ICAR-CIARI Blue Revolution in Andaman and Nicobar: मत्स्य पालन और समुद्री पारिस्थितिकी में आए बड़े बदलाव

Rajesh Pandey

ICAR-CIARI Blue Revolution in Andaman and Nicobar: श्री विजय पुरम (पोर्ट ब्लेयर), 2 अप्रैल 2026: ICAR- Central Island Agricultural Research Institute(ICAR-CIARI) ने वर्ष 2026 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च) में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के विकास और मत्स्य पालकों के उत्थान की दिशा में मील का पत्थर स्थापित किया है। संस्थान ने न केवल आधुनिक तकनीकों को धरातल पर उतारा है, बल्कि द्वीप की संवेदनशील पारिस्थितिकी और स्थानीय समुदायों के बीच एक प्रभावी तालमेल भी बनाया है।

ICAR-CIARI Blue Revolution in Andaman and Nicobar: संस्थान के मत्स्य विज्ञान प्रभाग (FSD) वर्तमान में द्वीप समूह में नीली क्रांति को विस्तार दे रहा है। नवीनतम उपलब्धियों में पी. वन्नामेई (P. vannamei) झींगे की बायोफ्लॉक तकनीक के माध्यम से सफल पैदावार और आंशिक कटाई शामिल है। इसके अलावा, संस्थान समुद्री शैवाल (Seaweed) की खेती, सजावटी मछलियों के समुद्री पालन (Mariculture) और केकड़ा पालन (Crab Fattening) जैसे उच्च-आय वाले क्षेत्रों में उद्यमियों को प्रशिक्षित कर रहा है।

ICAR–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (IISWC), देहरादून में लगभग तीन दशकों तक अपनी विशिष्ट सेवाएं देने के बाद, प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. एम. मुरुगानंदम 31 दिसंबर 2025 से ICAR–केन्द्रीय द्वीपीय कृषि अनुसंधान संस्थान (CIARI), पोर्ट ब्लेयर में मत्स्य विज्ञान प्रभाग के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

ICAR-CIARI Blue Revolution in Andaman and Nicobar: मत्स्य पालकों की सुविधा के लिए संस्थान में हाल ही में एक ‘पोर्टेबल कार्प हैचरी’ अनुसंधान सुविधा का उद्घाटन किया गया है। यह तकनीक दूरस्थ क्षेत्रों में मछली बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने में क्रांतिकारी साबित होगी। साथ ही, संस्थान ने स्थानीय स्तर पर ही ‘फिश फीड’ (मछली आहार) उत्पादन शुरू कर विदेशी निर्भरता को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

संस्थान ने हाल ही में ‘वन हेल्थ’ पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी की। इसमें “माउंटेन-टू-ओशन (M2O)” परिप्रेक्ष्य के माध्यम से जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और मत्स्य उत्पादन को एकीकृत करने पर जोर दिया गया। इसके अलावा, राष्ट्रीय रोग निगरानी कार्यक्रम (NSPAAD) के तहत राज्य के अधिकारियों को मछली रोगों और उनके बचाव की विस्तृत रणनीति साझा की गई।

ICAR-CIARI ने सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए शिक्षा और जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया है:

  • छात्र जागरूकता: 240 स्कूली छात्रों और शिक्षकों को जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति जागरूक किया गया।

  • मीडिया आउटरीच: पीआईबी (PIB) ने हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ के 112 मीडिया कर्मियों को तटीय जैव विविधता और मत्स्य पालन की संभावनाओं से रूबरू कराया।

  • कौशल विकास: 30 युवाओं को ‘जूनियर पैरा-टैक्सोनोमिस्ट’ और ‘इकोटूरिज्म गाइड’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया ताकि वे स्वरोजगार से जुड़ सकें।

संस्थान ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के प्रभावी क्रियान्वयन और मत्स्य नियमों के निर्धारण में राज्य सरकार को तकनीकी परामर्श प्रदान किया है। किसान मेला-2026 और ‘राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा कार्यशाला’ के माध्यम से सैकड़ों ‘एक्वाप्रिन्योर्स’ (मत्स्य उद्यमियों) को अगली पीढ़ी की फिश फार्मिंग के गुर सिखाए गए।

ICAR-CIARI की ये गतिविधियाँ दर्शाती हैं कि संस्थान केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंडमान-निकोबार के आदिवासी और कृषि समुदायों के सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और ‘आत्मनिर्भर द्वीप’ के सपने को साकार करने में मुख्य भूमिका निभा रहा है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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