डुग डुगी जुलाई 2020

Rajesh Pandey
यह भी एक दौर है। वह भी एक दौर था जब बच्चे दौड़ते थे, उनके हिस्से में बड़े-बड़े आंगन होते थे। दादा दादी, नाना नानी की किस्से कहानियां होती थी। मां के पास भी वक्त था कि वह बच्चे को सुलाते हुए कोई लोरी गाए या कोई परी कथा सुनाए।

DUG DUGI JUNE 2020 

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यह भी एक दौर है। वह भी एक दौर था जब बच्चे दौड़ते थे, उनके हिस्से में बड़े-बड़े आंगन होते थे। दादा दादी, नाना नानी की किस्से कहानियां होती थी। मां के पास भी वक्त था कि वह बच्चे को सुलाते हुए कोई लोरी गाए या कोई परी कथा सुनाए।DUG DUGI JULY 2020अफसोस है कि आज उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं…! हम लगातार उसको इस बात का एहसास करा रहे हैं कि समय दौड़ रहा है और वह जैसे स्थिर है। उसमें बचपन गुमशुदा है, वह गुमसुम सा है।बस्ते का बोझ उसकी कमर को सीधा ही नहीं होने देता। वह बेचारा क्या करें ? आंखों पर चश्मा चढ़ा है, पढ़ाई के दबाव में बच्चा दबा पड़ा है। दरअसल हम बहुत जल्दी उसको बड़ा बना देना चाहते हैं। समय से भी आगे उसको बड़ा देखना चाहते हैं। लेकिन इस बीच उसका बचपन रोज खोता जा रहा है।आओ कुछ ऐसा करें कि उसका बचपन उसको लौटा दें एक खिलख़िलाहट उसके चेहरे पर हो, उसके ओठों पर हंसी तैरती हो। बच्चा बच्चा लगे ,मासूम सा प्यारा सा…।DUG DUGI JULY 2020
DUG DUGI JULY 2020
अफसोस है कि आज उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं…! हम लगातार उसको इस बात का एहसास करा रहे हैं कि समय दौड़ रहा है और वह जैसे स्थिर है। उसमें बचपन गुमशुदा है, वह गुमसुम सा है।
बस्ते का बोझ उसकी कमर को सीधा ही नहीं होने देता। वह बेचारा क्या करें ? आंखों पर चश्मा चढ़ा है, पढ़ाई के दबाव में बच्चा दबा पड़ा है। दरअसल हम बहुत जल्दी उसको बड़ा बना देना चाहते हैं। समय से भी आगे उसको बड़ा देखना चाहते हैं। लेकिन इस बीच उसका बचपन रोज खोता जा रहा है।
आओ कुछ ऐसा करें कि उसका बचपन उसको लौटा दें एक खिलख़िलाहट उसके चेहरे पर हो, उसके ओठों पर हंसी तैरती हो। बच्चा बच्चा लगे ,मासूम सा प्यारा सा…।
DUG DUGI JULY 2020
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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