सूर्य देव यश और वैभव के देवता हैं। रविवार को सूर्य का दिन माना जाता है। इनकी पूजा कर धन-धान्य, सुख-समृद्धि हासिल की जा सकती है। अगर आप अपनी आर्थिक परेशानियों से तंग आ गए हैं। लाख कोशिशों के बावजूद हाथ पैसा रुक नहीं रहा है और समाज में लोग आपको सम्मान की दृष्टि से नहीं देखते तो रविवार को किया गया ये उपाय आपको धन और सम्मान दोनों दिला सकता है। रविवार की रात सोते समय एक गिलास दूध भरकर अपने सिरहाने रखें और सो जाएं। गिलास रखते हुए इस बात का ख्याल रखें कि नींद में आपके हाथ से दूध गिरे नहीं।
सुबह उठकर नहाने के बाद इस दूध को ले जाकर किसी बबूल के पेड़ की जड़ में डाल दें। हर रविवार को यह उपाय करने से आपकी आर्थिक परेशानी दूर हो जाएगी और आपको सुख-समृद्धि हासिल होगी। रविवार का दिन सूर्य देव की पूजा स्तुति को समर्पित है। अगर आपके मन में कई सारी इच्छाएं और मनोकामनाएं है तो आप रविवार का व्रत कर सकते हैं। सूर्य देव का व्रत सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह व्रत सुख और शांति देता है।
अर्घ्यदान का विशेष महत्ता
पौराणिक धार्मिक ग्रंथों में भगवान सूर्य के अर्घ्यदान की विशेष महत्ता बताई गई है। प्रतिदिन प्रातकाल में तांबे के लोटे में जल लेकर और उसमें लाल फूल, चावल डालकर प्रसन्न मन से सूर्य मंत्र का जाप करते हुए भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर देनी चाहिए। इस अर्घ्यदान से भगवान सूर्य प्रसन्न होकर आयु, आरोग्य, धन, धान्य, पुत्र, मित्र, तेज, यश, विद्या, वैभव और सौभाग्य को प्रदान करते हैं।
सूर्य पूजा में करें इन नियमों का पालन
प्रतिदिन सूर्योदय से पहले ही शुद्ध होकर और स्नान से कर लेना चाहिए।
नहाने के बाद सूर्यनारायण को तीन बार अर्घ्य देकर प्रणाम करें।
संध्या के समय फिर से सूर्य को अर्घ्य देकर प्रणाम करें।
सूर्य के मंत्रों का जाप श्रद्धापूर्वक करें।
आदित्य हृदय का नियमित पाठ करें।
स्वास्थ्य लाभ की कामना, नेत्र रोग से बचने एवं अंधेपन से रक्षा के लिए ’नेत्रोपनिषद्’ का प्रतिदिन पाठ करना चाहिए।
रविवार को तेल, नमक नहीं खाना चाहिए तथा एक समय ही भोजन करना चाहिए।
सुख समृद्धि और यश मिलेगा सूर्य अराधना से

newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140
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