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Reading: क्या डीप ओशन मिशन ब्लू इकोनॉमी में बदलाव लाएगा
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क्या डीप ओशन मिशन ब्लू इकोनॉमी में बदलाव लाएगा

Rajesh Pandey
Last updated: April 12, 2022 9:29 pm
Rajesh Pandey
4 years ago
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डमान द्वीप समूह में प्रवाल भित्तियों की एक प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटोः क्रिएटिव कॉमन्स)
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भारतीय समुद्री सीमा में गहरे समुद्र का अन्वेषण करने के लिए कुछ समय पूर्व ‘डीप ओशन मिशन’ शुरू किया गया है। ‘डीप ओशन मिशन’ के उद्देश्यों में गहरे समुद्र से संबंधित स्थितियों, जीवन अनुकूल अणुओं, तथा जैविक संघटकों की रचना संबंधी अध्ययन शामिल है, जो पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति पर प्रकाश डालने का प्रयास करेगा।

केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान डॉ जितेंद्र ने यह जानकारी संसद में प्रदान की। पृथ्वी का 70 प्रतिशत भाग जल से घिरा है, जिसमें विभिन्न प्रकार के समुद्री जीव-जंतु पाए जाते हैं। गहरे समुद्र के लगभग 95.8 फीसदी भाग मनुष्य के लिए, आज भी एक रहस्य हैं। गहरे समुद्र में छिपे इन रहस्यों को उजागर करने के लिए ‘डीप ओशन मिशन’ शुरू किया गया है। ‘डीप ओशन मिशन’ को शुरुआत में पाँच वर्ष के लिए मंजूरी मिली है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से किए जा रहे इस अध्ययन के समन्वय की जिम्मेदारी पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय को सौंपी गई है।

‘डीप ओशन मिशन’ का मुख्य लक्ष्य समुद्री संसाधनों को चिह्नित कर ब्लू इकोनॉमी को गति प्रदान करना है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि गहरे समुद्र में बायोफूलिंग (जैविक अवरोध ) तथा जीवन की उत्पत्ति संबंधी अध्ययन के लिए पाँच वर्ष की अवधि के लिए 58.77 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। जैविक अवरोध; सूक्ष्मजीवों, पौधों, शैवाल, या सूक्ष्मजीवों के जमाव को कहते हैं। जलस्रोतों में ऐसी स्थिति का एक उदाहरण- जहाजों और पनडुब्बी पतवारों पर जैविक पदार्थों का जमाव है।

इस मिशन के छह प्रमुख उद्देश्य हैं- इनमें गहरे समुद्र में खनन और मानव युक्त पनडुब्बी के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास, महासागर जलवायु परिवर्तन परामर्श सेवाओं का विकास, गहरे समुद्र में जैव विविधता की खोज एवं संरक्षण के लिए तकनीकी नवाचार, गहरे समुद्र में सर्वेक्षण व अन्वेषण, समुद्र से ऊर्जा एवं ताजा पानी प्राप्त करना, और समुद्री जीव-विज्ञान के लिए उन्नत समुद्री स्टेशन विकास शामिल हैं।

समुद्र में छह हजार मीटर नीचे कई प्रकार के खनिज पाए जाते हैं। इन खनिजों के बारे में अध्ययन नहीं हुआ है। इस मिशन के तहत इन खनिजों के बारे में अध्ययन एवं सर्वेक्षण का काम किया जाएगा, और इसके अलावा जलवायु परिवर्तन एवं समुद्र के जलस्तर के बढ़ने सहित गहरे समुद्र में होने वाले परिवर्तनों के बारे में भी अध्ययन किया जाएगा।- इंडिया साइंस वायर

 

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ByRajesh Pandey
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newslive24x7.com टीम के सदस्य राजेश पांडेय, उत्तराखंड के डोईवाला, देहरादून के निवासी और 1996 से पत्रकारिता का हिस्सा। अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान जैसे प्रमुख हिन्दी समाचार पत्रों में 20 वर्षों तक रिपोर्टिंग और एडिटिंग का अनुभव। बच्चों और हर आयु वर्ग के लिए 100 से अधिक कहानियां और कविताएं लिखीं। स्कूलों और संस्थाओं में बच्चों को कहानियां सुनाना और उनसे संवाद करना जुनून। रुद्रप्रयाग के ‘रेडियो केदार’ के साथ पहाड़ के गांवों की अनकही कहानियां लोगों तक पहुंचाईं और सामुदायिक जागरूकता के लिए काम किया। रेडियो ऋषिकेश के शुरुआती दौर में लगभग छह माह सेवाएं दीं। ऋषिकेश में महिला कीर्तन मंडलियों के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया। जीवन का मंत्र- बाकी जिंदगी को जी खोलकर जीना चाहता हूं, ताकि बाद में ऐसा न लगे कि मैं तो जीया ही नहीं। शैक्षणिक योग्यता: बी.एससी (पीसीएम), पत्रकारिता स्नातक, एलएलबी संपर्क: प्रेमनगर बाजार, डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड-248140 ईमेल: rajeshpandeydw@gmail.com फोन: +91 9760097344
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Sajani Pandey Editor newslive24x7.com

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