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दुनिया के सबसे खतरनाक माइग्रेटरी कीट हैं रेगिस्तानी टिड्डे

एक वर्ग किमी के झुंड में 80 मिलियन वयस्क तक हो सकते हैं, जो प्रतिदिन 35 हजार लोगों का भोजन डकार सकते हैं

रेगिस्तानी टिड्डे दुनिया में सबसे विनाशकारी प्रवासी कीट हैं। घने और अत्यधिक गतिशील दल बनाने वाला रेगिस्तानी टिड्डा हर दिन अपने वजन के बराबर खाता हैं। खाद्य फसल और वनस्पतियां इसके भोजन की प्राथमिकता में हैं।

एक वर्ग किमी तक फैले टिड्डी दल में 80 मिलियन वयस्क हो सकते हैं, जो प्रतिदिन 35 हजार लोगों का भोजन डकारने की क्षमता रखते हैं। इनके बड़े दल खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका के लिए एक गंभीर खतरा हैं। यूएन एजेंसी एफएओ (खाद्य एवं कृषि संगठन) को रेगिस्तानी टिड्डियों की आबादी की निगरानी करने और इस विनाशकारी कीट से निपटने में देशों की मदद करने का व्यापक अनुभव है।

2020 की शुरुआत में, पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण पश्चिम एशिया और लाल सागर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर डेजर्ट टिड्डी का प्रकोप हुआ, जहां जलवायु परिस्थितियों के कारण कीट के व्यापक प्रजनन की संभावनाएं हैं।

रेगिस्तानी टिड्डे का लगभग तीन महीने की जीवन है। दो सप्ताह के बाद अंडे से कीट निकलता है। छह सप्ताह में वयस्क हो जाता है। यह कम से कम एक महीने में अंडे देने के लिए तैयार होता है। इनकी संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है, यह पीढ़ी दर पीढ़ी 20 गुणा की दर से बढ़ रहे हैं।

यह लंबी दूरी की यात्रा करने में सक्षम हैं। रेगिस्तानी टिड्डों के झुंड खतरनाक दर से फैल सकते हैं, जो हर दिन नौ से दस घंटे तक उड़ते हैं। एक हफ्ते में ये 1,000 किमी तक की यात्रा कर सकते हैं, यानी रोम और पेरिस, मुंबई और दिल्ली या सैन फ्रांसिस्को और सिएटल के बीच लगभग उतनी ही दूरी।

एफएओ वैश्विक रेगिस्तानी टिड्डियों की स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है। यह इनके आक्रमण और प्रजनन की घटनाओं के समय, फैलाव और स्थान के बारे में प्रारंभिक चेतावनी जारी करता है। ये शुरुआती चेतावनी महत्वपूर्ण हैं।

रेगिस्तानी टिड्डियों से प्रभावित सभी देश एफएओ को डेटा उपलब्ध कराते हैं। यूएन एजेंसी टिड्डियों की स्थिति का आकलन करने के लिए जलवायु और आवास डेटा और उपग्रह छवियों के साथ उस जानकारी का विश्लेषण करती है।

रेगिस्तानी टिड्डे आमतौर पर अफ्रीका के अर्धशुष्क और शुष्क रेगिस्तान, पूर्व और दक्षिण-पश्चिम एशिया तक सीमित होते हैं, इन इलाकों में सालाना 200 मिमी से कम बारिश होती है। यह लगभग 16 मिलियन वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल है, जिसमें लगभग 30 देश शामिल हैं। हालांकि रेगिस्तानी टिड्डे को सबसे महत्वपूर्ण प्रजाति माना जाता है, पर दुनियाभर में टिड्डियों की कई अन्य महत्वपूर्ण प्रजातियां इस प्रकार हैं-

  • African Migratory Locust (Locusta migratoria migratorioides) – Africa
  • Oriental Migratory Locust (Locusta migratoria manilensis) – South-East Asia;
  • Red Locust (Nomadacris septemfasciata) – Eastern Africa;
  • Brown Locust (Locustana pardalina) – Southern Africa;
  • Italian Locust (Calliptamus italicus), from western Europe to Central Asia;
  • Moroccan Locust (Dociostaurus maroccanus) – North-West Africa to Asia;
  • Bombay Locust (Nomadacris succincta) – South-West to South-East Asia;
  • Australian Plague Locust (Chortoicetes terminifera) – Australia;
  • Tree Locusts (Anacridium sp.) – Africa, Mediterranean, Near East.

यहां है – मूल लेख 

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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