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सर्वश्रेष्ठ अखबार बनाकर संपादक बनीं श्रृष्टि और हिमानी

ऋषिकेश। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, ऋषिकेश ने विश्व पर्यावरण दिवस पर कक्षा 5 से 12 के विद्यार्थियों के लिए आयोजित अखबार बनाओ, संपादक बनो ऑनलाइन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित कर दिए। इसमें जूनियर वर्ग में श्रृष्टि रतूड़ी तथा सीनियर वर्ग में हिमानी भट्ट विजेता घोषित किए गए। प्रतियोगिता में 11 विद्यालयों के 166 बच्चे शामिल हुए।

संस्था के जिला संयोजक,उत्तराखंड प्रांत हेमंत गुप्ता ने बताया कि प्रतियोगिता का उद्देश्य आम जन-मानस व छात्र-छात्राओं को पर्यावरण सरंक्षण के प्रति जागरूक करना है। प्रतियोगिता के आयोजन में देवेंद्र सकलानी,दीवान सिंह रावत,रमेश रावत,राजेन्द्र पांडेय,पूनम अनेजा, विपिन सकलानी ने सहयोग प्रदान किया।

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में प्रबोध उनियाल,,राजेश चंद्र,विनोद जुगरान,ऋतु शर्मा व संगीता कुकरेती शामिल थे। लॉकडाउन खुलने तथा स्थिति सामान्य होने पर सम्मान समारोह में विजेता छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

प्रतियोगिता के विजेता इस प्रकार हैं-

जूनियर वर्ग (कक्षा पाँच से आठ)

1. श्रृष्टि रतूड़ी, कक्षा 6, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज आवास विकास, ऋषिकेश
2. गौरी केरवान कक्षा 6, केंद्रीय विद्यालय आईडीपीएल
3. किशन श्रीवास्तव कक्षा 8, ऋषिकेश पब्लिक स्कूल
4. प्रिया भट्ट कक्षा 8, शिवालिक भागीरथी पब्लिक, स्कूल श्यामपुर
5. प्रेरणा डबराल कक्षा 6, केंद्रीय विद्यालय आईडीपीएल

सीनियर वर्ग (कक्षा 9 से 12)

1. हिमानी भट्ट कक्षा 9, शिवालिक भागीरथी पब्लिक स्कूल ,श्यामपुर
2. भावना पयाल कक्षा 9, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, आवास विकास
3. भूमिका डोभाल 10,सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज ,आवास विकास
4. वैष्णवी बग्याल 10,राजकीय बालिका इंटर कालेज, ऋषिकेश
5. अमन ठाकुर 11, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज ,आवास विकास

Key Words:- Environment, Competition, Schools in Rishikesh, Make an newspaper, Be Editor, Rishikesh 

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राजेश पांडेय, देहरादून (उत्तराखंड) के डोईवाला नगर पालिका के निवासी है। पत्रकारिता में  26 वर्ष से अधिक का अनुभव हासिल है। लंबे समय तक हिन्दी समाचार पत्रों अमर उजाला, दैनिक जागरण व हिन्दुस्तान में नौकरी की, जिनमें रिपोर्टिंग और एडिटिंग की जिम्मेदारी संभाली। 2016 में हिन्दुस्तान से मुख्य उप संपादक के पद से त्यागपत्र देकर बच्चों के बीच कार्य शुरू किया।   बच्चों के लिए 60 से अधिक कहानियां एवं कविताएं लिखी हैं। दो किताबें जंगल में तक धिनाधिन और जिंदगी का तक धिनाधिन के लेखक हैं। इनके प्रकाशन के लिए सही मंच की तलाश जारी है। बच्चों को कहानियां सुनाने, उनसे बातें करने, कुछ उनको सुनने और कुछ अपनी सुनाना पसंद है। पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।  अपने मित्र मोहित उनियाल के साथ, बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से डेढ़ घंटे के निशुल्क स्कूल का संचालन कर रहे हैं। इसमें स्कूल जाने और नहीं जाने वाले बच्चे पढ़ते हैं। उत्तराखंड के बच्चों, खासकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए डुगडुगी नाम से ई पत्रिका का प्रकाशन करते हैं।  बाकी जिंदगी की जी खोलकर जीना चाहते हैं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता - बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक और एलएलबी, मुख्य कार्य- कन्टेंट राइटिंग, एडिटिंग और रिपोर्टिंग

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