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जम्मू की ‘पल्ली’ ग्राम पंचायत को मिलने जा रहा यह खिताब

‘ग्राम ऊर्जा स्वराज’ कार्यक्रम के तहत पहली कार्बन तटस्थ पंचायत बनेगा पल्ली

म्मू क्षेत्र के सांबा जिले की पल्ली पंचायत में 340 घरों को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जम्मू यात्रा के दौरान सौर ऊर्जा का उपहार मिलने जा रहा है। पल्ली में 500 केवी क्षमता का सौर संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इससे पल्ली पंचायत के घरों को स्वच्छ बिजली और प्रकाश मिल सकेगा, जो इसे भारत सरकार के ‘ग्राम ऊर्जा स्वराज’ कार्यक्रम के तहत पहली कार्बन तटस्थ पंचायत बना देगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वक्तव्य में इसकी जानकारी प्रदान की गई है। राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 24 अप्रैल को मनाया जाएगा।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के अंतर्गत भारत सरकार का उद्यम सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) 20 दिन के रिकॉर्ड समय में पल्ली में ग्राउंड माउंटेड सोलर पावर (GMSP) संयंत्र स्थापित कर रहा है। जम्मू की पल्ली पंचायत को इस वर्ष पंचायती राज दिवस समारोह के लिए चुना गया है। राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर आगामी 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू के पल्ली गांव से देशभर की पंचायतों को वर्चुअल रूप से संबोधित करेंगे।

इस अवसर पर,  किसानों, सरपंचों तथा ग्राम प्रधानों को उनकी आय और उनके गांव में कृषि उपज में सुधार करने में सक्षम बनाने के लिए नवीनतम नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी लगाई जा रही है। इस प्रदर्शनी में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के विषयों के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी को एकीकृत रूप से प्रदर्शित करने पर बल दिया जा रहा है। यहां ऐसी नई प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो ग्रामीण विकास का माध्यम बन सकती हैं और किसानों की आय में वृद्धि करने में मददगार हो सकती हैं।

ग्रामीण विकास एवं किसानों के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, किसानों के उपयोग के लिए पांच दिनों के मौसम पूर्वानुमान में मददगार एप, ‘बैंगनी क्रांति’ के रूप में प्रसिद्ध लैवेंडर की खेती, किसानों की आय में वृद्धि के लिए सेब उत्पादन बढ़ाने के लिए जैव प्रौद्योगिकी नवाचार, कीटनाशक छिड़काव तथा अपशिष्ट उपचार के लिए ड्रोन उपयोग, और परमाणु विकिरण के माध्यम से फलों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने जैसी प्रौद्योगिकियों को इस प्रदर्शनी में शामिल किए जाने की योजना है।

इस आयोजन से जुड़ी तैयारियों को लेकर हाल में नई दिल्ली में एक शीर्ष बैठक में विचार-विमर्श किया गया। बैठक में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह उपस्थित थे।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्रालय के अलावा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), अंतरिक्ष विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग, और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय सहित भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि गरीबी एवं उन्नत आजीविका वाले गांव, स्वस्थ गांव, बाल-सुलभ गांव, पर्याप्त पानी वाले गांव, स्वच्छ और हरे-भरे गांव, बुनियादी ढांचों से परिपूर्ण आत्मनिर्भर गांव प्रदर्शनी की विषयवस्तु में प्रमुखता से शामिल हैं। आधुनिक प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप के माध्यम से कृषि और ग्रामीण उत्थान इस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण होगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बेहतरीन कृषि पद्धतियों का प्रदर्शन करने वाले स्टॉल प्रदर्शनी में शामिल किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीबीटी की बायो-टेक किसान योजना से लेकर खेती में ड्रोन उपयोग के साथ-साथ केंद्र सरकार तथा केंद्र शासित प्रदेश सरकार के किसानों के कल्याण से संबंधित अभिनव नवाचारों को प्रदर्शनी में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अरोमा मिशन और ‘बैंगनी क्रांति’, फ्लोरीकल्चर मिशन, बाँस के आधुनिक उपयोग, अपशिष्ट जल प्रबंधन को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल भी लगाए जाएंगे।

साभार- इंडिया साइंस वायर

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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