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वीडियोः टापू पर सोए थे, अचानक बाढ़ आ गई, ऐसे चला रेस्क्यू

हरिद्वार। हरिद्वार के श्यामपुर में पीली नदी पर पुल निर्माण में लगे चार मजदूर रात को टापू पर सो रहे थे। रात को बारिश से नदी में बाढ़ आ गई और मजदूर टापू में फंस गए। नदी का जल स्तर लगातार बढ़ने से उनकी जान पर संकट आ गया।

सूचना मिलते ही श्यामपुर थाना पुलिस सक्रिय हो गई। मौके पर टीम के साथ पहुंचे श्यामपुर थानाध्यक्ष अनिल चौहान ने एसडीआरएफ एवं कंट्रोल रूम को सूचना दे दी। लेकिन समय की कमी थी, क्योंकि जलस्तर लगातार बढ़ रहा था।

पुलिस ने स्वयं एनएचएआई की क्रेन मंगाकर सभी श्रमिकों को सकुशल नदी से बाहर निकाल लिया। लोगों ने पुलिस के इस रेस्क्यू अभियान की सराहना की।

जिन मजदूरों को रेस्क्यू किया गया, उनमें सरजीत खान पुत्र शब्बीर खान निवासी खतौला बरेली, सलमान पुत्र अख्तर खान निवासी नगरिया बरेली,फिरोज पुत्र मौसम खान निवासी खतौला बरेली तथा शोएब पुत्र हसनैन निवासी नगरिया बरेली (उत्तर प्रदेश) शामिल हैं। 

पुलिस ने बारिश के मौसम में नदी पर नहीं जाने और रात को नदियों से से दूर रहने की अपील की है। नदी किनारे सभी गांवों में एनाउंसमेंट भी कराया गया है, ताकि नदी पार कोई न जाए और नदी के पास, जिनके घर एवं आश्रय स्थल हैं, वो भी नदी से दूर रहें, सतर्क रहें।

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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