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सन गांव पश्चिम में मां सुरकंडा की भव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा

बंगला मैदान स्थित मां सुरकंडा के नये मंदिर में समारोह का आयोजन

देहरादून। देहरादून शहर से लगभग 30 किमी. दूर बंगला मैदान में नवनिर्मित मंदिर में मां सुरकंडा की भव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई। यहां वर्षों पुराने मंदिर में भी पूजा अर्चना की गई।

बंगला मैदान देहरादून जिले में सनगांव ग्राम पंचायत के पश्चिमी हिस्से में स्थित है। यहां जगत जननी मां सुरकंडा की भव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।

मंदिर परिसर में ढोल की थाप पर मां सुरकंडा के जयकारे गूंजे। श्रद्धालु माता की भक्ति में मगन हो गए।

मंदिर परिसर में हवन पूजन किया गया। आसपास के साथ, दूर दूर से भी बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएं, युवा, बच्चे माता के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे।

थाल/कुठार गांव के निवासियों ने मां सुरकंडा के नये मंदिर का निर्माण कराया है। यहां एक और मंदिर है, जहां वर्षों से माता की पूजा अर्चना की जाती रही है।

थाल, कुठार गांव की माता सुरकंडा देवी मंदिर समिति से जुड़े सनगांव ग्राम पंचायत प्रधान प्रतिनिधि पुनीत रावत ने बताया, मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का शुभारंभ एक मार्च से हो गया था।

आज तीन मार्च को विधि विधान से पूजा अर्चना करके मां सुरकंडा की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इस अवसर श्रद्धालु को भंडारे में प्रसाद वितरित किया गया।

 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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