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IIT Jodhpur bacteria brain diseases: इलाज में बाधा बनने वाले हानिकारक बैक्टीरिया पर शोध कर रहा आईआईटी जोधपुर, बचा सकेंगे लाखों जिंदगियां

Rajesh Pandey
Last updated: September 16, 2025 8:30 pm
Rajesh Pandey
7 months ago
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सांकेतिक चित्र
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IIT Jodhpur bacteria brain diseases: जोधपुर,16 सितंबर 2025: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (आईआईटी जोधपुर) के वैज्ञानिक हानिकारक बैक्टीरिया और उनसे जुड़ी बीमारियों को समझने में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहे हैं, जो दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। बायोसाइंस और बायोइंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नेहा जैन के नेतृत्व में कार्यरत फंक्शनल एमीलॉइड बायोलॉजी लैब (Functional Amyloid Biology Lab) ऐसी कठिन स्वास्थ्य समस्याओं पर काम कर रही है, जिनमें इलाज न मानने वाले संक्रमण, मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियाँ और सूक्ष्म जीवों से जुड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम शामिल हैं।

IIT Jodhpur bacteria brain diseases

डॉ. जैन की टीम बैक्टीरिया द्वारा बनाए गए एमीलॉइड संरचनाओं पर शोध कर रही है। ये संरचनाएँ बैक्टीरिया को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं और उन्हें उपचार के लिए कठिन बना देती हैं। टीम इस पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि किस तरह नई प्रोटीन संरचनाओं और नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग कर इन संरचनाओं को रोककर इलाज आसान बनाया जा सकता है।

यह वीडियो भी देखें-

सीएसआईआर और आईसीएमआर द्वारा वित्तपोषित इस परियोजना के परिणाम उच्च प्रभाव वाले शोध पत्रों में समीक्षा के लिए भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा, टीम ने यह भी पाया है कि बैक्टीरिया की ये संरचनाएँ मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को कैसे सक्रिय कर सकती हैं और बीमारी की गंभीरता को बढ़ा सकती हैं। इस पहल का समर्थन इंटरनेशनल ब्रेन रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन ने किया है।

हाल ही में, टीम ने ऐसे नए एमीलॉइड अवरोधक (inhibitors) खोजे हैं जो न केवल बैक्टीरिया में बल्कि मानव शरीर में भी हानिकारक एमीलॉइड जमाव को रोक सकते हैं। मस्तिष्क में एमीलॉइड के जमा होने से अल्ज़ाइमर और पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारियाँ होती हैं। ये अवरोधक इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं, क्योंकि एक ही समाधान से दो बड़ी समस्याओं – संक्रमण और मस्तिष्क रोग – से निपटा जा सकता है।

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इस शोध का सबसे बड़ा लाभ यह है कि शुरुआती अवस्था में मस्तिष्क रोगों का पता लगाया जा सकता है, जो अभी तक इलाज में सबसे बड़ी चुनौती थी। लैब में किए गए प्रयोगों से यह भी पता चला है कि एमीलॉइड कैसे बनते हैं और बीमारी की शुरुआत कैसे होती है। यह जानकारी भविष्य में नई दवाओं और उपचार विधियों के विकास में मदद कर सकती है।

डॉ. नेहा जैन की टीम ने यह सुनिश्चित किया है कि शोध के परिणाम समाज तक आसानी से पहुँचें। टीम ऐसे किफायती उपकरणों और तकनीकों पर काम कर रही है, जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक भी पहुँचाया जा सके। अस्पतालों में संक्रमण की समस्या से राहत दिलाने के लिए विशेष सेंसर और सामुदायिक शिक्षा कार्यक्रम विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, विज्ञान जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को स्वच्छता और बेहतर जीवनशैली के बारे में शिक्षित किया जा रहा है। इस काम को जर्नल ऑफ माइक्रोबायोलॉजी एंड बायोलॉजी एजुकेशन में प्रकाशित भी किया गया है।

बैक्टीरिया अक्सर अपने चारों ओर चिपचिपी परतें (biofilms) बनाकर खुद को सुरक्षित करते हैं, जिससे इलाज कठिन हो जाता है। डॉ. जैन की टीम ऐसे तरीकों पर काम कर रही है जिससे ये परतें कमजोर हों और एंटीबायोटिक्स अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकें। यह शोध उन लोगों के लिए आशा की किरण है जो लंबे समय से चल रही और महंगी बीमारियों से जूझ रहे हैं।

टीम यह भी अध्ययन कर रही है कि हमारी आंत में मौजूद बैक्टीरिया मस्तिष्क की बीमारियों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय शोध केंद्रों के साथ सहयोग कर यह समझने का प्रयास हो रहा है कि बैक्टीरिया की संरचनाएँ किस तरह सूजन और बीमारी को बढ़ावा देती हैं। इससे जल्दी पहचान और उपचार संभव होगा।

डॉ. नेहा जैन का कहना है, “हमारा शोध केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। हमें विज्ञान को समाज की सेवा में लगाना है। हमारा उद्देश्य है कि उपचार किफायती, सुलभ और प्रभावी हो। हम ऐसी तकनीकें विकसित कर रहे हैं जो हर किसी की मदद कर सकें।”

डॉ. नेहा जैन के शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। उन्हें ईएमबीओ ग्लोबल इन्वेस्टिगेटर अवार्ड और आईएनएसए यंग एसोसिएट अवार्ड से सम्मानित किया गया है। यह मान्यता उनके कार्य के वैश्विक प्रभाव और समाज के लिए उपयोगिता को दर्शाती है।

आईआईटी जोधपुर का यह शोध विज्ञान और समाज के बीच एक मजबूत पुल का निर्माण कर रहा है। यह न केवल भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रहा है, बल्कि पूरी दुनिया में विज्ञान के उपयोग को आम लोगों तक पहुँचाने की मिसाल भी कायम कर रहा है।- साभार- पीआईबी

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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