसी टिड्डियों की स्थिति का आकलन करने के लिए जलवायु और आवास डेटा और उपग्रह छवियों के साथ उस जानकारी का विश्लेषण करती है।

रेगिस्तानी टिड्डे आमतौर पर अफ्रीका के अर्धशुष्क और शुष्क रेगिस्तान, पूर्व और दक्षिण-पश्चिम एशिया तक सीमित होते हैं, इन इलाकों में सालाना 200 मिमी से कम बारिश होती है। यह लगभग 16 मिलियन वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल है, जिसमें लगभग 30 देश शामिल हैं। हालांकि रेगिस्तानी टिड्डे को सबसे महत्वपूर्ण प्रजाति माना जाता है, पर दुनियाभर में टिड्डियों की कई अन्य महत्वपूर्ण प्रजातियां इस प्रकार हैं-

  • African Migratory Locust (Locusta migratoria migratorioides) – Africa
  • Oriental Migratory Locust (Locusta migratoria manilensis) – South-East Asia;
  • Red Locust (Nomadacris septemfasciata) – Eastern Africa;
  • Brown Locust (Locustana pardalina) – Southern Africa;
  • Italian Locust (Calliptamus italicus), from western Europe to Central Asia;
  • Moroccan Locust (Dociostaurus maroccanus) – North-West Africa to Asia;
  • Bombay Locust (Nomadacris succincta) – South-West to South-East Asia;
  • Australian Plague Locust (Chortoicetes terminifera) – Australia;
  • Tree Locusts (Anacridium sp.) – Africa, Mediterranean, Near East.

यहां है – मूल लेख 

 

You Might Also Like

Start-ups India: लैवेंडर की खेती से जम्मू कश्मीर में बैंगनी क्रांति
सीएम पहुँचे चमोली के आपदाग्रस्त डुंग्री गांव
कोविड-19 मरीजों में पाए जा रहे फंगल संक्रमण से सुरक्षित रहें
उत्तराखंड चुनावः हरीश रावत ने 2016 की सियासी घटना पर कही यह बात
महत्वपूर्णः UKPSC ने इन पदों की परीक्षा के लिए जारी किया नोटिफिकेशन
TAGGED:Desert locust crisisDesert Locust populationsFood and agriculture organizationrural livelihoodsThe Desert Locust
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Email Copy Link Print
ByRajesh Pandey
Follow:
newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
Previous Article सत्रह साल से नलोंवाली देवी के मंदिर में सेवा कर रहे हयात अली
Next Article Video- हम शर्मिंदा हैंः इसलिए एक दिन घस्यारी बनते हैं, बोझ उठाकर कुछ दूर चलते हैं
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://newslive24x7.com/wp-content/uploads/2026/04/CM-Dhami-4-Year-Journey-2026-2-Min-1.mp4

Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun
Prem Nagar Bazar Doiwala Dehradun Doiwala, PIN- 248140
9760097344
© 2026 News Live 24x7| Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?