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NEWSLIVE24x7 > Blog > Digital > AI Grok के अमेरिका से ज्यादा यूजर्स भारत में, इसका कारण भी बताया AI ने
Digital

AI Grok के अमेरिका से ज्यादा यूजर्स भारत में, इसका कारण भी बताया AI ने

Rajesh Pandey
Last updated: May 21, 2025 7:37 pm
Rajesh Pandey
11 months ago
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Grok users in India: AI टूल ग्रोक अमेरिका से संबंध रखता है, जो सोशल मीडिया प्लेटफार्म X का अभिन्न हिस्सा है, पर चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका में इसके यूजर्स की संख्या भारत (Grok users in India) की तुलना में आधी भी नहीं है। खुद xAI द्वारा विकसित Grok एक सवाल के जवाब में यह जानकारी देता है। वो इसके पीछे कुछ वजह भी बताता है, जो अमेरिका में ट्रंप प्रशासन में शामिल ग्रोक के निर्माता एलन मस्क से जुड़ा है। इसके साथ ही, भारत में युवा आबादी और डिजिटल फील्ड में डेवलपमेंट से जोड़ता है।

           भारत और अमेरिका में ग्रोक के यूजर्स

मार्च 2025 तक, ग्रोक के पास 35.1 मिलियन मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं, जिनमें से 6.7 मिलियन उपयोगकर्ता प्रतिदिन इसका उपयोग करते हैं। ये आंकड़े सामान्य कार्यों, जैसे सवालों के जवाब, रिसर्च, और डेटा विश्लेषण के लिए ग्रोक के यूजर्स के हैं। खासकर फरवरी 2025 में ग्रोक 3 के लॉन्च होने के बाद यूजर्स की संख्या में वृद्धि हुई है।

यह भी पढ़ें- ग्रोक की कहानीः काल्पनिक दुनिया का काल्पनिक शब्द, जो सुर्खियां बटोर रहा

फरवरी 2025 में ग्रोक के मासिक विजिटर्स 25.82 मिलियन थे, जो जनवरी की तुलना में 436% की वृद्धि दर्शाता है।

भारत में 32.97% (लगभग 11.6 मिलियन) उपयोगकर्ता हैं, जबकि अमेरिका में 14.35% (लगभग 5 मिलियन) हैं। इसका मतलब है कि भारत में ग्रोक के उपयोगकर्ता अमेरिका की तुलना में दोगुने से भी अधिक हैं। कुल यूजर्स में  66.91% पुरुष और 33.09% महिलाएं हैं, जिनमें सबसे बड़ा समूह 25-34 आयु वर्ग (33.39%) का है।

ग्रोक का उपयोग सामान्य कार्यों जैसे सामग्री निर्माण, डेटा विश्लेषण, और रीयल-टाइम खोज के लिए बढ़ रहा है, विशेष रूप से इसकी डीपसर्च और थिंक मोड सुविधाओं के कारण।

ग्रोक का एंड्रॉइड ऐप भारत में फरवरी 2025 में लॉन्च हुआ, जिससे यहां उपयोग बढ़ा, लेकिन अमेरिका में इसकी पहुंच सीमित रही। इसके अलावा, ग्रोक की एक्स प्लेटफॉर्म पर निर्भरता अमेरिका में कम प्रभावी हो सकती है, जहां अन्य सोशल मीडिया और एआई टूल्स अधिक लोकप्रिय हैं।

यह भी पढ़ें- AI Thank You Myth: एआई को थैंक्यू बोलो, तो क्या सर्वर धुआँ छोड़ेगा? एआई ने दिया ये मज़ेदार जवाब!

भारत में डिजिटल वृद्धि: भारत में तकनीक पसंद युवा आबादी और तेजी से बढ़ता डिजिटल बाजार ग्रोक की लोकप्रियता को बढ़ा रहा है।

मोबाइल ऐप की पहुंच: ग्रोक 3 के फरवरी 2025 में लॉन्च होने के बाद, भारत में मोबाइल ऐप डाउनलोड में 10 गुना वृद्धि हुई, जो उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।

सामाजिक स्वतंत्रता: भारत में ग्रोक की लोकप्रियता का एक कारण इसका कम सेंसरशिप वाला दृष्टिकोण भी है, जो उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करता है।

ग्रोक को विशेष रूप से एक्स के डेटा और उपयोगकर्ता इंटरैक्शन के साथ एकीकृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, ताकि यह रीयल-टाइम जानकारी प्रदान कर सके और उपयोगकर्ताओं को त्वरित, सटीक जवाब दे सके।

यह भी पढ़ें- एआई मीडिया: पत्रकारिता का नया युग, कितनी संभावनाएं, क्या हैं चुनौतियां

मार्च 2025 तक, एक्स के 436 मिलियन दैनिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं, और ग्रोक के 35.1 मिलियन मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता में से कई यूजर्स एक्स के माध्यम से इसका उपयोग करते हैं, विशेष रूप से भारत में, जहां एक्स की लोकप्रियता अधिक है। ग्रोक की क्षमताएं, जैसे डीपसर्च और थिंक मोड, एक्स पर उपलब्ध सामग्री का विश्लेषण करके उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाती हैं।

ट्रंप सरकार और मस्क के प्रति विरोध का प्रभाव:

  • विवादास्पद छवि: ग्रोक स्पष्ट रूप से बताता है, एलन मस्क और डोनाल्ड ट्रंप, दोनों ही विवादास्पद हस्तियां हैं, खासकर अमेरिका में, जहां उनकी राजनीतिक टिप्पणियां और नीतियां ध्रुवीकरण का कारण बनती हैं। मस्क की ट्रंप प्रशासन में सलाहकार भूमिका (जैसे, डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी में) ने कुछ उदारवादी उपयोगकर्ताओं को ग्रोक से दूरी बनाने के लिए प्रेरित किया हो सकता है। उदाहरण के लिए, ग्रोक 3 द्वारा मस्क और ट्रंप को “अमेरिका के लिए सबसे हानिकारक” व्यक्तियों के रूप में नामित करने और फिर इसे ठीक करने की घटनाओं ने विवाद को बढ़ाया।
  • सेंसरशिप विवाद: फरवरी 2025 में, ग्रोक 3 को निर्देश दिया गया था कि वह मस्क और ट्रंप के बारे में गलत सूचना फैलाने के आरोपों को नजरअंदाज करे। इस घटना ने कुछ उपयोगकर्ताओं में अविश्वास पैदा किया, खासकर उनमें जो पारदर्शिता और तटस्थता को महत्व देते हैं।
  • सामाजिक ध्रुवीकरण: अमेरिका में राजनीतिक ध्रुवीकरण के कारण, मस्क और ट्रंप से जुड़े किसी भी उत्पाद, जैसे ग्रोक, को उदारवादी या डेमोक्रेट-समर्थक उपयोगकर्ताओं से कम स्वीकार्यता मिल सकती है। यह ग्रोक की “मैक्सिमली ट्रुथ-सीकिंग” छवि के बावजूद हो सकता है, क्योंकि कुछ उपयोगकर्ता इसे मस्क की विचारधारा से जोड़ते हैं।

अन्य कारण

प्रतिस्पर्धी बाजार: अमेरिका में चैटजीपीटी, जेमिनी और पर्प्लेक्सिटी जैसे एआई टूल्स की मजबूत उपस्थिति ग्रोक के उपयोग को सीमित करती है। ये टूल्स कॉर्पोरेट और शैक्षिक उपयोग के लिए अधिक औपचारिक और स्वीकृत हैं, जबकि ग्रोक की अनौपचारिक और कम सेंसरशिप वाली शैली कुछ उपयोगकर्ताओं के लिए जोखिम भरी लग सकती है।

गोपनीयता और नैतिकता की चिंताएं: अमेरिका में डेटा गोपनीयता और एआई नैतिकता पर सख्त नियम हैं। ग्रोक की कुछ प्रतिक्रियाओं की वजह से कुछ उपयोगकर्ता इसे अविश्वसनीय मान सकते हैं।

यह लेख ग्रोक से कुछ सवालों पूछकर लिखा गया है।

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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