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सांस रोक कर रखने का अभ्यास करें, अपने फेफड़ों को स्वस्थ बनाएं

Rajesh Pandey
Last updated: May 19, 2021 9:09 pm
Rajesh Pandey
5 years ago
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कोविड-19 की दूसरी लहर में पूरक ऑक्सीजन की मांग में भारी वृद्धि देखने को मिली है। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल के अनुसार, दूसरी लहर में श्वासहीनता सर्वाधिक सामान्य लक्षण है, जिससे ऑक्सीजन की अधिक आवश्यकता पड़ती है।
इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट सर्जरी के अध्यक्ष, मेदांता फाउंडर तथा लंग्स केयर फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. अरविन्द कुमार ने बताया कि कोविड-19 के 90 प्रतिशत मरीज फेफड़े में तकलीफ का अनुभव करते हैं, लेकिन क्लीनिकल रूप में यह महत्वपूर्ण नहीं है। 10-12 प्रतिशत लोगों में निमोनिया विकसित हो जाता है, यह फेफड़े का संक्रमण होता है, जिसमें फेफड़े की छोटी-छोटी हवा की जगहें, जिन्हें एल्वियोली कहा जाता है, संक्रमित हो जाती हैं।
कम अनुपात में कोविड-19 के मरीजों को ऑक्सीजन के सहारे की जरूरत तब पड़ती है, जब सांस लेने में कठिनाई गंभीर रूप ले लेती है।
सांस रोक कर रखने का अभ्यास, एक ऐसी तकनीक है जो मरीज की ऑक्सीजन आवश्यकता को कम कर सकती है और उन्हें अपनी स्थिति की निगरानी करने में मदद दे सकती है।
सांस रोक कर रखने का अभ्यास कैसे सहायक है
डॉ. अरविन्द का कहना है कि यह अभ्यास उन मरीजों के लिए बहुत ही लाभकारी है, जिनमें हल्का लक्षण है। यदि ऐसे मरीज सांस रोक कर रखने का अभ्यास करते हैं तो उन्हें पूरक ऑक्सीजन की आवश्यकता की संभावना कम रह जाती है।
इस अभ्यास को मरीज की स्थिति देखने के लिए जांच के रूप में किया जा सकता है। यदि सांस रोक कर रखने के समय में कमी होने लगती है तो यह पूर्व चेतावनी का संकेत है और मरीज को अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
दूसरी ओर, यदि मरीज सांस रोक कर रखने के समय में धीरे-धीरे वृद्धि करने में सक्षम होता है तो यह सकारात्मक संकेत है।
अस्पताल में दाखिल मरीज और होम ऑक्सीजन पर डिस्चार्ज किए गए मरीज भी डॉक्टर की सलाह से इस अभ्यास को कर सकते हैं। इससे उनकी ऑक्सीजन आवश्यकता कम करने में मदद मिल सकती है।
स्वस्थ व्यक्ति भी सांस रोक कर रखने का अभ्यास कर सकते हैं। यह अभ्यास उन्हें  अपने फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करेगा।
सांस रोक कर रखने का अभ्यास कैसे करें
  • सीधा बैठें और अपने हाथों को जांघों पर रखें।
  • अपना मुंह खोलें और सीने में जितना अधिक वायु भर सकते हैं भरें।
  • अपने होठों को कस कर बंद कर लें।
  • अपनी सांस को जितना अधिक समय तक रोक कर रख सकते हैं रोकें।
  • जांचें कि आप कितने समय तक अपनी सांस रोक कर रख सकते हैं।
  • मरीज एक घंटे में एक बार यह अभ्यास कर सकते हैं और धीरे-धीरे प्रयास करके सांस रोक कर रखने का समय बढ़ा सकते हैं। 25 सेकेंड और उससे अधिक समय तक सांस रोक कर रखने वाले व्यक्ति को सुरक्षित माना जाता है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ज्यादा जोर न लगे और इस प्रक्रिया में थकान न हो जाए।
संक्रमण का शीघ्र पता लगाना महत्वपूर्ण
हम जानते हैं कि कोविड-19 का सबसे बड़ा असर हमारे फेफड़ों पर पड़ता है , इस कारण श्वासहीनता होती है और ऑक्सीजन के स्तर में कमी आ जाती है।
डॉ. अरविन्द बताते हैं कि पहली लहर में सबसे अधिक लक्षण बुखार और कफ था।
दूसरी लहर में दूसरे किस्म के लक्षण दिख रहे हैं , जैसे गले में खराश , नाक बहना, आंखों में लाली, सिरदर्द,शरीर में दर्द, चकते, मतली, उल्टी, दस्त; और मरीज को बुखार का अनुभव तीन-चार दिनों के बाद होता है।
तब मरीज जांच के लिए जाता है और इसकी पुष्टि में भी समय लगता है। इसलिए कोविड-19 की पुष्टि होने तक संक्रमण पांच से छह दिन पुराना हो जाता है तथा कुछ विशेष मामलों में फेफड़े पहले ही प्रभावित हो जाते हैं।
डॉ. अरविन्द कहते हैं कि फेफड़ों के चपेट में आने वाले कारकों में आयु, वजन, फेफड़े की वर्तमान स्थिति , मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग ,एचआईवी संक्रमण, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, धूम्रपान की आदत, कैंसर इलाज का इतिहास तथा स्टेरॉयड का इस्तेमाल हैं।

Key words:-How Breath Holding Exercise Helps, Oxygen demand, COVID-19, Corona Infection, Dr. Arvind Kumar, Institute of Chest Surgery, Medanta Founder, Lung Care Foundation, Pulmonary alveolus,  Breath Holding Exercise, सांस रोक कर रखने का अभ्यास कैसे करें, कोविड वैक्सीनेशन की स्थिति, कोविड वैक्सीन लगाने का रजिस्ट्रेशन, फेफड़ों की जांच कैसे करें, इम्युनिटी कैसे बढ़ाएं, फेफड़ों को मजबूत कैसे करें

Contents
कोविड-19 की दूसरी लहर में पूरक ऑक्सीजन की मांग में भारी वृद्धि देखने को मिली है। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल के अनुसार, दूसरी लहर में श्वासहीनता सर्वाधिक सामान्य लक्षण है, जिससे ऑक्सीजन की अधिक आवश्यकता पड़ती है।इंस्टीट्यूट ऑफ चेस्ट सर्जरी के अध्यक्ष, मेदांता फाउंडर तथा लंग्स केयर फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. अरविन्द कुमार ने बताया कि कोविड-19 के 90 प्रतिशत मरीज फेफड़े में तकलीफ का अनुभव करते हैं, लेकिन क्लीनिकल रूप में यह महत्वपूर्ण नहीं है। 10-12 प्रतिशत लोगों में निमोनिया विकसित हो जाता है, यह फेफड़े का संक्रमण होता है, जिसमें फेफड़े की छोटी-छोटी हवा की जगहें, जिन्हें एल्वियोली कहा जाता है, संक्रमित हो जाती हैं।कम अनुपात में कोविड-19 के मरीजों को ऑक्सीजन के सहारे की जरूरत तब पड़ती है, जब सांस लेने में कठिनाई गंभीर रूप ले लेती है।सांस रोक कर रखने का अभ्यास, एक ऐसी तकनीक है जो मरीज की ऑक्सीजन आवश्यकता को कम कर सकती है और उन्हें अपनी स्थिति की निगरानी करने में मदद दे सकती है।सांस रोक कर रखने का अभ्यास कैसे सहायक हैडॉ. अरविन्द का कहना है कि यह अभ्यास उन मरीजों के लिए बहुत ही लाभकारी है, जिनमें हल्का लक्षण है। यदि ऐसे मरीज सांस रोक कर रखने का अभ्यास करते हैं तो उन्हें पूरक ऑक्सीजन की आवश्यकता की संभावना कम रह जाती है।इस अभ्यास को मरीज की स्थिति देखने के लिए जांच के रूप में किया जा सकता है। यदि सांस रोक कर रखने के समय में कमी होने लगती है तो यह पूर्व चेतावनी का संकेत है और मरीज को अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।दूसरी ओर, यदि मरीज सांस रोक कर रखने के समय में धीरे-धीरे वृद्धि करने में सक्षम होता है तो यह सकारात्मक संकेत है।अस्पताल में दाखिल मरीज और होम ऑक्सीजन पर डिस्चार्ज किए गए मरीज भी डॉक्टर की सलाह से इस अभ्यास को कर सकते हैं। इससे उनकी ऑक्सीजन आवश्यकता कम करने में मदद मिल सकती है।स्वस्थ व्यक्ति भी सांस रोक कर रखने का अभ्यास कर सकते हैं। यह अभ्यास उन्हें  अपने फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करेगा।सांस रोक कर रखने का अभ्यास कैसे करेंसीधा बैठें और अपने हाथों को जांघों पर रखें।अपना मुंह खोलें और सीने में जितना अधिक वायु भर सकते हैं भरें।अपने होठों को कस कर बंद कर लें।अपनी सांस को जितना अधिक समय तक रोक कर रख सकते हैं रोकें।जांचें कि आप कितने समय तक अपनी सांस रोक कर रख सकते हैं।मरीज एक घंटे में एक बार यह अभ्यास कर सकते हैं और धीरे-धीरे प्रयास करके सांस रोक कर रखने का समय बढ़ा सकते हैं। 25 सेकेंड और उससे अधिक समय तक सांस रोक कर रखने वाले व्यक्ति को सुरक्षित माना जाता है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ज्यादा जोर न लगे और इस प्रक्रिया में थकान न हो जाए।संक्रमण का शीघ्र पता लगाना महत्वपूर्णहम जानते हैं कि कोविड-19 का सबसे बड़ा असर हमारे फेफड़ों पर पड़ता है , इस कारण श्वासहीनता होती है और ऑक्सीजन के स्तर में कमी आ जाती है।डॉ. अरविन्द बताते हैं कि पहली लहर में सबसे अधिक लक्षण बुखार और कफ था।दूसरी लहर में दूसरे किस्म के लक्षण दिख रहे हैं , जैसे गले में खराश , नाक बहना, आंखों में लाली, सिरदर्द,शरीर में दर्द, चकते, मतली, उल्टी, दस्त; और मरीज को बुखार का अनुभव तीन-चार दिनों के बाद होता है।तब मरीज जांच के लिए जाता है और इसकी पुष्टि में भी समय लगता है। इसलिए कोविड-19 की पुष्टि होने तक संक्रमण पांच से छह दिन पुराना हो जाता है तथा कुछ विशेष मामलों में फेफड़े पहले ही प्रभावित हो जाते हैं।डॉ. अरविन्द कहते हैं कि फेफड़ों के चपेट में आने वाले कारकों में आयु, वजन, फेफड़े की वर्तमान स्थिति , मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग ,एचआईवी संक्रमण, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, धूम्रपान की आदत, कैंसर इलाज का इतिहास तथा स्टेरॉयड का इस्तेमाल हैं।

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TAGGED:Breath Holding ExerciseCorona infectionCOVID-19Dr. Arvind KumarHow Breath Holding Exercise HelpsInstitute of Chest SurgeryLung Care FoundationMedanta FounderOxygen demandPulmonary alveolusइम्युनिटी कैसे बढ़ाएंकोविड वैक्सीन लगाने का रजिस्ट्रेशनकोविड वैक्सीनेशन की स्थितिफेफड़ों की जांच कैसे करेंफेफड़ों को मजबूत कैसे करेंसांस रोक कर रखने का अभ्यास कैसे करें
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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