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खटीमा में बनेगा महाराणा प्रताप प्रशासनिक एकेडमी प्रशिक्षण केंद्र

खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को एकलव्य विद्यालय खटीमा मैदान में पहुंचकर एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय का लोकार्पण किया। साथ ही, 45 करोड़ 54 लाख 49 हज़ार की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण तथा 223 करोड़ 37 लाख 82 हजार की 84 योजनाओं का शिलान्यास किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की, उत्तराखंड में खेल विश्वविद्यालय का निर्माण हो रहा है, जिसका नाम महाराणा प्रताप के नाम पर रखा जाएगा। खटीमा में कंजाबाग तिराहे का नाम महाराणा प्रताप के नाम पर रखा जाएगा। इस चौराहे पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। खटीमा में महाराणा प्रताप प्रशासनिक एकेडमी प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण किया जाएगा। खटीमा के जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में भूमसेन का निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा की जनता के समर्थन से मुख्य सेवक के रूप में उन्हें काम करने का मौका मिला और जब भी खटीमा आते हैं तो भावविभोर हो जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा का थारू जनजातीय समाज सरल स्वभाव के साथ-साथ ईमानदार व्यक्तित्व का भी धनी है। जनजातीय समूहों का जीवन संस्कृति का एक विशेष दर्शन है, जो प्रकृति के साथ समन्वय बिठाकर जीवन जीते हैं।
उन्होंने कहा कि खटीमा की धरती स्वतंत्रता संग्राम की धरती रही है, यहां से अनेक वीरों ने जन्म लिया है, चाहे राज्य गठन का आंदोलन हो या स्वतंत्रता संग्राम, इस धरती का इतिहास वीरता के उदाहरणों से भरा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका हमेशा से सपना था कि खटीमा में कोई ऐसा संस्थान होना चाहिए, जिसके माध्यम से जनजातीय बच्चे बहुत शानदार तरीके से आगे बढ़ें। अब वो सपना एकलव्य आवासीय विद्यालय के रूप में साकार हो रहा है, जो जनजातियों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। धामी ने घोषणा करते हुए कहा कि आने वाले समय में खटीमा में बाईपास की सुविधा मिलेगी, साथ ही जल्द खटीमा को नए बस अड्डे के निर्माण भी होगा।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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