आंध्रप्रदेश के बालमाला मल्ली की कूड़ा बीनने से लेकर स्वच्छ्ता उद्यमी बनने तक की यात्रा

Rajesh Pandey

नई दिल्ली, 15 सितंबर, 2026ः अनुसूचित जनजाति के 30 वर्षीय सदस्य बालमाला मल्ली दस वर्ष से आंध्र प्रदेश के गुंटूर नगर निगम में कचरा बीनने का काम कर रहे हैं। सप्ताह में छह दिन काम करते थे और प्रतिदिन लगभग 150 से 200 रुपये कमाते थे। मल्ली निर्धनता के कारण विद्यालय नहीं जा सके। माता-पिता अत्यंत निर्धन थे और बालमाला मल्ली औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने की बजाय कम उम्र से ही उनके साथ कूड़ा बीनने का काम करने लगे।

प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले तीन बच्चों के पिता बालमाला मल्ली परिवार की कठिन परिस्थितियों के बावजूद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य प्रदान करने की आकांक्षा रखते थे। मल्ली और चार अन्य सदस्यों के एक समूह को नमस्ते कार्यक्रम के घटक स्वच्छ उद्यमी योजना (एसयूवाई) के तहत 19 जून 2023 को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) की ओर से वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इससे समूह को मशीनीकृत स्वच्छता कार्यों के लिए 3-इन-1 जेटिंग, ग्रैबिंग और रॉडिंग मशीन खरीदने में सहायता मिली।

इस परियोजना की कुल लागत 49,40,710 रुपये थी। इसे 30,80,530 रुपये के ऋण और 18,60,180 रुपये की अग्रिम पूंजी सब्सिडी के माध्यम से सहायता प्रदान की गई थी। मशीन की उपलब्धता ने समूह के लिए आजीविका के अवसरों में वृद्धि की। साथ ही, कार्यों को सुरक्षित तथा अधिक कुशल यांत्रिक विधियों से पूरा करने में सक्षम बनाया। मल्ली यह सहायता मिलने से पूर्व कचरा बीनने के काम से लगभग 8,000 रुपये प्रति माह कमाते थे। 3-इन-1 मशीन मिलने के बाद उन्होंने 10,000 रुपये प्रति माह अतिरिक्त कमाना शुरू कर दिया, जिससे उनकी कुल मासिक आय बढ़कर लगभग 18,000 रुपये हो गई।

आय में वृद्धि से उनको घरेलू खर्चों को अधिक आसानी से पूरा करने अपने बच्चों की शिक्षा में सहायता और उन आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने में मदद मिली है, जो पहले उनके परिवार को प्रभावित करती थीं। इस सहायता से उनकी आजीविका मजबूत हुई है और उन्हें अधिक स्थिर और सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिली है।

उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि किस प्रकार से वित्तीय सहायता, सामूहिक उद्यम और मशीनीकृत स्वच्छता उपकरण आजीविका सुरक्षा में सुधार ला सकते हैं। कम आय वाले कूड़ा बीनने के काम पर निर्भर रहने से लेकर अब एक सामूहिक उद्यम का हिस्सा बन गए हैं, जिससे उनकी आमदनी के अवसरों में वृद्धि हुई है और उन्हें अपने परिवार के भविष्य के बारे में अधिक भरोसा मिला है।

मल्ली ने इस सहायता के बारे में बात करते हुए कहा,  इस सहायता से मेरी आय बढ़ाने और अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और अधिक सुरक्षित भविष्य प्रदान करने में मदद मिली है। अब मुझे अपने परिवार का भरण-पोषण करने और सम्मान के साथ जीवन जीने के लिए अधिक आत्मविश्वास महसूस होता है।

आज वह आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनके बच्चों को वह शिक्षा और अवसर मिलें जो गरीबी के कारण उन्हें नहीं मिल पाए थे। उनकी प्रगति  सुरक्षा, सम्मान और स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने में नमस्ते योजना के एसयूवाई घटक की भूमिका को दर्शाती है।- साभारः पीआईबी

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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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