खरगोश और लोमड़ी की दोस्ती

Rajesh Pandey
Friend of The Rabbit

एक शाम एक खरगोश मस्त होकर टहल रहा था। वह हल्की हवा का आनंद लेते हुए प्रकृति का आभार जता रहा था। अचानक उसने एक लोमड़ी की अपनी तरफ आते देखा। खरगोश डर गया और भागने लगा, लेकिन लोमड़ी उसके पास आ गई और कहा, दोस्त मुझसे मत डरो। मैं तुम्हारी दोस्त बनना चाहती हूं। मैं आपको नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी।”

लोमड़ी ने ऐसी मीठी बात की कि जल्द ही खरगोश उसके जाल में फंस गया। अब तो रोजाना वह लोमड़ी से मिलने लगा। दोनों गहरे दोस्त हो गए।

एक दिन लोमड़ी ने दोपहर के भोजन के लिए खरगोश को अपने घर पर आमंत्रित किया। खरगोश अपना सबसे शानदार सूट पहनकर तैयार हुआ और लोमड़ी के घर पर पहुंच गया।

लोमड़ी ने खरगोश का गर्मजोशी से स्वागत किया और फिर उसके सामने गाजर का रस पेश किया। खरगोश काफी खुश हो गया और रस पीने के बाद भी वह भूखा था।

उन्होंने लोमड़ी से पूछा, “दोस्त, क्या अभी तक लंच नहीं खाया है? लोमड़ी मुस्कुराई और कहा, “मेरा लंच तैयार है क्योंकि मैं दोपहर में कच्चा भोजन करती हूं।”

इतना कहते ही लोमड़ी ने छलांग लगाकर खरगोश को पकड़ा और लंच कर लिया। कहानी संदेश देती है- धूर्त लोगों से दूरी बनाकर रखो, वो तुम्हारे दोस्ते कभी नहीं हो सकते।

 

 

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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