Featuredhealth

AIIMS Rishikesh: इस नंबर पर मिलेगी ट्रामा विभाग की पूरी जानकारी

ट्रॉमा हेल्प लाइन नम्बर 18001804278 पर कर सकते हैं संपर्क

ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा विभाग के हेल्प लाइन नम्बर पर अब विभाग में बेड की उपलब्धता की जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी। विभाग का यह नम्बर सप्ताह के सभी दिनों में 24 घन्टे कार्य करेगा।

आपदाओं और सड़क दुर्घटनाओं के अलावा ट्रॉमा से सम्बन्धित अन्य आपात स्थिति वाले मरीजों के इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश में आधुनिक तकनीक की मेडिकल सुविधाओं वाला विशेष ट्रॉमा विभाग संचालित है। इस विभाग में ऐसे सभी लोगों का उपचार किया जाता है जो आकस्मिकतौर से किसी दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए हों। एम्स संस्थान के ट्रॉमा विभाग में ऐसे लोगों के तत्काल इलाज के लिए आपात्कालीन सर्जरी और विभिन्न जांचों सहित सभी प्रकार की मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं।

अक्तूबर माह के दूसरे सप्ताह में विश्व ट्रॉमा -डे पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) गुरमीत सिंह ने एम्स के ट्रॉमा विभाग के ट्रॉमा हेल्प लाइन नम्बर 18001804278 का ई-उद्घाटन किया था। ट्रॉमा विभाग के उक्त मेडिकल हेल्प लाइन नम्बर पर शुरुआत में सीमित जानकारियां ही उपलब्ध हो पा रही थीं, लेकिन अब इस नम्बर पर मरीज के इलाज से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं।

एम्स के ट्रॉमा सर्जन डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि उक्त हेल्प लाइन नम्बर के 24 घंटे संचालन के लिए पर्याप्त संख्या में स्टाफ की व्यवस्था कर दी गई है। विभाग का प्रयास है कि आपात स्थिति में फोन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इलाज से सम्बन्धित सभी वांछित जानकारियां समय पर उपलब्ध कराई जाएं।

डॉ. उनियाल ने कहा कि एम्स की ट्रॉमा बिल्डिंग से संचालित होने वाली इस सेवा के माध्यम से इलाज के दौरान और इलाज के बाद भी मरीज की मेडिकल संबंधित आवश्यक जानकारी हासिल की जा सकती है। इसके अलावा इस नम्बर से ट्रॉमा विभाग में मरीज की सर्जरी की डेट, ओपीडी सम्बन्धित जानकारियां और विभाग के वार्ड में बेड की उपलब्धता भी बताई जाएगी। ताकि दूर-दराज से फोन करने वाले व्यक्ति को एम्स के ट्रॉमा विभाग से जुड़ी आवश्यक जानकारियों के लिए अनावश्यक समस्या का सामना न करना पड़े।

newslive24x7

राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button