CreativityFeaturedTalent @ Tak Dhinaa Dhin

बदल मुकद्दर आगे बढ़कर 

बदल मुकद्दर आगे बढ़कर
नहीं डूबेगी तेरी नैया
जल भी तेरा, ताल भी तेरा
तू ही नदी औऱ तू ही समंदर
बदल मुकद्दर आगे बढ़कर

आशाओं के दीप जला दो
मुश्किलों के पहाड़ गला दो
धरती तेरी, माटी तेरी
तू ही धरा और तू ही अंबर
बदल मुकद्दर आगे बढ़कर

बदलाव का बिगुल बजा दो
चेहरों पर मुस्कान सजा दो
अस्त्र भी तेरे, शस्त्र भी तेरे
तू ही ढाल और तू ही खंजर
बदल मुकद्दर आगे बढ़कर

आंखों से तुम नमीं हटा लो
क्रूर काल का वार घटा दो
जल भी तेरा, थल भी तेरा
तू ही किनारा, तू ही भंवर
बदल मुकद्दर आगे बढ़कर

संकट में तुम मत घबराना
कांटों को तुम पुष्प बनाना
धूप भी तेरी, छांव भी तेरी
तू ही अंधेरा , तू ही रोशनी
बदल मुकद्दर आगे बढ़कर

Rajesh Pandey

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन किया। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते थे, जो इन दिनों नहीं चल रहा है। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन किया।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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