ककरा क्रोकोडाइल ट्रेलः खतरनाक मगरमच्छों को पास से देख सकेंगे

Rajesh Pandey
  •  सीएम पुष्कर सिंह धामी ने ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल का शुभारंभ किया
खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को खटीमा स्थित तराई पूर्वी वन प्रभाग में ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल का शुभारंभ किया। उन्होंने अधिकारियों को मुख्य रोड से ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल को जोड़ने के लिए अति शीघ्र डीपीआर बनाने के निर्देश दिए। ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल एरिया में पार्क और कैंटीन का निर्माण जल्द करने को कहा गया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, सरकार स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ रही है। क्रोकोडाइल ट्रेल बनने से जहां क्रोकोडायल्स का प्राकृतिक वास संरक्षित होगा, वहीं पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इसकी स्थापना से रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी। इकोलॉजी एं इकोनामी दोनों को ही मदद मिलेगी। स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, होमस्टे के माध्यम से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। क्षेत्र में पर्यटकों को क्रोकोडाइल सफारी के साथ ही अच्छी हवा,जलवायु, वातावरण मिलेगा।
ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल – सुरई इको टूरिज्म जोन की पश्चिमी सीमा पर ककरा नाला स्थित है। यह नाला क्रोकोडाइल ( मार्श मगरमच्छ) का प्राकृतिक वास स्थल है। मीठे पानी के स्रोतों में पाई जाने वाली मगरमच्छ की यह प्रजाति भूटान और म्यांमार जैसे तमाम देशों में विलुप्त हो चुकी है। अंडे देने वाली यह प्रजाति बेहद खतरनाक मानी जाती है।
मौजूदा समय में इस नाले में 100 से अधिक मार्श मगरमच्छ हैं। पर्यटक इन मगरमच्छों का आसानी से दीदार कर सकें, इसके लिए चार किलोमीटर लम्बे नाले को चैनलिंग फेंसिंग करके ककरा क्रोकोडाइल ट्रेल के रूप में विकसित किया गया है। यह राज्य का पहला क्रोकोडाइल ट्रेल है। ट्रेल में तीन व्यू प्वाइंट और कई वॉच टावर बनाए गए हैं, ताकि मगरमच्छों का सुरक्षित तरीके से नजदीक से देखा जा सके।
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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