अब तक 32 बच्चों का चिन्हीकरण, 22 बच्चों का आरबीएसके के तहत चल रहा उपचार
आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे का उपचार प्रभावित नहीं होगाः डीएम
देहरादून, 26 सितंबर 2026। दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत देहरादून जिले में अब तक 32 बच्चों का चिन्हीकरण किया गया है। इनमें से 22 बच्चों का उपचार आरबीएसके के अंतर्गत किया जा रहा है, जबकि 10 ऐसे बच्चे चिन्हित किए गए हैं, जो आरबीएसके के दायरे में नहीं आते हैं। इन दस बच्चों के उपचार के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएसआर फंड से 9.60 लाख रुपये की धनराशि मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से बच्चों का उपचार कराया जा रहा है।
जिला प्रशासन के सहयोग से दस बच्चों का उपचार कराया गया है। इनमें कई बच्चों की सर्जरी के साथ-साथ लंबे समय तक नियमित चिकित्सकीय पर्यवेक्षण की आवश्यकता है। गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित ऐसे बच्चे, जिनके अभिभावक महंगे उपचार का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हैं तथा जिन्हें सर्जरी अथवा लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता है, उनका उपचार देश के विभिन्न विशेषज्ञ एवं उच्च चिकित्सा सुविधाओं से युक्त संस्थानों में कराया जा रहा है। दुर्लभ रोगों के उपचार में कई बार अत्यधिक व्यय होने के साथ उपचार की अवधि भी लंबी होती है। ऐसे में उपचार को निरंतर बनाए रखने के लिए समयबद्ध आर्थिक एवं प्रशासनिक सहयोग आवश्यक है। डीएम ने आवश्यकता के अनुसार सीएसआर फंड के साथ-साथ राइफल क्लब फंड से भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आर्थिक कारणों से किसी भी बच्चे का उपचार बाधित न हो।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र बच्चे के उपचार में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति, चिकित्सकीय रेफरल, अनुमोदन तथा वित्तीय सहायता से संबंधित सभी औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण की जाएं, ताकि बच्चों को समय पर उपचार मिल सके। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि आरबीएसके योजना के अंतर्गत उपलब्ध सहायता के बाद भी किसी बच्चे के उपचार के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होती है, तो जिला प्रशासन राइफल क्लब फंड से आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराएगा।
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को सभी चिन्हित बच्चों के प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा उनके अभिभावकों से निरंतर संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए।
बैठक में प्रत्येक बच्चे के उपचार की वर्तमान स्थिति, चिकित्सकीय प्रगति, रेफरल प्रक्रिया, आर्थिक सहायता की उपलब्धता तथा उपचार से संबंधित अन्य व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई।



