
Lava-proof supercomputer chip: ‘लावा’ जैसी गर्मी में भी नहीं पिघलेगा यह सुपर कंप्यूटर
Lava-proof supercomputer chip: लॉस एंजिल्स : यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया (USC) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा तकनीकी चमत्कार कर दिखाया है जो भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान और भारी उद्योगों की तस्वीर बदल सकता है। 26 मार्च 2026 को ‘साइंस’ (Science) जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक मेमोरी डिवाइस विकसित की है, जो 700°C (1292°F) के भीषण तापमान पर भी पूरी तरह विश्वसनीय तरीके से काम करती है।
Lava-proof supercomputer chip: यह शोध यूएससी विटर्बी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के मिंग हसीह इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग और यूएससी स्कूल ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग के प्रोफेसर जोशुआ यांग (Joshua Yang) के नेतृत्व में किया गया है। जोशुआ यांग यहां ‘आर्थर बी. फ्रीमैन चेयर प्रोफेसर’ के पद पर कार्यरत हैं।
Lava-proof supercomputer chip: इस चिप की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 700 डिग्री सेल्सियस पर भी इसके खराब होने या अपनी सीमा तक पहुंचने के कोई संकेत नहीं मिले। शोधकर्ताओं के अनुसार, 700 डिग्री केवल इसलिए चुना गया क्योंकि उनके परीक्षण उपकरण (Testing Equipment) इससे अधिक गर्म नहीं हो सकते थे। इसका मतलब है कि इस चिप की वास्तविक क्षमता इससे भी कहीं अधिक हो सकती है।
वर्तमान में उपयोग होने वाले अधिकांश सिलिकॉन-आधारित कंप्यूटर चिप्स 200°C के बाद काम करना बंद कर देते हैं । लेकिन यह नई चिप पिघले हुए लावा से भी अधिक तापमान को झेलने में सक्षम है, जो इस श्रेणी में पहले कभी हासिल नहीं किया गया।
वैज्ञानिकों ने इस नई चिप में ग्राफीन का इस्तेमाल किया। ग्राफीन और धातु (टंगस्टन) का रिश्ता बिल्कुल ‘तेल और पानी’ जैसा है । गर्मी पाकर जब धातु के छोटे-छोटे कण आगे बढ़ते हैं, तो ग्राफीन उन्हें रुकने की जगह ही नहीं देता । सहारा न मिलने के कारण वे वापस हट जाते हैं, जिससे शॉर्ट-सर्किट का खतरा ही खत्म हो जाता है ।
यह चिप सिर्फ गर्मी ही नहीं झेलती, बल्कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कामों को भी बहुत तेजी से करती है। यह चिप ‘ओम के नियम’ (Ohm’s Law) पर काम करती है, जिससे यह हिसाब-किताब चुटकियों में कर लेती है। सिस्टम के 92% काम यह चिप बहुत कम बिजली खर्च करके कर सकती है।
प्रोफेसर यांग ने TetraMem नाम का एक स्टार्टअप भी शुरू किया है ताकि इस तकनीक को आम लोगों तक पहुँचाया जा सके । उनके छात्र पहले से ही ऐसी चिप्स का इस्तेमाल मशीन लर्निंग के लिए कर रहे हैं ।
यह खोज शुक्र (Venus) जैसे गर्म ग्रहों पर भविष्य के मिशनों में यह तकनीक गेम-चेंजर साबित होगी। जेट इंजन के भीतर उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में सेंसर और डेटा स्टोरेज के लिए इसका उपयोग होगा। गहरे भू-तापीय (Geothermal) क्षेत्रों और परमाणु रिएक्टरों की निगरानी में यह चिप अत्यंत सहायक होगी। प्रोफेसर यांग और उनकी टीम ने इसमें ऐसी सामग्रियों और डिजाइन का उपयोग किया है जो परमाणु स्तर पर अत्यधिक गर्मी में भी स्थिर रहती हैं, जिससे डेटा सुरक्षित रहता है और गणनाएँ (Calculations) सटीक होती हैं।
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